लोकतंत्र मजबूत करने को झूठी सूचनाओं पर लगाम जरूरी: उस्मानिया विवि में उर्दू पत्रकारों के लिए पहली फैक्ट चेक वर्कशॉप

Story by  मलिक असगर हाशमी | Published by  [email protected] • 2 Months ago
लोकतंत्र मजबूत करने को झूठी सूचनाओं पर लगाम जरूरी: उस्मानिया विवि में उर्दू पत्रकारों के लिए पहली फैक्ट चेक वर्कशॉप
लोकतंत्र मजबूत करने को झूठी सूचनाओं पर लगाम जरूरी: उस्मानिया विवि में उर्दू पत्रकारों के लिए पहली फैक्ट चेक वर्कशॉप

 

आवाज द वाॅयस / हैदराबाद

अमेरिकी राजनयिक फ्रेंकी स्टॉर्म ने कहा कि लोकतंत्र मजबूत करने के लिए झूठी सूचनाओं को खत्म करना जरूरी है. लोगों को सही जानकारी देकर लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की आजादी को और मजबूत किया जा सकता है.

वह हैदराबाद के उस्मानिया यूनिवर्सिटी में उर्दू पत्रकारिता में फैक्ट चेक के महत्व पर बोल रहे थे. उन्होंने कहा कि सटीक जानकारी लोकतंत्र का स्तंभ है. जनता को सटीक जानकारी प्रदान करने में पत्रकार महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.

उस्मानिया विश्वविद्यालय में उर्दू पत्रकारों के लिए आयोजित पहली ऑफलाइन फैक्ट चेक कार्यशाला को संबोधित करते हुए हैदराबाद में संयुक्त राज्य अमेरिका के महावाणिज्य दूतावास के सार्वजनिक कूटनीति अधिकारी फ्रेंकी स्टॉर्म  ने कहा कि कैसे गलत सूचनाएं लोकतंत्र को खतरे में डाल रही हैं.

फ्रेंकी स्टॉर्म हैदराबाद में उर्दू पत्रकारों के लिए फैक्ट चेक ट्रेनिंग कोर्स के पहले ऑफलाइन सत्र में सम्मानित अतिथि थे. यह कार्यशाला अमेरिकी वाणिज्य दूतावास और उस्मानिया विश्वविद्यालय के पत्रकारिता और जनसंचार विभाग के सहयोग से आयोजित की गई.

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फ्रेंकी स्टॉर्म ने बताया कि कैसे पत्रकार अपने पाठकों और दर्शकों के लाभ के लिए गलत सूचनाओं का मुकाबला कर सकते हैं. उन्होंने उस्मानिया विश्वविद्यालय में उर्दू पत्रकारों के लिए झूठी सूचनाओं का मुकाबला करने के लिए विस्तृत बातचीत की.

कार्यशाला के आयोजकों के अनुसार, इसमें करीब 35उर्दू पत्रकारों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है. इसका मुख्य उद्देश्य फर्जी खबरों को खत्म करना और तथ्यों को सामने लाना है. पहले चरण में लगभग 40 तेलुगु टीवी पत्रकारों को सफलतापूर्वक प्रशिक्षित और प्रमाणित किया गया.

फ्रेंकी स्टॉर्म ने कहा कि उर्दू पत्रकारों के लिए इस उत्कृष्ट कार्यक्रम के आयोजन के लिए मैं उस्मानिया विश्वविद्यालय का आभारी हूं. विश्वास है कि इस कार्यक्रम के बाद और अधिक सटीक जानकारी प्रसारित करने की प्रवृत्ति विकसित होगी. फेक न्यूज को रोका जाएगा.

उस्मानिया विश्वविद्यालय में पत्रकारिता और सार्वजनिक प्रसारण विभाग के प्रमुख प्रो स्टीवेंसन कुहिर ने भी बात की.उस्मानिया विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डी. रविंदर ने याद दिलाया कि इतिहास में पहली बार जामिया उस्मानिया (अब उस्मानिया विश्वविद्यालय) ने उर्दू भाषा को शिक्षा के माध्यम के रूप में पेश किया.

वर्षों तक यहां उर्दू भाषा को शिक्षा के माध्यम के रूप में इस्तेमाल किया गया. उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का अमेरिकी वाणिज्य दूतावास के साथ लंबा संबंध है. प्रो. डी. रविंदर ने तथ्य-जांच कार्यालय का समर्थन करने के लिए अमेरिकी महावाणिज्य दूतावास को धन्यवाद दिया. उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में आने वाले शैक्षणिक वर्ष से साइबर सुरक्षा पाठ्यक्रम शुरू करने की योजना है.

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अनुसंधान का महत्व

कार्यशाला में हैदराबाद की पुलिस उपायुक्त (साइबर अपराध) स्नेहा मेहरा ने अपने संबोधन में अनुसंधान और जांच के महत्व पर जोर दिया. इसका जिक्र करते हुए कहा कि भारत सोशल मीडिया पर गलत सूचना फैलाने वाले शीर्ष तीन देशों में एक है.

वैश्विक महामारी कोरोना वायरस, चुनाव, किसानों के विरोध प्रदर्षन के दौरान फेक न्यूज का चलन बढ़ा है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म में जवाबदेही की कमी पर अफसोस जताया.

स्नेहा मेहरा ने कहा कि सरकार की ओर से मीडिया साक्षरता और पारदर्शिता से स्थिति में मदद मिल सकती है. हमें वास्तव में सोशल मीडिया उपयोगकर्ता की जवाबदेही और अधिक स्वतंत्र तथ्य-जांच की आवश्यकता है. आलोचनात्मक सोच, सामग्री की सटीक प्रस्तुति और डिजिटल साक्षरता के माध्यम से गलत सूचनाओं का मुकाबला करना संभव है.

उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया पर गलत सूचनाओं से निपटने के लिए पर्याप्त संसाधनों की कमी लोगों को नुकसान पहुंचा रही है.उस्मानिया विश्वविद्यालय में पत्रकारिता और जनसंचार विभाग के प्रमुख प्रोफेसर स्टीवेन्सन कोहिर ने प्रतिभागियों का स्वागत किया .

अमेरिकी महावाणिज्य दूतावास को उनके सहयोग के लिए धन्यवाद दिया. परियोजना के उद्देश्यों के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि उर्दू पत्रकारों को फैक्ट चेक कौशल, उपकरण और तकनीकों से परिचित कराने की योजना है, ताकि समाचार रिपोर्टिंग के दौरान मुख्यधारा के मीडिया में गलत सूचना को फैलने से रोका जा सके.

उन्होंने कहा कि परियोजना मिश्रित मोड में 40 घंटे की है. इसमें मुख्यधारा के उर्दू चैनलों और डिजिटल प्लेटफॉर्म के 35 टीवी पत्रकार शामिल हुए और प्रशिक्षण प्राप्त किया.