ईरान पर अमेरिकी समुद्री नाकेबंदी तेज, 12 जहाज और 100 विमान तैनात

Story by  एटीवी | Published by  [email protected] | Date 17-04-2026
US Naval Blockade on Iran Intensifies: 12 Ships and 100 Aircraft Deployed
US Naval Blockade on Iran Intensifies: 12 Ships and 100 Aircraft Deployed

 

वॉशिंगटन।

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अपनी सैन्य कार्रवाई को और तेज कर दिया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने घोषणा की है कि ईरान के बंदरगाहों और तटीय इलाकों पर बड़े पैमाने पर समुद्री नाकेबंदी लागू कर दी गई है, जिसमें 10,000 से अधिक सैनिक, 12 से ज्यादा युद्धपोत और 100 से अधिक विमान तैनात किए गए हैं।

अमेरिकी नौसेना का विमानवाहक पोत USS Abraham Lincoln (CVN 72) अरब सागर में सक्रिय है, जो इस नाकेबंदी अभियान का प्रमुख हिस्सा है। इसके अलावा, गाइडेड मिसाइल डेस्ट्रॉयर USS Delbert D Black (DDG 119) भी ईरानी जलक्षेत्र के आसपास निगरानी और कार्रवाई में जुटा हुआ है।

CENTCOM के मुताबिक, यह नाकेबंदी किसी एक देश तक सीमित नहीं है, बल्कि ईरान के बंदरगाहों की ओर आने-जाने वाले सभी जहाजों पर लागू होगी, चाहे वे किसी भी देश के हों। अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी नहीं है, बल्कि केवल ईरान के बंदरगाहों और तटों को निशाना बनाया जा रहा है।

अमेरिकी ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष एयर फोर्स जनरल डैन केन ने कहा कि अमेरिकी बल अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र और ईरान के समुद्री क्षेत्र दोनों में सक्रिय रहेंगे। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि कोई भी जहाज जो ईरान को किसी प्रकार की सहायता देने की कोशिश करेगा, उसे रोका जाएगा और उस पर कार्रवाई की जाएगी।

इस अभियान में तथाकथित “डार्क फ्लीट” जहाजों को भी निशाना बनाया जा रहा है, जो अंतरराष्ट्रीय नियमों और प्रतिबंधों से बचने के लिए गुप्त रूप से तेल और अन्य संसाधनों का परिवहन करते हैं। अमेरिकी सेना ने साफ किया है कि ऐसे जहाजों पर कड़ी नजर रखी जा रही है।

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने इस कार्रवाई को सफल बताते हुए कहा कि नाकेबंदी प्रभावी ढंग से लागू हो रही है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी नौसेना की मौजूदगी के कारण कोई भी जहाज ईरान के बंदरगाहों की ओर जाने की हिम्मत नहीं कर रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है, खासकर ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार पर। ईरान पहले ही वैश्विक तेल बाजार में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, ऐसे में उसकी समुद्री गतिविधियों पर रोक से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अस्थिरता बढ़ सकती है।

साथ ही, अमेरिका ने यह भी संकेत दिया है कि उसकी सैन्य तैयारियां पूरी तरह सक्रिय हैं और जरूरत पड़ने पर वह तुरंत बड़े स्तर पर सैन्य कार्रवाई शुरू कर सकता है।

फिलहाल, यह नाकेबंदी पश्चिम एशिया में शक्ति संतुलन को प्रभावित कर रही है और आने वाले दिनों में इसके दूरगामी परिणाम सामने आ सकते हैं। दुनिया की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि ईरान इस कदम का क्या जवाब देता है और क्या यह तनाव किसी बड़े संघर्ष में बदलता है या कूटनीति के जरिए समाधान निकलता है।