Strengthening standards, procurement networks essential to reap benefits of FTA with UK: GTRI
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
आर्थिक शोध संस्था जीटीआरआई ने शनिवार को कहा कि भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौते (सीईटीए) से बाजार तक पहुंच मिल जाएगी, लेकिन इससे निर्यात अपने-आप नहीं बढ़ेगा। इसके लिए भारत को मानकों, प्रमाणन, लॉजिस्टिक और खरीदार नेटवर्क को मजबूत करना होगा।
भारत एवं ब्रिटेन के बीच व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (सीईटीए) 15 जुलाई से लागू होने जा रहा है।
ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) ने एक रिपोर्ट में कहा, “मानकों, प्रमाणन, लॉजिस्टिक, नियामकीय मंजूरी और खरीदार नेटवर्क पर साथ-साथ काम न करने की स्थिति में निर्यात अवसर कागज पर ही रह जाएगा। यह समझौता दरवाजा खोलता है, लेकिन उसे निर्यात में बदलना भारत को ही होगा।”
जीटीआरआई के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने उदाहरण देते हुए कहा कि खाद्य निर्यातकों को बेहतर परीक्षण, उत्पाद की पूरी निगरानी और ब्रिटेन के स्वच्छता एवं पादप स्वच्छता मानकों का पालन करना होगा। वहीं मशीनरी और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र को प्रमाणन, प्रौद्योगिकी एवं मजबूत खरीदार संबंधों की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि वाहन निर्यातकों को ‘मूलस्थान के नियम’ और तकनीकी मानकों पर खरा उतरना होगा, जबकि वस्त्र, चमड़ा और फुटवियर क्षेत्र को शुल्क में मिलने वाली राहत का लाभ उठाने के लिए तेजी से ऑर्डर हासिल करने होंगे।
जीटीआरआई के मुताबिक, इस व्यापार समझौते का सर्वाधिक लाभ उन क्षेत्रों में मिलने की संभावना है जहां भारत की निर्यात क्षमता मजबूत है, ब्रिटेन में मांग अधिक है और सीईटीए से शुल्क में स्पष्ट लाभ मिलता है। इनमें वस्त्र, परिधान, चमड़ा, फुटवियर, प्रसंस्कृत खाद्य, समुद्री उत्पाद और कुछ कृषि उत्पाद शामिल हैं।