एएमयू में इंफेक्शन प्रिवेंशन और एंटीमाइक्रोबियल स्टेवर्डशिप पर फाउंडेशन कोर्स

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 21-02-2026
Foundation Course on Infection Prevention and Antimicrobial Stewardship at AMU
Foundation Course on Infection Prevention and Antimicrobial Stewardship at AMU

 

अलीगढ़

Aligarh Muslim University के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल की हॉस्पिटल इंफेक्शन कंट्रोल कमेटी ने 16–17 फरवरी को “इंफेक्शन प्रिवेंशन, कंट्रोल एवं इंटीग्रेटेड एंटीमाइक्रोबियल स्टेवर्डशिप (AMSP)” पर दो दिवसीय फाउंडेशन कोर्स आयोजित किया। यह कार्यक्रम Society of Antimicrobial Stewardship Practices in India के तत्वावधान में आयोजित हुआ और विशेष रूप से प्रथम वर्ष के एमडी/एमएस स्नातकोत्तर विद्यार्थियों के लिए तैयार किया गया था, ताकि उन्हें सुरक्षित और जिम्मेदार क्लिनिकल प्रैक्टिस के लिए आवश्यक ज्ञान व व्यावहारिक दक्षताएं प्रदान की जा सकें।

कोर्स का उद्देश्य संक्रमण की रोकथाम और नियंत्रण (IPC) तथा इंटीग्रेटेड एंटीमाइक्रोबियल स्टेवर्डशिप की बुनियादी समझ को मजबूत करना था। यह पहल एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस जैसी बढ़ती सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती से निपटने के राष्ट्रीय और वैश्विक प्रयासों के अनुरूप है। उद्घाटन सत्र में फैकल्टी ऑफ मेडिसिन के डीन प्रो. मोहम्मद खालिद ने कहा कि संक्रमण नियंत्रण के सिद्धांतों की प्रारंभिक ट्रेनिंग रेजिडेंट डॉक्टरों के पेशेवर दृष्टिकोण और मरीज सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को आकार देती है। जेएनएमसी के प्रिंसिपल प्रो. अंजुम परवेज ने हेल्थकेयर-असोसिएटेड इंफेक्शंस के वैश्विक आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि ये संक्रमण अस्पताल में भर्ती अवधि बढ़ाते हैं, इलाज की लागत में इजाफा करते हैं और मरीजों व परिजनों पर मानसिक दबाव डालते हैं।

कोर्स कोऑर्डिनेटर प्रो. तमकीन खान ने सेप्सिस के वास्तविक क्लिनिकल मामलों के उदाहरण देकर संक्रमण रोकथाम को मृत्यु दर और जटिलताओं को कम करने का प्रभावी साधन बताया। प्रो. आदिल रजा ने माइक्रोबायोलॉजी लैब की भूमिका पर जोर देते हुए समयबद्ध और सटीक रिपोर्टिंग के महत्व को रेखांकित किया। प्रो. फातिमा खान ने प्रशिक्षुओं को “प्रिमम नॉन नोसेरे” यानी “पहले, किसी को नुकसान न पहुंचाएं” के नैतिक सिद्धांत का पालन करने की सलाह दी। कार्यक्रम की कार्यवाही का समन्वय डॉ. शारिक अहमद ने किया।

सत्रों में हैंड हाइजीन, बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट, एसेप्सिस, स्टरलाइजेशन, डिसइंफेक्शन और क्रिटिकल केयर क्षेत्रों की सफाई जैसे विषय शामिल रहे। साथ ही सैंपल कलेक्शन, लैब प्रक्रिया, एंटीबायोटिक नीति निर्माण, प्री-ऑथराइजेशन, IV-टू-ओरल स्विच और ऑडिट-फीडबैक जैसे व्यावहारिक पहलुओं पर भी प्रशिक्षण दिया गया। प्रतिभागियों को CLABSI, CAUTI, SSI, VAP और सेप्सिस जैसी स्वास्थ्य-सेवा संबंधी संक्रमणों को कम करने की रणनीतियों से अवगत कराया गया, जिससे संस्थान में क्लिनिकल तैयारी और मरीज सुरक्षा को नई मजबूती मिली।