आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
अमेरिका और ईरान के बीच लड़ाई खत्म करने के लिए हुए अंतरिम समझौते से होर्मुज जलडमरूमध्य फिर से खुल जाएगा और दोनों दुश्मन देश तेहरान के परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत के लिए फिर से साथ आएंगे। दोनों देशों की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, इससे ईरान को त्वरित लाभ भी होगा और वह फिर से अपना तेल किसी रोक-टोक के बिना बेच सकेगा।
ईरान को तेल से होने वाली नयी कमाई के अलावा, दोनों पक्ष कमोबेश उसी स्थिति में वापस आ गए हैं जहां वे साढ़े तीन महीने पहले थे-यानी इजराइल और अमेरिका द्वारा युद्ध शुरू किए जाने से पहले। इस युद्ध में पूरे क्षेत्र में हज़ारों लोग मारे गए, वैश्विक ऊर्जा संकट पैदा हुआ और अमेरिकी अर्थव्यवस्था हिल गई।
अमेरिका और ईरान 60 दिन की बातचीत के दौर में शामिल होंगे। उनके सामने मुख्य सवाल यह होगा कि क्या अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 2015 के उस परमाणु समझौते से बेहतर समझौता हासिल कर पाएंगे, जिसे उन्होंने आठ साल पहले रद्द कर दिया था।
अमेरिकी अधिकारियों और ईरानी सरकारी मीडिया की ओर से जारी जानकारी के आधार पर, यहाँ वे बातें बताई जा रही हैं जिन्हें जानना ज़रूरी है:
अंतरिम समझौते से तेल आपूर्ति फिर से शुरू हो जाएगी
ट्रंप ने बुधवार को वर्साय पैलेस में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ रात्रिभोज के दौरान समझौते की एक प्रति पर हस्ताक्षर किए।
सरकारी समाचार एजेंसी इरना के अनुसार, तेहरान में राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर किए। एजेंसी ने एक तस्वीर भी पोस्ट की जिसमें उनके हाथ में उस समझौते की प्रति है, जिस पर उनके और ट्रंप के हस्ताक्षर हैं।
इस समझौते के तहत, होर्मुज़ जलडमरूमध्य फिर से खुल जाएगा और अमेरिका ईरानी बंदरगाहों पर लगी नाकेबंदी हटा लेगा-इन दोनों ही कदमों से गैस की कीमतें कम होंगी।
वाशिंगटन की ओर से अभी तक आधिकारिक तौर पर जारी नहीं किए गए मसौदे की जानकारी रखने वाले अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, इस जलमार्ग से गुजरना 60 दिन तक टोल मुक्त रहेगा, और इस समझौते में उसके बाद शुल्क लगाने की मनाही नहीं है।
ईरान का होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करना, शायद उसका सबसे मजबूत हथियार साबित हुआ। दुनिया के व्यापारिक तेल की लगभग 20 प्रतिशत आपूर्ति इसी जलमार्ग से होती थी।
इसकी वजह से दुनिया भर में ईंधन की कीमतें बढ़ गईं, खाने-पीने की चीज़ें और खाद जैसे दूसरे उत्पाद महंगे हो गए, तथा अमेरिका में कांग्रेस के लिए मध्यावधि चुनाव से पहले वहां महंगाई दर चार प्रतिशत तक पहुंच गई।