अमीना माजिद / नई दिल्ली
भारत के पैरा पावरलिफ्टिंग खिलाड़ी गुलफाम अहमद ने एक बार फिर देश का नाम अंतरराष्ट्रीय मंच पर रोशन किया है। जापान के क्योटो शहर में आयोजित 2026 चैलेंज कप क्योटो टूर्नामेंट में उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। 65 किलोग्राम भार वर्ग में उन्होंने 155 किलोग्राम वजन उठाकर प्रतियोगिता में पहला स्थान हासिल किया।
30 और 31 मई 2026 को आयोजित इस प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में गुलफाम की जीत ने भारतीय पैरा खेल जगत को नई खुशी दी है। उनकी इस उपलब्धि की चर्चा खेल प्रेमियों के साथ साथ पैरा स्पोर्ट्स समुदाय में भी हो रही है।

दिल्ली के भजनपुरा निवासी गुलफाम अहमद लंबे समय से पैरा पावरलिफ्टिंग में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। सीमित संसाधनों और व्यक्तिगत संघर्षों के बावजूद उन्होंने जिस तरह खुद को साबित किया है, वह युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का बड़ा स्रोत बन चुका है।
क्योटो में हुए मुकाबले के दौरान गुलफाम अहमद ने बेहतरीन आत्मविश्वास दिखाया। प्रतियोगिता के शुरुआती दौर से ही वह मजबूत दावेदार नजर आ रहे थे। निर्णायक प्रयास में 155 किलोग्राम वजन सफलतापूर्वक उठाकर उन्होंने स्वर्ण पदक पर कब्जा जमा लिया।
यह पहली बार नहीं है जब गुलफाम ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का झंडा बुलंद किया हो। जून 2025 में चीन की राजधानी बीजिंग में आयोजित पैरा पावरलिफ्टिंग विश्व कप में उन्होंने कांस्य पदक जीतकर देश को गौरवान्वित किया था। उस प्रदर्शन ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई थी और अब जापान में जीता गया स्वर्ण पदक उनके करियर का एक और महत्वपूर्ण अध्याय बन गया है।
If Being In Charhdi Kala Had A Face..
— Hatinder Singh🦅🦅 (@Panjaab131313) May 30, 2026
S. Chandeep Singh wins gold at 11th Asian Para Taekwondo Championships in Mongolia, brings Glory To India
11-year-old He Suffered a life-threatening electric current of 11,000 volts. Survived But Never Gave Up.
Congratulations Veer.
🙏❤️ pic.twitter.com/xNVObu8Tfp
राष्ट्रीय स्तर पर भी गुलफाम का रिकॉर्ड बेहद प्रभावशाली रहा है। अब तक वह दस बार राष्ट्रीय पदक जीत चुके हैं। उनके खाते में दो स्वर्ण पदक, दो रजत पदक और छह कांस्य पदक दर्ज हैं। लगातार अच्छे प्रदर्शन ने उन्हें भारत के उभरते हुए पैरा पावरलिफ्टरों में शामिल कर दिया है।
गुलफाम अहमद की उपलब्धियों की सूची यहीं समाप्त नहीं होती। उन्होंने दिल्ली में आयोजित पहले खेलो इंडिया पैरा गेम्स 2023 में कांस्य पदक हासिल किया था। इसके बाद खेलो इंडिया पैरा गेम्स 2025 में उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक जीता। इन सफलताओं ने उन्हें भारतीय पैरा पावरलिफ्टिंग का एक मजबूत चेहरा बना दिया।
हालांकि खेल के मैदान में दिखाई देने वाली सफलता के पीछे संघर्षों की एक लंबी कहानी भी छिपी हुई है। गुलफाम अहमद का जीवन कई कठिन दौरों से गुजरा है। वर्ष 2021 में उन्होंने अपनी मां को खो दिया। इस दुख से वह पूरी तरह उबर भी नहीं पाए थे कि वर्ष 2024 में कैंसर के कारण उनके पिता का भी निधन हो गया।
कम समय में माता और पिता दोनों को खो देना किसी भी व्यक्ति के लिए बेहद कठिन स्थिति होती है। लेकिन गुलफाम ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपने दर्द को अपनी ताकत बनाया और खेल पर पूरा ध्यान केंद्रित रखा। यही कारण है कि आज वह अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और लगातार सफलता हासिल कर रहे हैं।
जापान में स्वर्ण पदक जीतने के बाद गुलफाम ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि यह जीत उनके लिए बहुत खास है। उन्होंने इस उपलब्धि को अपने दिवंगत माता पिता को समर्पित किया। उन्होंने कहा कि जीवन के सबसे मुश्किल दौर में भी उन्होंने अपने सपनों को नहीं छोड़ा और आगे बढ़ते रहे।
भविष्य की योजनाओं पर बात करते हुए गुलफाम अहमद ने कहा कि अब उनका पूरा ध्यान आगामी एशियन पैरा गेम्स पर है। उनका लक्ष्य वहां पदक जीतकर भारत का गौरव बढ़ाना है। इसके साथ ही वह पैरालंपिक खेलों के लिए क्वालीफाई करना चाहते हैं। उनका सपना है कि पैरालंपिक मंच पर तिरंगा लहराते हुए देश के लिए पदक जीतें।
गुलफाम अहमद ने अपनी सफलता के पीछे कई लोगों के योगदान को भी याद किया। उन्होंने अपने कोच राजिंदर सिंह रहलू का विशेष आभार व्यक्त किया। उनका कहना है कि कोच ने हर मुश्किल समय में उनका मार्गदर्शन किया और हमेशा बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने इंडिया पैरा पावरलिफ्टिंग फेडरेशन के चेयरमैन जेपी सिंह का भी धन्यवाद किया। गुलफाम के अनुसार जेपी सिंह ने हमेशा खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ाया और उन्हें आगे बढ़ने के अवसर दिए।
इसके अलावा इंडिया पैरा पावरलिफ्टिंग फेडरेशन के मुख्य परिचालन अधिकारी नितिन आर्य के सहयोग को भी उन्होंने महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों को मिलने वाला प्रशासनिक और तकनीकी समर्थन उनके प्रदर्शन में बड़ी भूमिका निभाता है।
गुलफाम ने शिव नरेश का भी आभार व्यक्त किया जिन्होंने खिलाड़ियों को गुणवत्तापूर्ण खेल सामग्री उपलब्ध कराई। साथ ही एडीपी और एचसीएल फाउंडेशन को भी धन्यवाद दिया, जिनके पोषण संबंधी सहयोग ने उन्हें फिटनेस बनाए रखने में मदद की।

उन्होंने दिल्ली पैरा स्पोर्ट्स एसोसिएशन के सचिव गौरव और सूरत के विवेक भाई का भी विशेष रूप से जिक्र किया। गुलफाम ने कहा कि इन लोगों का विश्वास और समर्थन उनके सफर में हमेशा प्रेरणा का स्रोत बना रहा।
आज गुलफाम अहमद की कहानी सिर्फ एक खिलाड़ी की सफलता की कहानी नहीं है। यह संघर्ष, धैर्य, मेहनत और अटूट विश्वास की कहानी है। उन्होंने साबित किया है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, अगर इरादे मजबूत हों तो सफलता का रास्ता जरूर निकलता है।
जापान में जीता गया यह स्वर्ण पदक केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है बल्कि भारतीय पैरा खेलों की बढ़ती ताकत का भी प्रतीक है। खेल जगत को अब उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में गुलफाम अहमद एशियन पैरा गेम्स और पैरालंपिक जैसे बड़े मंचों पर भी भारत के लिए नए कीर्तिमान स्थापित करेंगे।