बलूचिस्तान में सात शव मिलने से बढ़ी चिंता

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  onikamaheshwari | Date 22-07-2026
Seven bodies reportedly recovered across Pakistan's Balochistan amid state violence concerns
Seven bodies reportedly recovered across Pakistan's Balochistan amid state violence concerns

 

बलूचिस्तान [पाकिस्तान]
 
'द बलूचिस्तान पोस्ट' की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के अलग-अलग ज़िलों से सात लोगों के शव बरामद किए गए हैं। बताया जा रहा है कि इनमें से कई शवों पर गोली लगने के कई निशान थे। पंजगुर, सुराब, कलात, मस्तुंग और केच ज़िलों में हुई इन घटनाओं ने एक बार फिर प्रांत की बिगड़ती सुरक्षा स्थिति और जबरन गायब किए जाने (enforced disappearances) के मामलों पर लंबे समय से चली आ रही चिंताओं की ओर ध्यान खींचा है। 'द बलूचिस्तान पोस्ट' के अनुसार, पंजगुर में निवान नदी इलाके से एक अज्ञात व्यक्ति का गोली से छलनी शव बरामद किया गया। पहचान और कानूनी औपचारिकताओं के लिए शव को ज़िला टीचिंग अस्पताल, पंजगुर ले जाया गया। 'द बलूचिस्तान पोस्ट' ने आगे बताया कि सुराब में दो अज्ञात लोगों के शव बरामद किए गए; बताया जा रहा है कि दोनों के शरीर पर गोली लगने के कई निशान थे।
 
कलात में रेज इलाके से दो और शव मिले, जबकि उसी ज़िले के रोडेनजो इलाके से पहले एक और शव बरामद किया गया था। रिपोर्ट के अनुसार, मस्तुंग में जंगल क्रॉस इलाके से एक अज्ञात व्यक्ति का शव बरामद किया गया। शुरुआती कानूनी प्रक्रियाओं के बाद, शव को शहीद नवाब गौस बख्श रायसानी अस्पताल भेज दिया गया। 'द बलूचिस्तान पोस्ट' ने आगे बताया कि केच ज़िले की बुलेदा तहसील में बिल नागोर इलाके से एक और युवक का शव बरामद किया गया। पुलिस ने शव को अपनी कस्टडी में लिया और बिल नागोर पुलिस स्टेशन भेज दिया।
 
बलूचिस्तान में लंबे समय से लोगों को जबरन गायब किए जाने का सिलसिला चल रहा है। परिवारों और मानवाधिकार समूहों का आरोप है कि राजनीतिक कार्यकर्ताओं, छात्रों और आम नागरिकों को अक्सर बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के हिरासत में ले लिया जाता है और बाद में वे या तो मृत पाए जाते हैं या फिर लापता ही रहते हैं। पाकिस्तानी अधिकारियों ने हमेशा गैर-कानूनी तरीके से लोगों को गायब करने और बिना कानूनी प्रक्रिया के हत्या करने (extrajudicial killings) में अपनी किसी भी भूमिका से इनकार किया है। उनका कहना है कि सुरक्षा अभियान कानून के दायरे में रहकर ही चलाए जाते हैं। मानवाधिकार संगठनों और बलूच समर्थक समूहों ने बार-बार मांग की है कि ऐसी मौतों की पारदर्शी जांच हो, ज़िम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जाए और प्रांत में लोगों को जबरन गायब करने का सिलसिला बंद हो।