वॉशिंगटन।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान अमेरिका के साथ समझौता करना चाहता है, लेकिन फिलहाल वह उन शर्तों को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है, जिन्हें वॉशिंगटन जरूरी मानता है। ट्रंप के बयान से संकेत मिलता है कि सातवें महीने में पहुंच चुके अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच कूटनीतिक समाधान की संभावना बनी हुई है।
ट्रंप ने कहा, “ईरान समझौता करना चाहता है, लेकिन मेरी राय में वह अभी तैयार नहीं है। हम या तो ऐसा समझौता करेंगे जो अच्छा हो, या फिर कोई समझौता नहीं करेंगे।” यह बयान व्हाइट हाउस के रैपिड रिस्पॉन्स अकाउंट से साझा किया गया।
ट्रंप ने गुरुवार को कहा था कि अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध अब संभवतः अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनकी ईरानी अधिकारियों से सीधे बातचीत हुई है। हालांकि, ईरान की ओर से इस संपर्क की सार्वजनिक रूप से पुष्टि नहीं की गई है।
दूसरी ओर, ट्रंप ने एक्सियोस के साथ बातचीत में ईरान के खिलाफ बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई फिर शुरू करने के विकल्प का भी उल्लेख किया। इससे बातचीत और सैन्य दबाव, दोनों रास्ते अभी खुले होने का संकेत मिलता है।
अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी को ईरान पर हमले शुरू किए थे। इसके बाद ईरान ने इजरायल और उन खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया, जहां अमेरिकी सेना तैनात है।
अमेरिका-ईरान संघर्ष में होर्मुज जलडमरूमध्य सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में से एक बना हुआ है। दुनिया के महत्वपूर्ण तेल मार्गों में शामिल इस जलमार्ग से सामान्य परिस्थितियों में बड़ी मात्रा में वैश्विक तेल आपूर्ति गुजरती है।
रॉयटर्स के मुताबिक, बुधवार को केवल तीन वाणिज्यिक जहाजों ने होर्मुज जलडमरूमध्य पार किया। इससे एक दिन पहले यह संख्या 12 थी, जबकि पिछले 10 दिनों का औसत करीब 17 जहाज प्रतिदिन रहा था। कुछ जहाजों ने अपनी ऑटोमेटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (AIS) बंद करके मार्ग का इस्तेमाल किया।
जलमार्ग में व्यवधान के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर दबाव बना हुआ है और कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई हैं।
अगले सप्ताह न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान ट्रंप की खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के छह देशों के नेताओं या विदेश मंत्रियों से मुलाकात की संभावना है। इनमें सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, बहरीन, कुवैत और ओमान शामिल हैं।
बैठक में ईरान युद्ध और संघर्ष के बाद की अमेरिकी रणनीति पर चर्चा होने की संभावना है। खाड़ी देश युद्ध के दौरान अपने ऊर्जा ढांचे और समुद्री व्यापार पर पड़े असर को लेकर भी अमेरिका के सामने अपनी चिंताएं रख सकते हैं।
अमेरिका की ओर से ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और विदेश मंत्री अब्बास अराघची को संयुक्त राष्ट्र महासभा में भाग लेने के लिए वीजा दिए जाने से भी कूटनीतिक संपर्क की संभावना बनी है।
हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों ने ईरानी प्रतिनिधिमंडल की अमेरिका में आवाजाही और खरीदारी पर कुछ प्रतिबंध लगाए हैं। इसके बावजूद न्यूयॉर्क में दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारियों के एक ही कूटनीतिक मंच पर मौजूद रहने से बातचीत का अवसर बन सकता है।
अमेरिका और ईरान के बीच किसी संभावित समझौते में कई महत्वपूर्ण मुद्दे शामिल हो सकते हैं। इनमें—
जैसे विषय प्रमुख हो सकते हैं।
इस बीच, ईरान और अमेरिका के बीच कूटनीतिक प्रयासों के साथ क्षेत्रीय संघर्ष भी जारी है। हाल के दिनों में सऊदी अरब और यमन के ईरान समर्थित हूती समूह के बीच हमले तेज हुए हैं, जबकि होर्मुज और बाब-अल-मंदब जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर भी तनाव बना हुआ है।
ऐसे में ट्रंप के ताजा बयान से बातचीत की संभावना तो सामने आई है, लेकिन अमेरिका और ईरान के बीच किसी औपचारिक समझौते तक पहुंचने के लिए कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति बनना बाकी है।