दुबई
संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और ईरान के बीच कथित तौर पर जब्त की गई अरबों डॉलर की ईरानी संपत्तियों को जारी करने की खबरों ने पश्चिम एशिया की राजनीति और कूटनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने चार सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि अमेरिका के साथ संभावित समझौते की पृष्ठभूमि में यूएई ईरान की जमी हुई संपत्तियों को चरणबद्ध तरीके से जारी करने की तैयारी कर रहा है। हालांकि, इन दावों के सामने आने के बाद यूएई सरकार ने आधिकारिक रूप से इन्हें पूरी तरह खारिज कर दिया है।
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में दावा किया था कि तेहरान और वाशिंगटन के बीच युद्ध समाप्त करने को लेकर बातचीत अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। इसी दावे के बीच ईरान के जमे हुए फंड को जारी किए जाने की खबर सामने आई, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई चर्चाओं को जन्म दिया।
राजनयिक सूत्रों का कहना है कि बातचीत के दौरान अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण विदेशी बैंकों में फंसे ईरानी तेल राजस्व को लेकर भी चर्चा हुई है। इन प्रतिबंधों की वजह से ईरान के अरबों डॉलर लंबे समय से विभिन्न देशों के वित्तीय संस्थानों में जमे हुए हैं।
रॉयटर्स की रिपोर्ट में दो क्षेत्रीय सूत्रों के हवाले से कहा गया कि यूएई लगभग 10 अरब डॉलर जारी करने पर सहमत हुआ था, जिसमें से 3 अरब डॉलर से अधिक की राशि कथित रूप से पहले ही वापस की जा चुकी है। वहीं दो अन्य सूत्रों का दावा है कि कुल जब्त धनराशि 20 अरब डॉलर तक हो सकती है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि यह संभावित व्यवस्था ईरान द्वारा यूएई पर हमलों को रोकने की प्रतिबद्धता के बदले तैयार की गई थी। एक सूत्र के अनुसार, समझौते के पहले चरण के तहत लगभग 3 अरब डॉलर पहले ही जारी किए जा चुके हैं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
इन खबरों के प्रकाशित होने के बाद यूएई के विदेश मंत्रालय ने तत्काल बयान जारी कर सभी आरोपों का स्पष्ट रूप से खंडन किया। मंत्रालय ने कहा कि कुछ अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों ने यह दावा किया है कि यूएई के माध्यम से ईरान को धन हस्तांतरित किया गया है, लेकिन यह दावा पूरी तरह गलत और निराधार है।
विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि ईरान की कोई भी जब्त धनराशि यूएई के माध्यम से न तो जारी की गई है और न ही स्थानांतरित की गई है। मंत्रालय ने मीडिया संस्थानों से अपील की कि वे किसी भी संवेदनशील जानकारी को प्रकाशित करने से पहले उसकी पुष्टि अवश्य करें।
एक अमीराती अधिकारी ने कहा कि यूएई की विदेश नीति का प्रमुख उद्देश्य क्षेत्रीय तनाव को कम करना और स्थायी शांति स्थापित करना है। उनके अनुसार, देश लगातार ऐसे प्रयासों का समर्थन करता है जो संघर्षों को समाप्त करने और क्षेत्र के लोगों को हिंसा के दुष्प्रभावों से बचाने में मदद करें।
अधिकारी ने यह भी कहा कि यूएई अमेरिका सहित अन्य देशों द्वारा किए जा रहे उन कूटनीतिक प्रयासों का समर्थन करता है जिनका उद्देश्य क्षेत्र में स्थिरता और शांति बहाल करना है। उनका कहना था कि संघर्ष की स्थिति का सबसे अधिक नुकसान आम नागरिकों और वैश्विक व्यापार को उठाना पड़ता है।
इस बीच, रिपोर्ट के अनुसार व्हाइट हाउस ने इस मामले पर रॉयटर्स द्वारा मांगी गई टिप्पणी का तत्काल कोई जवाब नहीं दिया। वहीं अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वैंस ने शुक्रवार को कहा कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच कोई समझौता होता भी है, तो ईरान के जमे हुए फंड तुरंत जारी नहीं किए जाएंगे। संभावित व्यवस्था इस प्रकार तैयार की जा रही है कि ईरान अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के साथ-साथ चरणबद्ध तरीके से आर्थिक लाभ प्राप्त करे।
फिलहाल ईरान की ओर से भी इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में यूएई द्वारा धन जारी करने की खबर और उसके खंडन के बीच स्थिति अभी भी स्पष्ट नहीं है। आने वाले दिनों में अमेरिका-ईरान वार्ता और संबंधित देशों के आधिकारिक बयानों के बाद ही इस मुद्दे की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकेगी।