भारत-उज्बेकिस्तान सैन्य अभ्यास ‘डस्टलिक 2026’ से रक्षा सहयोग मजबूत

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 16-04-2026
Defense Cooperation Strengthened through India-Uzbekistan Military Exercise ‘Dustlik 2026’
Defense Cooperation Strengthened through India-Uzbekistan Military Exercise ‘Dustlik 2026’

 

नामंगन।

भारत और उज्बेकिस्तान के बीच सैन्य सहयोग को नई मजबूती देते हुए संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘डस्टलिक 2026’ का सातवां संस्करण उज्बेकिस्तान के नामंगन स्थित गुरुमसराय फील्ड ट्रेनिंग एरिया में शुरू हो गया है। यह अभ्यास 12 अप्रैल से 25 अप्रैल तक चलेगा और इसका उद्देश्य दोनों देशों की सेनाओं के बीच तालमेल और संयुक्त संचालन क्षमता को बढ़ाना है।

Indian Army और उज्बेकिस्तान की सेना के बीच होने वाला यह अभ्यास खास तौर पर गैरकानूनी सशस्त्र समूहों के खिलाफ संयुक्त विशेष अभियानों पर केंद्रित है। इसमें आधुनिक तकनीकों के उपयोग, रणनीतिक योजना और सामरिक अभ्यासों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

उद्घाटन समारोह में उज्बेकिस्तान के पूर्वी सैन्य जिले के कमांडर Saidov Oybek Azadovich मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। इस अवसर पर दोनों देशों के अधिकारियों ने रक्षा सहयोग और पारस्परिक विश्वास को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई।

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस अभ्यास में अर्ध-पहाड़ी क्षेत्रों में संयुक्त ऑपरेशन की रणनीतियों पर काम किया जाएगा। सैनिकों को शारीरिक फिटनेस, लैंड नेविगेशन, दुश्मन के ठिकानों पर हमले और कब्जे जैसी महत्वपूर्ण सैन्य तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा।

अभ्यास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा 48 घंटे का संयुक्त वैलिडेशन ऑपरेशन होगा, जिसमें दोनों सेनाएं मिलकर अपने सामरिक कौशल और रणनीतियों का परीक्षण करेंगी। इस दौरान कमांड और कंट्रोल सिस्टम के बीच बेहतर तालमेल विकसित करने पर भी जोर दिया जाएगा।

‘डस्टलिक’ अभ्यास का मुख्य उद्देश्य न केवल सैन्य क्षमता को बढ़ाना है, बल्कि दोनों देशों के सैनिकों के बीच आपसी समझ, विश्वास और सहयोग को भी मजबूत करना है। इससे दोनों सेनाएं एक-दूसरे के अनुभवों और कार्यप्रणालियों से सीख सकेंगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे संयुक्त सैन्य अभ्यास वैश्विक शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। साथ ही, यह भारत और उज्बेकिस्तान के बीच रणनीतिक संबंधों को और गहरा करने का भी अवसर प्रदान करते हैं।इस अभ्यास के जरिए दोनों देश यह संदेश देना चाहते हैं कि वे क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर सुरक्षा चुनौतियों का सामना मिलकर करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।