नई दिल्ली।
जामिया मिल्लिया इस्लामिया के हिंदी विभाग के प्रोफेसर और चर्चित शायर रहमान मुसव्विर को वर्ष 2026 के प्रतिष्ठित ‘हंस ग़ज़ल सम्मान’ से सम्मानित किया गया। यह सम्मान प्रसिद्ध लेखक और ‘हंस’ पत्रिका के संस्थापक संपादक राजेंद्र यादव की स्मृति में विभिन्न साहित्यिक विधाओं में उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रदान किया जाता है।
नई दिल्ली स्थित इंडिया इंटरनेशनल सेंटर के कमला देवी सभागार में आयोजित गरिमापूर्ण समारोह में रहमान मुसव्विर को यह सम्मान प्रसिद्ध शायर प्रो. शाहपर रसूल ने प्रदान किया। सम्मान प्रदान करते हुए प्रो. शाहपर रसूल ने कहा कि रहमान मुसव्विर की ग़ज़लों में फ़न, ज़बान और मजमूई तास्सुर का बेहतरीन संतुलन दिखाई देता है। उनकी शायरी वियोग, याद, नदामत और अंदरूनी बेचैनी जैसे भावों को बेहद संतुलित, सलीकेदार और मुहज़्ज़ब लहजे में सामने रखती है।
समारोह में साहित्य और संस्कृति जगत की अनेक जानी-मानी हस्तियों की मौजूदगी रही। हंस के संपादक संजय सहाय, हंसाक्षर की मुख्य ट्रस्टी रचना यादव, प्रख्यात आलोचक पुरुषोत्तम अग्रवाल, कवयित्री सुमन केसरी, कवि मदन कश्यप, लेखक प्रभात रंजन, शायर मुईन शादाब, शायर शाहिद अंजुम, कहानीकार राकेश बिहारी, कहानीकार अजय नावरिया, लेखिका मृदुला गर्ग, लेखिका गीताश्री और कवयित्री शोभा अक्षर सहित बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी समारोह में उपस्थित रहे।
रहमान मुसव्विर मूल रूप से उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के कैलाशपुर के रहने वाले हैं। उनकी प्रारंभिक और उच्च शिक्षा सहारनपुर के इस्लामिया इंटर कॉलेज, महाराज सिंह कॉलेज और जे.वी. जैन कॉलेज से हुई। इसके बाद उन्होंने जामिया मिल्लिया इस्लामिया से ‘पाकिस्तानी उर्दू कथा साहित्य में भारतीय मिथक’ विषय पर पीएच.डी. की। उनके शोध निर्देशक प्रसिद्ध लेखक और साहित्यकार प्रो. असग़र वजाहत रहे।
शिक्षण और शोध के साथ रहमान मुसव्विर ने साहित्य की दुनिया में भी अपनी अलग पहचान बनाई है। हिंदी और उर्दू दोनों भाषाओं में उनकी सक्रिय मौजूदगी रही है। उनकी ग़ज़लों में संवेदना, सामाजिक अनुभव और मानवीय मन की जटिलताओं का प्रभावशाली मेल दिखाई देता है। यही वजह है कि उन्हें हिंदी और उर्दू शायरी के प्रतिष्ठित नामों में गिना जाता है।
रहमान मुसव्विर ने साहित्यिक लेखन तक खुद को सीमित नहीं रखा। उन्होंने रेडियो, टेलीविजन और फिल्मों के लिए स्क्रिप्ट और गीत भी लिखे हैं। देश और विदेश में आयोजित विभिन्न हिंदी और उर्दू साहित्यिक मंचों पर वे लगातार अपनी शायरी प्रस्तुत करते रहे हैं।
उनकी रचनात्मक सक्रियता का दायरा साहित्यिक मंचों से लेकर जनसंचार माध्यमों तक फैला हुआ है। शायरी में भाषा की रवानी और भावों की गहराई उनकी पहचान मानी जाती है।
‘हंस ग़ज़ल सम्मान 2026’ रहमान मुसव्विर के साहित्यिक योगदान की इसी निरंतर यात्रा की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे पहले भी उन्हें ‘काव्य सुमन अलंकरण’ और ‘नूरे-ग़ज़ल सम्मान’ जैसे प्रतिष्ठित सम्मान मिल चुके हैं।
रहमान मुसव्विर को मिला यह सम्मान न केवल उनकी शायरी के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है, बल्कि हिंदी और उर्दू के बीच साहित्यिक संवाद को मजबूत करने वाली उनकी रचनात्मक भूमिका की भी स्वीकारोक्ति है।