शाबरीन की इस अभूतपूर्व सफलता ने यह साबित कर दिया है कि सीमित संसाधन और आर्थिक चुनौतियां कभी भी सफलता की राह में बाधा नहीं बन सकतीं, यदि इरादे मजबूत हों और मेहनत सच्ची हो। उनकी उपलब्धि ने न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे गांव और जिले का नाम रोशन कर दिया है। परिणाम घोषित होते ही छौराही गांव में जश्न का माहौल बन गया। गांव के लोग खुशी से झूम उठे, एक-दूसरे को मिठाइयां खिलाईं और इस गौरवपूर्ण क्षण का सामूहिक उत्सव मनाया।

शाबरीन परवीन ने मीडिया से बातचीत के दौरान बताया, “मैंने 492 अंक प्राप्त किए हैं। मैंने अपनी पढ़ाई स्कूल में और यूट्यूब के माध्यम से की। मेरे भाई ने भी पढ़ाई में मेरी बहुत मदद की। मेरा सपना डॉक्टर बनने का है और इसके लिए मैं NEET की तैयारी करूंगी।” उनकी यह बात न केवल उनकी मेहनत को दर्शाती है, बल्कि उनके भविष्य के स्पष्ट लक्ष्य और समर्पण को भी उजागर करती है।
सबसे खास बात यह है कि शाबरीन ने अपनी पूरी पढ़ाई गांव में रहकर ही पूरी की। आज के समय में जहां बेहतर शिक्षा के लिए बड़े शहरों की ओर रुख किया जाता है, वहीं शाबरीन ने यह दिखा दिया कि अगर लगन हो तो गांव में रहकर भी बड़े सपने पूरे किए जा सकते हैं। उन्होंने स्कूल की पढ़ाई के साथ-साथ डिजिटल माध्यम जैसे यूट्यूब का भी प्रभावी उपयोग किया, जो उनके आत्मनिर्भर और स्मार्ट अध्ययन का प्रमाण है।
उनके पिता मोहम्मद सज्जाद आलम पश्चिम बंगाल के रामपुरहाट में एक छोटी सी टायर की दुकान चलाते हैं। उसी आय से पूरे परिवार का भरण-पोषण होता है। आर्थिक रूप से साधारण पृष्ठभूमि के बावजूद उन्होंने अपनी बेटी की पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने दी। शाबरीन की मां एक गृहिणी हैं, जो घर की जिम्मेदारियों के साथ बच्चों की पढ़ाई पर भी पूरा ध्यान देती हैं। तीन भाई-बहनों में सबसे बड़ी शाबरीन बचपन से ही पढ़ाई में मेधावी रही हैं और हमेशा कुछ बड़ा करने का सपना देखती थीं।
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उनके पिता ने मीडिया से बातचीत में बताया कि बेटी के शानदार परिणाम के बाद पूरा परिवार बेहद खुश है। रिजल्ट आने के बाद से ही घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। उन्होंने बताया कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद उनकी बेटी ने कभी हार नहीं मानी और लगातार मेहनत करती रही। इस वर्ष बिहार बोर्ड की मैट्रिक परीक्षा में छात्राओं का दबदबा साफ देखने को मिला। जमुई जिले के सिमुलतला की पुष्पांजलि कुमारी ने भी 492 अंक प्राप्त कर शाबरीन के साथ संयुक्त रूप से टॉप किया। यह इस बात का प्रमाण है कि बेटियां आज हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं।
परीक्षा के आंकड़ों पर नजर डालें तो इस वर्ष कुल 15 लाख से अधिक छात्र-छात्राएं परीक्षा में शामिल हुए थे। परीक्षा का आयोजन 17 फरवरी से 26 फरवरी 2026 के बीच राज्यभर के 1762 केंद्रों पर किया गया था। परिणाम के अनुसार कुल 12 लाख 35 हजार 743 छात्र सफल घोषित किए गए, जिससे कुल पास प्रतिशत 81.79% रहा, जो बिहार बोर्ड के बेहतर परिणामों में गिना जा रहा है।
— ANI (@ANI) March 30, 2026
रिजल्ट की घोषणा बिहार के शिक्षा मंत्री Sunil Kumar ने की, जिसमें बोर्ड के अध्यक्ष Anand Kishor भी मौजूद रहे। इस दौरान टॉपर्स की सूची में छात्राओं का शानदार प्रदर्शन देखने को मिला, जिसने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि सही मार्गदर्शन और मेहनत से बेटियां हर ऊंचाई को छू सकती हैं। शाबरीन परवीन की सफलता केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह उन लाखों छात्रों के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के बीच अपने सपनों को पूरा करने की कोशिश कर रहे हैं। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो, मेहनत निरंतर हो और आत्मविश्वास मजबूत हो, तो कोई भी बाधा सफलता की राह नहीं रोक सकती।
आज शाबरीन न केवल अपने परिवार की शान हैं, बल्कि पूरे बिहार की बेटियों के लिए एक मिसाल बन चुकी हैं। उनका डॉक्टर बनने का सपना और NEET की तैयारी का संकल्प यह दर्शाता है कि उनकी यह सफलता केवल एक शुरुआत है। आने वाले समय में वे निश्चित रूप से और भी बड़ी उपलब्धियां हासिल करेंगी। इस तरह, हाजीपुर के पास स्थित एक छोटे से गांव से निकली यह बेटी आज पूरे राज्य की पहचान बन गई है। शाबरीन परवीन की यह कहानी आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी और यह याद दिलाती रहेगी कि सपने देखने वालों की कभी हार नहीं होती।