आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
रूसी तेल रिफाइनरियों पर यूक्रेन के लगातार हमलों से देश में ईंधन संकट गहराने के बावजूद राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि रूस में स्थिति ‘‘गंभीर नहीं’’ है।
पुतिन ने युद्धविराम के प्रस्तावों को खारिज करते हुए जोर देकर कहा कि उनके लक्ष्य पूरे होने तक युद्ध जारी रहेगा।
पुतिन ने रूस के ऊर्जा क्षेत्र पर हुए हमलों को यूक्रेन की एक ऐसी चाल बताया है जिसका मकसद युद्ध के मैदान में हुए नुकसान से ध्यान भटकाना है। ऐसा प्रतीत होता है कि रूसी नेता को भरोसा है कि उनकी सरकार ईंधन संकट के कारण उनके प्राधिकार और युद्ध के प्रति समर्थन को कमजोर होने से रोक सकती है।
रूसी सेना ने बुधवार रात से बृहस्पतिवार सुबह तक यूक्रेन की राजधानी पर 11 घंटे तक बड़े पैमाने पर हमले किए, जिनमें कम से कम 21 लोगों की मौत हो गई। ये हमले यूक्रेन पर करीब चार साल पहले रूस के पूर्ण आक्रमण की शुरुआत के बाद से कीव पर किए गए सबसे घातक हमलों में शामिल हैं।
मार्च से अब तक रूस और उसके कब्जे वाले क्रीमिया में तेल रिफाइनरियों तथा अन्य ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर यूक्रेन के 50 से अधिक हमले होने की सूचना है। यूक्रेनी नेताओं ने कहा है कि इन हमलों का मकसद रूस पर युद्ध समाप्त करने के लिए दबाव बनाना है।
कम से कम, इन हमलों ने रूस के लाखों लोगों को युद्ध के असर का तीव्र एहसास कराया है और पुतिन के उस दावे को ध्वस्त कर दिया है कि यह युद्ध उनके देश के आम लोगों के जीवन पर असर नहीं डालता।
परामर्श कंपनी ‘मैक्रो-एडवाइजरी’ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) क्रिस वीफर के अनुसार, रूस की अनुमानित एक-तिहाई तेल शोधन क्षमता ठप हो गई है। इन हमलों से दीर्घकालिक नुकसान हुआ है।