डॉ. फिरदौस ख़ान
ईद और रमज़ान के दौरान सिवइयों की खपत हर साल बढ़ जाती है। आम तौर पर लोग इस कारोबार पर ज्यादा ध्यान नहीं देते। लेकिन सच्चाई यह है कि सिवइयों का बाजार सोच से कहीं बड़ा और व्यापक है। यह केवल मुस्लिम त्योहारों तक सीमित नहीं है। अन्य धर्मों में भी खास अवसरों पर सिवइयों का सेवन होता है। इसी तरह, इस कारोबार में सिर्फ मुस्लिम ही नहीं, बल्कि गैर-मुस्लिम भी शामिल हैं। देश में सिवइयों का बाजार बहुत बड़ा है। दक्षिण भारत की कंपनियों का वित्तीय दबदबा अधिक माना जाता है। लेकिन उत्तर भारत का सिवई उद्योग भी कम नहीं है। यहां पारंपरिक और शुद्ध सिवइयों के लिए बहुत नाम है।
तेलंगाना के सिकंदराबाद में स्थित बम्बिनो एग्रो इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड देश की सबसे पुरानी और बड़ी सिवई कंपनी मानी जाती है। इसकी सेवइयों की लंबाई और गुणवत्ता इसे खास बनाती है। इसने देश में सिवइयों को लोकप्रिय बनाने में बहुत योगदान दिया है। वित्त वर्ष 2024-25 में इसका अनुमानित टर्नओवर करीब ₹380 करोड़ से ₹400 करोड़ के बीच रहने का अनुमान है।
कर्नाटक के बेंगलुरु में स्थित एमटीआर फ़ूड्स मसालों और रेडी-टू-ईट फूड के लिए जाना जाता है। लेकिन सिवइयों के बाजार में भी इसकी हिस्सेदारी मजबूत है। खासकर इसकी रोस्टेड सिवइयां शहरों के घरों में बहुत पसंद की जाती हैं। वित्त वर्ष 2024-25 में इस कंपनी का कुल राजस्व ₹2400 करोड़ से ज्यादा रहा, जिसमें सिवइयों और पास्ता सेगमेंट का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
तमिलनाडु के डिंडीगुल में स्थित अनिल फ़ूड्स दक्षिण भारत में सिवइयों के बड़े नामों में गिनी जाती है। यह ब्रांड अपनी पारंपरिक स्वाद और शुद्धता के लिए जाना जाता है। यह कंपनी सिर्फ गेहूं से ही नहीं, बल्कि बाजरा और रागी से भी सिवइयां बनाती है। इसका सालाना टर्नओवर करीब ₹500 करोड़ से ₹600 करोड़ के बीच माना जाता है।
डिंडीगुल में ही स्थित सेवरिट भी एक महत्वपूर्ण ब्रांड है। यह कंपनी पास्ता और सिवइयों के निर्माण में विशेषज्ञता रखती है। इसकी सिवइयों में अंतरराष्ट्रीय मानक और गुणवत्ता का ध्यान रखा जाता है। इसका अनुमानित टर्नओवर ₹100 करोड़ से ₹150 करोड़ के बीच है।
इसके अलावा कई अन्य कंपनियां भी सिवइयों के बाजार में अपनी पहचान बना रही हैं। उषोदया एंटरप्राइजेज की प्रिया फ़ूड्स और आईटीसी के आशीर्वाद ब्रांड के तहत भी सिवइयों का उत्पादन किया जा रहा है। इन कंपनियों का भी सालाना टर्नओवर करोड़ों में है।
दिल्ली स्थित सेवर इंडिया प्राइवेट लिमिटेड पिछले तीन दशकों से उत्तर भारत के बाजार में सक्रिय है। इसके उत्पाद लोगों के बीच काफी लोकप्रिय हैं। इसका अनुमानित टर्नओवर ₹50 करोड़ से ₹100 करोड़ के बीच आता है।
हरियाणा के फ़रीदाबाद में स्थित अर्बन फ़्रेश एग्रो फ़ूड प्रोडक्ट्स विशेष रूप से गेहूं और सूजी से बनी सिवइयां बनाती है। इसका सालाना टर्नओवर लगभग ₹1 करोड़ से ₹5 करोड़ के बीच है।उत्तर प्रदेश के कानपुर में स्थित हाफ़िज़ ए सत्तार संस एक प्रतिष्ठित ब्रांड है। यह कंपनी अपनी उच्च गुणवत्ता वाली सिवइयों के लिए जानी जाती है।
