हैदराबाद: मौलाना आजाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी (MANUU) के कुलपति प्रो. सैयद ऐनुल हसन ने कहा है कि एक स्वस्थ और समावेशी समाज के निर्माण के लिए विभिन्न सभ्यताओं के बीच संवाद, विचारों का आदान-प्रदान और एक-दूसरे के विचारों का सम्मान बेहद जरूरी है। असहमति को सकारात्मक रूप से स्वीकार करने की भावना ही सामाजिक एकता और सांप्रदायिक सद्भाव को मजबूत बनाती है।
वह शुक्रवार को MANUU में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। कार्यशाला का विषय ‘मुस्लिम युवा और बहुलतावाद की भावना : सांप्रदायिक सद्भाव और साझा नागरिकता को मजबूत करना’ है।
विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग और इस्लामिक स्टडीज विभाग ने बिलियन कनेक्ट प्राइवेट लिमिटेड के सहयोग से 5 से 7 नवंबर 2026 तक इस राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया है।
उद्घाटन सत्र में मुख्य वक्तव्य देते हुए कुलपति प्रो. सैयद ऐनुल हसन ने आदर्शवाद के महत्व पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि आदर्शवाद केवल विचारों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारी सोच को परिष्कृत करने और जागरूकता एवं चेतना विकसित करने की प्रक्रिया है।
उन्होंने कहा कि आदर्शवादी दृष्टिकोण व्यक्ति को आत्मचिंतन करने, अपनी कमियों को पहचानने और उनमें सुधार की दिशा में काम करने के लिए प्रेरित करता है। इससे व्यक्ति का बौद्धिक और नैतिक विकास होता है।
प्रो. ऐनुल हसन ने विभिन्न सभ्यताओं के बीच संवाद को लगातार बनाए रखने की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि विचारों का आदान-प्रदान, रचनात्मक चर्चा, सवाल पूछने की स्वतंत्रता और अलग-अलग मतों को सकारात्मक रूप से स्वीकार करना एक स्वस्थ समाज की बुनियाद है।
कार्यशाला के उद्देश्य और उसकी प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए इस्लामिक स्टडीज विभाग के अध्यक्ष और कार्यशाला के सह-संयोजक प्रो. मोहम्मद हबीब ने स्वागत भाषण दिया।वहीं, राजनीति विज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो. ए. नागेश्वर राव ने कार्यशाला का परिचय देते हुए इसके विषय के अकादमिक और सामाजिक महत्व को रेखांकित किया।
कार्यशाला के संयोजक और राजनीति विज्ञान विभाग के प्रो. अफरोज आलम ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।कार्यशाला का उद्देश्य मुस्लिम युवाओं के बीच बहुलतावादी सोच, सामाजिक सौहार्द और साझा नागरिकता की समझ को प्रोत्साहित करने से जुड़े मुद्दों पर अकादमिक विमर्श को आगे बढ़ाना है।