Major US aid for Lebanon; Trump says they will work together to resolve various issues.
वॉशिंगटन
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने लेबनान को व्यापक आर्थिक, राजनीतिक और सुरक्षा सहयोग देने का भरोसा जताया है। व्हाइट हाउस में लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन के साथ हुई विशेष बैठक में ट्रंप ने कहा कि दशकों से अस्थिरता, संघर्ष और युद्ध का सामना कर रहे लेबनान को सम्मान और सहयोग मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि अमेरिका लेबनान की हरसंभव मदद करेगा और दोनों देश मिलकर क्षेत्र की कई जटिल समस्याओं का समाधान खोजेंगे।
बैठक के दौरान ट्रंप ने कहा, "हम लेबनान की मदद करेंगे और पूरी ताकत से करेंगे। यह एक प्रतिभाशाली लोगों का देश है, लेकिन वर्षों तक इसके साथ अच्छा व्यवहार नहीं हुआ।"
हिजबुल्लाह और इज़राइल-लेबनान समझौते पर चर्चा
दोनों नेताओं के बीच लेबनान में सक्रिय हिजबुल्लाह, इज़राइल के साथ हाल में हुए नए ढांचे (फ्रेमवर्क एग्रीमेंट) और सीमा क्षेत्र की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका पहले भी लेबनान की कुछ समस्याओं के समाधान में मदद कर चुका है और आगे भी इस दिशा में प्रयास जारी रखेगा।
वहीं राष्ट्रपति जोसेफ आउन ने अमेरिका और ट्रंप प्रशासन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इज़राइल के साथ हालिया समझौता दोनों देशों के बीच लंबे समय से चली आ रही शत्रुता समाप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में स्थायी शांति और सुरक्षा स्थापित करना समय की आवश्यकता है।
लेबनानी सेना को मजबूत करने पर जोर
राष्ट्रपति आउन ने कहा कि समझौते की सफलता काफी हद तक लेबनानी सशस्त्र बल (LAF) को मजबूत बनाने पर निर्भर करेगी। उन्होंने ट्रंप से दो प्रमुख सहयोग मांगे—पहला राजनीतिक समर्थन और दूसरा लेबनानी सेना को निरंतर सैन्य सहायता।
आउन ने कहा कि लेबनानी सेना देश की सबसे विश्वसनीय संस्था है और जनता का भरोसा ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सेना कमजोर हुई तो देश में फिर से अस्थिरता और सशस्त्र समूहों का प्रभाव बढ़ सकता है।
ट्रंप ने भी कहा कि लेबनानी सेना को मजबूत करना उनकी बातचीत का प्रमुख विषय रहा और इस संबंध में अमेरिका के पास पहले से कुछ ठोस योजनाएं मौजूद हैं।
अब्राहम समझौते में शामिल होने के संकेत
ट्रंप ने यह भी कहा कि भविष्य में लेबनान को अब्राहम समझौतों के विस्तार में महत्वपूर्ण स्थान मिल सकता है। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि क्या लेबनान औपचारिक रूप से इस सामान्यीकरण प्रक्रिया में शामिल होगा।
इज़राइली सेना की वापसी पर बयान
जब ट्रंप से पूछा गया कि इज़राइली सेना लेबनान से पूरी तरह कब हटेगी, तो उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया जारी है। उनके अनुसार, समझौते के तहत इज़राइली सैनिक चरणबद्ध तरीके से विभिन्न क्षेत्रों से पीछे हट रहे हैं।
हालांकि इज़राइली सेना द्वारा लेबनानी सैनिकों के पास गोलीबारी की रिपोर्टों पर ट्रंप ने कहा कि उन्हें इस घटना की जानकारी बैठक से ठीक पहले मिली है और वह मामले की जांच करेंगे।
हिजबुल्लाह से बातचीत के लिए भी तैयार
ट्रंप ने कहा कि यदि राष्ट्रपति जोसेफ आउन को लगता है कि हिजबुल्लाह से बातचीत क्षेत्र में शांति स्थापित करने में मददगार होगी, तो वह उससे संवाद करने के लिए भी तैयार हैं।
उन्होंने कहा, "मैं सभी से बात करता हूं। अगर राष्ट्रपति चाहें कि मैं हिजबुल्लाह से बात करूं, तो मैं ऐसा करूंगा।"
ईरान पर भी दी चेतावनी
बैठक के दौरान ट्रंप ने ईरान का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि लगातार सैन्य नुकसान के बाद तेहरान अब बातचीत करना चाहता है। हालांकि उन्होंने कहा कि अमेरिका तभी वार्ता करेगा जब ईरान गंभीर और सार्थक बातचीत के लिए तैयार होगा।
ट्रंप ने यह भी चेतावनी दी कि यदि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को फिर से सक्रिय करने की कोशिश करता है, तो अमेरिका उसके ऐसे किसी भी ठिकाने पर कार्रवाई करेगा।
शांति प्रक्रिया को बताया बड़ा कदम
बैठक के अंत में ट्रंप ने इज़राइल और लेबनान के बीच हालिया समझौते को "बहुत बड़ा कदम" बताया। उन्होंने कहा कि यदि यह प्रक्रिया सफल रही तो राष्ट्रपति जोसेफ आउन मध्य पूर्व के सबसे प्रभावशाली नेताओं में शामिल हो सकते हैं।
दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि लेबनान में स्थायी शांति, मजबूत सरकारी संस्थाएं और सक्षम सेना ही क्षेत्रीय स्थिरता की कुंजी हैं तथा इसके लिए अमेरिका और लेबनान का सहयोग आगे भी जारी रहेगा।