इज़राइल के हवाई हमलों में ईरान के दो वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी अली लारीजानी और जनरल गुलाम रजा सुलेमानी मारे गए। यह ईरानी नेतृत्व के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।अली लारीजानी ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव और देश के सबसे प्रभावशाली नेताओं में से एक थे। वहीं जनरल गुलाम रजा सुलेमानी ‘बासिज’ बल के प्रमुख थे, जो ‘रिवोल्यूशनरी गार्ड’ का हिस्सा है। जनवरी में देश में बड़े प्रदर्शन के दौरान दोनों ने सख्त कार्रवाई की थी।
हमलों के तुरंत बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई की। मिसाइल और ड्रोन हमलों का निशाना इज़राइल और खाड़ी के अरब देश बने। इन हमलों के कारण तेल अवीव में जोरदार धमाकों की आवाज सुनाई दी और मध्य ईरान में सायरन बजने लगे।
इज़राइल की आपातकालीन सेवा ‘मेगेन डेविड एडोम’ ने बताया कि तेल अवीव के रमात गन इलाके में दो लोगों की मौत हुई। वहीं सऊदी अरब, कुवैत और अन्य खाड़ी देशों में ईरान की ओर से दागी गई मिसाइलों और ड्रोन को हवाई रक्षा प्रणालियों ने रोक लिया।
इज़राइल का कहना है कि इन हमलों का उद्देश्य ईरानी शासन को कमजोर करना और वहां विरोध की संभावना बढ़ाना था। रक्षा मंत्री इज़राइल काट्ज़ ने बताया कि लारीजानी और सुलेमानी को रात में निशाना बनाकर मार गिराया गया।
इज़राइली सेना ने कहा कि तेहरान में ‘बासिज’ बल के 10 से अधिक ठिकानों पर भी हवाई हमले किए गए। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि इन हत्याओं का मकसद ईरान में शासन को कमजोर करना और जनता को बदलाव का अवसर देना है।
वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच ईरान ने स्पष्ट किया कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी पकड़ कमजोर नहीं करेगा। यह जलमार्ग दुनिया की कुल तेल आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा परिवहन करता है। किसी भी बाधा से वैश्विक ऊर्जा बाजार पर गंभीर असर पड़ सकता है।
इस घटना ने क्षेत्रीय तनाव को बढ़ा दिया है। विशेषज्ञ मानते हैं कि ईरान-इज़राइल और खाड़ी देशों के बीच सैन्य गतिरोध के कारण अंतरराष्ट्रीय राजनीति और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दबाव बढ़ सकता है।अब क्षेत्र में सभी देशों की नजर अगली कूटनीतिक और सैन्य प्रतिक्रिया पर लगी हुई है। स्थिति लगातार बदल रही है और वैश्विक समुदाय चिंता जताता रहा है।