इसका ब्रांड बनारसी सिवई और क़िमामी सिवई के लिए मशहूर है। इसकी सिवइयां बारीक बनावट और शुद्धता के लिए जानी जाती हैं। ये सिवइयां देश के कई शहरों के साथ खाड़ी देशों और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी निर्यात की जाती हैं।
यह कंपनी अपने उत्पादों में किसी भी कृत्रिम रंग या हानिकारक रसायन का इस्तेमाल नहीं करती। यह गुणवत्ता का प्रतीक है और रमज़ान और ईद के दौरान इसकी मांग इतनी बढ़ जाती है कि बाजार में अक्सर इनकी कमी हो जाती है। इसका सालाना टर्नओवर लगभग ₹26 लाख से ₹50 लाख के बीच माना जाता है।
उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद की दिलीप सिवई अपने स्वाद के अलावा बॉलीवुड अभिनेता दिलीप कुमार के नाम के लिए भी मशहूर है। इसके संस्थापक मुहम्मद हनीफ ने करीब 45 साल पहले मुंबई जाकर अभिनेता दिलीप कुमार से मुलाकात की थी और उन्हें अपनी बनी सिवइयां भेंट की।
अभिनेता ने इसके स्वाद को पसंद किया और ब्रांड के लिए नाम और तस्वीर का इस्तेमाल करने की अनुमति दी। वर्तमान में इस कंपनी का संचालन उनके पोते तौफ़ीक अहमद और शाहनवाज़ कर रहे हैं। रमज़ान में इसकी मांग बहुत बढ़ जाती है। इसकी सिवइयां देश के अलग-अलग राज्यों के साथ खाड़ी देशों में भी निर्यात होती हैं। यह ब्रांड प्रीमियम सेगमेंट में आता है और स्थानीय व अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसका टर्नओवर करोड़ों में होता है।
उत्तर प्रदेश, बनारस, लखनऊ और बिहार के पटना में भी सिवइयों का बड़ा कारोबार है। रमज़ान और ईद के दौरान इस बाजार का चरम होता है। हालांकि इसका कोई सटीक सरकारी आंकड़ा उपलब्ध नहीं है, क्योंकि यह क्षेत्र बहुत हद तक असंगठित है। विशेषज्ञों के अनुसार, रमज़ान के एक महीने के दौरान देश में सिवइयों का कुल कारोबार लगभग ₹1000 करोड़ से ₹1500 करोड़ तक हो सकता है। आम दिनों की तुलना में रमज़ान में इसकी मांग 10 से 15 गुना तक बढ़ जाती है।
खाद्य विशेषज्ञ बताते हैं कि रमज़ान के दौरान कुल FMCG बिक्री का लगभग 18-20 प्रतिशत हिस्सा सिर्फ खाद्य पदार्थों से आता है। इसमें सिवइयां, खजूर और फल शामिल हैं। उत्तर भारत के कुछ शहरों में इस दौरान करोड़ों का स्थानीय कारोबार होता है।
हर मुस्लिम घर में ईद और रमज़ान के मौके पर सिवइयां बनाई जाती हैं। हलवाई, रेस्टोरेंट और कैटरर्स भी बड़े पैमाने पर शीर खुरमा और क़िमामी सिवइयों के लिए थोक में खरीदारी करते हैं। इसके अलावा बड़ी मात्रा में सिवइयां खाड़ी देशों को निर्यात की जाती हैं। उत्तर भारत के बाजारों को मिलाकर यह कारोबार अकेले ₹500 करोड़ से अधिक का होता है।
सिवइयों की मांग केवल बारीक सिवइयों तक ही सीमित नहीं है। मोटी सिवइयों यानी नूडल्स की मांग सालभर रहती है। इन्हें नमकीन सिवइयों, इटैलियन और चाइनीज़ भोजन में भी इस्तेमाल किया जाता है। बारीक सिवइयों की मांग खासकर रमज़ान और ईद में बढ़ जाती है। इस तरह सिवइयों का कारोबार त्योहारों और रोजमर्रा दोनों में अलग-अलग रूप में सक्रिय रहता है।
देशभर में सिवइयों का बाजार विस्तृत, विविध और लगातार बढ़ता हुआ है। यह सिर्फ खाना ही नहीं, बल्कि संस्कृति और त्योहारों का हिस्सा बन चुका है। गुणवत्ता, स्वाद और पारंपरिक विधियों के चलते यह व्यवसाय भारत में हर घर और अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी जगह बनाए रखता है।