Some student protests have been banned in France following weekend violence and looting.
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
फ्रांस में सप्ताहांत के दौरान झड़पों और बड़े पैमाने पर लूटपाट की घटनाओं के बाद अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को देश के कई शहरों में प्रस्तावित प्रदर्शनों पर प्रतिबंध लगा दिया। इन घटनाओं को फ्रांस में पिछले कई वर्षों में हुई सबसे हिंसक अशांति में से एक माना जा रहा है।
पेरिस और फ्रांस के अन्य शहरों में अशांति के बाद सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। फ्रांस की राजधानी के कुछ इलाकों के साथ-साथ अन्य शहरों में भी रात के समय कर्फ्यू लागू किया गया है, जहां अब स्थिति शांत हो गई है।
पेरिस, लियोन, लिली और ग्रेनोबल में बृहस्पतिवार को होने वाले प्रदर्शनों पर रोक लगा दी गई। कुछ लोगों ने इस कदम को फ्रांसीसी नागरिकों के विरोध प्रदर्शन करने के अधिकार का उल्लंघन बताया है।
इस बीच, हाई स्कूल और विश्वविद्यालय के छात्र संगठनों ने कहा है कि वे प्रदर्शन जारी रखेंगे। इस सप्ताह से स्कूलों में शरद ऋतु की छुट्टियां शुरू हो गई हैं।
पेरिस पुलिस ने कहा कि सप्ताहांत में सड़कों पर हुई हिंसा के जोखिम को देखते हुए प्रतिबंध जरूरी था। उस दौरान नकाबपोश युवाओं के समूहों ने पुलिस के साथ झड़प की, दुकानों में लूटपाट की और कारों में आग लगा दी।
पेरिस में यह प्रतिबंध स्थानीय समयानुसार रात आठ बजे तक लागू रहेगा। इसके दायरे में राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास एलिसी पैलेस, संसद के दोनों सदन और शहर के प्रमुख रेलवे स्टेशन शामिल हैं। मध्य पेरिस के वे इलाके भी प्रतिबंध के दायरे में हैं, जहां लूटपाट से भारी नुकसान हुआ था।
बृहस्पतिवार को प्रस्तावित प्रदर्शनों को शनिवार को होने वाले बड़े प्रदर्शन की शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा था। शनिवार को ‘येलो वेस्ट’ आंदोलन के कार्यकर्ताओं के भी शामिल होने की उम्मीद है। 2018 और 2019 में इस आंदोलन के तहत ईंधन की कीमतों के खिलाफ प्रदर्शन ने फ्रांस को हिलाकर रख दिया था।