वॉशिंगटन डीसी
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान से मौजूदा गतिरोध को खत्म करने के लिए कूटनीतिक समझौते की दिशा में आगे बढ़ने की अपील की है। उन्होंने कहा कि अगर तेहरान समझदारी और व्यावहारिकता से काम ले, तो वह अपने लिए एक बेहतर और स्थिर भविष्य सुनिश्चित कर सकता है।
सीएनबीसी को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा, “ईरान अगर समझौता करता है तो वह खुद को एक बहुत बेहतर स्थिति में ला सकता है।” उन्होंने यह भी कहा कि इस समझौते से न सिर्फ ईरान की आर्थिक स्थिति सुधरेगी, बल्कि क्षेत्रीय स्तर पर भी उसकी स्थिति मजबूत होगी।
राष्ट्रपति ने ईरानी नेतृत्व से आग्रह किया कि वे बातचीत के लिए स्पष्ट रणनीति के साथ आगे आएं। उन्होंने कहा, “उन्हें तर्क और सामान्य समझ (कॉमन सेंस) का इस्तेमाल करना होगा, तभी वे अपने देश को एक महान स्थिति में ले जा सकते हैं।”
हालांकि, ट्रंप ने हाल ही में अपनी रणनीति में बदलाव करते हुए युद्धविराम को अनिश्चितकाल के लिए बढ़ा दिया है, लेकिन इसके साथ ही उन्होंने यह भी साफ किया कि ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी जारी रहेगी। यह नाकेबंदी अमेरिका की दबाव बनाने की नीति का हिस्सा है, ताकि ईरान वार्ता के लिए मजबूर हो।
इस बीच, ईरान की ओर से भी कड़ा रुख देखने को मिला है। ईरानी संसद के अध्यक्ष और प्रमुख वार्ताकार मोहम्मद बाघेर क़ालिबाफ ने कहा कि जब तक अमेरिका समुद्री प्रतिबंध हटाता नहीं, तब तक किसी व्यापक समझौते की उम्मीद नहीं की जा सकती। उन्होंने इसे युद्धविराम का खुला उल्लंघन बताया।
हाल के घटनाक्रम में ईरानी मीडिया ने दावा किया है कि रिवोल्यूशनरी गार्ड ने होर्मुज जलडमरूमध्य में तीन जहाजों को निशाना बनाया, जिनमें से दो को कब्जे में लेकर ईरानी जलक्षेत्र में ले जाया गया। इससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।
व्हाइट हाउस द्वारा युद्धविराम बढ़ाने की घोषणा उस समय की गई, जब दो सप्ताह की निर्धारित समयसीमा समाप्त होने ही वाली थी। इस फैसले का उद्देश्य ईरान को एक “एकीकृत प्रस्ताव” तैयार करने के लिए अतिरिक्त समय देना बताया गया है।
इस बीच, ट्रंप ने संकेत दिया है कि बातचीत का दूसरा चरण जल्द शुरू हो सकता है। उन्होंने कहा कि अगले 36 से 72 घंटों के भीतर नई वार्ता शुरू होने की संभावना है। हालांकि, यह अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है कि ईरान इस प्रक्रिया में शामिल होगा या नहीं।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने कहा है कि अभी तक वार्ता में भाग लेने को लेकर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। उन्होंने अमेरिका की नीतियों और हालिया घटनाओं को लेकर असहमति भी जताई।
कुल मिलाकर, अमेरिका और ईरान के बीच स्थिति अभी भी अनिश्चित बनी हुई है। एक ओर कूटनीतिक प्रयास जारी हैं, तो दूसरी ओर तनाव और अविश्वास भी बढ़ रहा है। आने वाले दिनों में यह तय होगा कि दोनों देश बातचीत के रास्ते पर आगे बढ़ते हैं या टकराव की स्थिति और गहरी होती है।