आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) ने शुक्रवार को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश तबस्सुम खान के खिलाफ कथित धमकियों, सोशल मीडिया पर अपमानजनक अभियान और डराने-धमकाने की घटनाओं की निंदा की।
न्यायाधीश खान ने पीट-पीटकर हत्या किए जाने के एक मामले में गौरक्षक समूह के सदस्यों को सजा सुनाई थी, जिसके बाद उन्हें इस दुर्भावना का शिकार होना पड़ा।
बार एसोसिएशन ने एक बयान में कहा कि एसोसिएशन को उम्मीद है कि मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय और मध्यप्रदेश सरकार इस मामले की शीघ्र, निष्पक्ष व प्रभावी जांच सुनिश्चित करेंगे तथा न्यायिक अधिकारी को धमकियां या उनके खिलाफ नफरत भड़काने वाले सभी लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई करेंगे।
यह बयान एसोसिएशन की सचिव प्रज्ञा बघेल द्वारा जारी किया गया।
बार एसोसिएशन ने कहा कि खबरों से संकेत मिलता है कि एक आपराधिक मामले में फैसला सुनाने के बाद न्यायिक अधिकारी को धमकियों और ऑनलाइन दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ा, जिसके बाद प्राथमिकी दर्ज की गई और उनकी सुरक्षा बढ़ाई गई।
बार एसोसिएशन ने कहा, “जिला न्यायपालिका हमारी न्याय व्यवस्था की नींव है। देश भर में न्यायिक अधिकारी हर दिन हजारों संवेदनशील दीवानी और आपराधिक मामलों का निर्णय करते हैं। उन्हें यह भरोसा मिलना चाहिए कि जब वे अपने संवैधानिक कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करते हैं, तो कानून उनकी रक्षा करेगा।”की सभी पोत परिवहन कंपनियों की जरूरतें पूरी करने के उद्देश्य से किया गया था।
उन्होंने कहा, ‘‘भविष्य में ऐसी स्थिति नहीं होनी चाहिए कि यहां केवल एमएससी के पोत ही आ सकें। हम चाहते हैं कि यह बंदरगाह कई पोत परिवहन कंपनियों के लिए खुला रहे।’’
थरूर ने साथ ही स्पष्ट किया कि किसी का भी विरोध नहीं किया जा रहा है और बंदरगाह का विकास जरूरी है।
उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन विकास कानून के अनुरूप और रियायत समझौते की शर्तों का सम्मान करते हुए होना चाहिए। आगे बढ़ने का यही एकमात्र रास्ता है। सरकार सभी पहलुओं का अध्ययन करने के बाद फैसला करेगी।’’