आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
वेनेजुएला के ला गुएरा में रहने वाली रोसा लोपेज ने सिसकियां भरते हुए बताया कि जब वह चिलचिलाती धूप में अपनी बेटी के साथ अपने लापता पति की तलाश कर रही थी, तब उन्हें पंक्तियों में रखे शवों के बीच से होकर गुजरना पड़ा।
एक नर्स के रूप में वर्षों तक काम करने के बावजूद, चादरों और कंबलों में लिपटे दर्जनों शवों का यह दर्दनाक मंजर देखने के लिए रोसा बिल्कुल भी तैयार नहीं थीं। रोसा ने कहा, “हमने कई ऐसे शव देखे जिनकी अब तक पहचान नहीं हो पाई थी।”
वेनेजुएला के उत्तरी तट पर स्थित ला गुएरा 24 जून को आए एक के बाद एक शक्तिशाली दो भूकंपों से सबसे अधिक प्रभावित हुआ था।
इस विनाशकारी आपदा में मारे गये लोगों की पहचान करने की कोशिशें तेज हो गई हैं ताकि बहुत देर होने से पहले परिजन अपने प्रियजनों की पहचान कर सकें।
इस आपदा में कम से कम 2,295 लोगों की मौत हुई है और शवों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
अधिकारी शवों को एकत्र करने, उनकी पहचान करने और परिजनों के दावे तक सुरक्षित रखने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
हजारों लोग अब भी लापता हैं।
रोसा लोपेज के 25 वर्षीय दामाद जोसे एंटोनियो टोलेडो उस इमारत के मलबे के नीचे मिले, जहां वे भूकंप आने के समय सुरक्षा गार्ड के रूप में काम कर रहे थे।
बचाव दल उनके शव को एक स्थानीय अस्पताल ले गया, लेकिन वहां जगह नहीं होने के कारण कर्मचारियों ने शव को रखने से मना कर दिया।
इसके बाद शव को दूसरी जगह ले जाया गया और अंततः उसे एक खुले पार्किंग स्थल में रख दिया गया।
एक फॉरेंसिक चिकित्सक की मदद से परिवार ने कई दिनों बाद शव को शनिवार को ढूंढ़ निकाला।
शव की पहचान होने के बाद भी वे समझ नहीं पा रहे थे कि क्या करें, क्योंकि वे अंतिम संस्कार गृह द्वारा मांगे जा रहे 450 अमेरिकी डॉलर का खर्च वहन नहीं कर सकते थे।
शनिवार को लगभग आधी रात के समय रोसा को सूचना मिली कि महापौर कार्यालय स्थानीय कब्रिस्तान में उन्हें मुफ्त में जगह उपलब्ध करा रहा है लेकिन वह स्थान न छूटे इसके लिए उन्हें जल्दी पहुंचना था।