ओनिका माहेश्वरी/ नई दिल्ली
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में हुई एक दर्दनाक घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। यहां 12, 14 और 16 साल की तीन नाबालिग बहनों ने कथित तौर पर अपने अपार्टमेंट की नौवीं मंज़िल से कूदकर जान दे दी। इस घटना ने न सिर्फ़ किशोरों की मानसिक सेहत पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि यह बहस भी शुरू कर दी है कि ऑनलाइन दुनिया और कुछ पॉपुलर कल्चरल ट्रेंड्स युवाओं को किस तरह प्रभावित कर रहे हैं।

पुलिस को घटनास्थल से एक डायरी मिली है, जिसे कथित तौर पर लड़कियों ने लिखा था। डायरी में उन्होंने कोरियन कल्चर के प्रति अपने गहरे लगाव का ज़िक्र किया है। इसमें K-पॉप, कोरियन ड्रामा, फिल्में, म्यूज़िक, शॉर्ट फिल्में और वेब सीरीज़ पसंद करने की बातें लिखी गई थीं।
कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, दीवार पर लिखा एक मैसेज भी मिला, जिसमें अकेलेपन और भावनात्मक दर्द का ज़िक्र था।
शुरुआत में यह दावा किया गया कि लड़कियां किसी ऑनलाइन टास्क-बेस्ड गेम, जिसे “कोरियन लव गेम” कहा जा रहा था, की आदी थीं। हालांकि, गाजियाबाद के डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (DCP) निमिष पाटिल ने साफ़ किया कि जांच में ऐसे किसी गेम का कोई ठोस सबूत नहीं मिला है।
पुलिस के मुताबिक, लड़कियां कोरियन कल्चर से प्रभावित थीं और हाल ही में परिवार द्वारा मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर कुछ समय के लिए रोक लगाई गई थी।
कोरियन कल्चर और टॉक्सिक ऑनलाइन ट्रेंड्स का कनेक्शन?
यह समझना ज़रूरी है कि इस घटना के लिए किसी एक कल्चर को दोषी ठहराना सही नहीं होगा। मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी ऐसी घटनाओं के पीछे अक्सर कई कारण होते हैं — जैसे भावनात्मक अकेलापन, सामाजिक दबाव, पारिवारिक स्थितियां और ऑनलाइन कंटेंट का असर।
हालांकि, अतीत में कुछ ऐसे ऑनलाइन चैलेंज और ट्रेंड्स सामने आए हैं जो दक्षिण कोरिया समेत दुनिया के कई हिस्सों में वायरल हुए। इनमें “ब्लू व्हेल चैलेंज” और “इरेज़र चैलेंज” जैसे उदाहरण शामिल हैं, जिनमें जोखिम भरे व्यवहार को बढ़ावा मिला।
दक्षिण कोरिया एक विकसित देश है, लेकिन वहां का सामाजिक और शैक्षणिक ढांचा बेहद प्रतिस्पर्धी माना जाता है।
कड़ी शिक्षा प्रणाली:
कोरियाई छात्रों पर पढ़ाई और परीक्षा का भारी दबाव होता है। “सुनुंग” जैसी हाई-स्टेक परीक्षाएं और “हगवॉन” कोचिंग कल्चर छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है।
मेंटल हेल्थ पर बात करने में झिझक:
भारतीय समाज की तरह ही, दक्षिण कोरिया में भी डिप्रेशन, एंग्जायटी और मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं पर खुलकर बात करना आसान नहीं है।
पितृसत्तात्मक और अनुशासन आधारित समाज:
कन्फ्यूशियस मूल्यों पर आधारित समाज में युवाओं से उम्मीद की जाती है कि वे व्यक्तिगत इच्छाओं से ऊपर परिवार और समाज को प्राथमिकता दें, जिससे तनाव और दबाव बढ़ता है।
K-पॉप स्टार्स की चमक-दमक के पीछे बेहद सख़्त और नियंत्रित जीवनशैली छिपी होती है। लंबे ट्रेनिंग शेड्यूल, सख़्त नियम, निजी ज़िंदगी पर नियंत्रण और लगातार परफॉर्म करने का दबाव — ये सभी बातें दिखाती हैं कि यह तनाव समाज के हर स्तर पर मौजूद है।
दक्षिण कोरिया में दुनिया की सबसे तेज़ इंटरनेट स्पीड और स्मार्टफोन की व्यापक पहुंच है। किशोरों में स्मार्टफोन पर निर्भरता का स्तर काफ़ी ऊंचा बताया जाता है। ऐसे माहौल में सोशल मीडिया एल्गोरिदम, ऑनलाइन गेम्स और चैलेंज कभी-कभी कमज़ोर मानसिक स्थिति वाले युवाओं पर नकारात्मक असर डाल सकते हैं।

भारत में पिछले एक दशक में K-पॉप, K-ड्रामा और कोरियन लाइफस्टाइल को लेकर जबरदस्त क्रेज़ देखने को मिला है, ख़ासकर Gen Z के बीच। इसकी वजह आकर्षक स्टोरीटेलिंग, म्यूज़िक, फैशन और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर आसान उपलब्धता है।
हालांकि, ज़्यादातर फैंस के लिए यह सिर्फ़ एंटरटेनमेंट है और नुकसानदायक नहीं, लेकिन जब अकेलापन, भावनात्मक तनाव और अनियंत्रित ऑनलाइन एक्सेस साथ आ जाते हैं, तब समस्या पैदा हो सकती है।
गाजियाबाद की यह घटना हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि टीनएजर्स की मेंटल हेल्थ को लेकर परिवार, स्कूल और समाज को ज़्यादा सतर्क और संवेदनशील होने की ज़रूरत है। मुद्दा किसी एक देश या कल्चर को दोष देने का नहीं है, बल्कि यह समझने का है कि हाई-प्रेशर माहौल, भावनात्मक अकेलापन और बिना निगरानी के डिजिटल एक्सेस मिलकर युवाओं पर क्या असर डाल सकते हैं।