नई दिल्ली
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज से संयुक्त अरब अमीरात (UAE), नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली की पांच दिवसीय महत्वपूर्ण यात्रा पर रवाना हो रहे हैं। 15 से 20 मई 2026 तक चलने वाले इस दौरे का मुख्य उद्देश्य व्यापार, तकनीक, ऊर्जा और नवाचार जैसे क्षेत्रों में भारत की वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर ले जाना है। यह दौरा न केवल खाड़ी देशों बल्कि यूरोप के साथ भी भारत के बढ़ते आर्थिक और कूटनीतिक प्रभाव को रेखांकित करता है।
प्रधानमंत्री की इस यात्रा का पहला पड़ाव संयुक्त अरब अमीरात है, जहाँ वे राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से मुलाकात करेंगे। यूएई की अंतर्राष्ट्रीय सहयोग राज्य मंत्री रीम अल हाशिमी ने पीएम मोदी को "सच्चा अनमोल रत्न" बताते हुए कहा कि यह दौरा द्विपक्षीय संबंधों को व्यापार और तकनीक के "नए शिखरों" पर ले जाएगा। भारत और यूएई के बीच ऊर्जा सहयोग, बुनियादी ढांचे और निवेश पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
यूएई के बाद, प्रधानमंत्री नीदरलैंड पहुंचेंगे, जहां डच प्रधानमंत्री रॉब जेटन और शाही परिवार के साथ उनकी बैठकें होंगी। यहाँ मुख्य रूप से सेमीकंडक्टर, ग्रीन हाइड्रोजन और जल प्रबंधन जैसे भविष्योन्मुखी विषयों पर चर्चा होगी। इसके पश्चात, स्वीडन में पीएम मोदी स्वीडिश प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टरसन के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के साथ 'यूरोपीय राउंड टेबल फॉर इंडस्ट्री' को संबोधित करेंगे। यहाँ एआई (AI) और उभरती प्रौद्योगिकियों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
दौरे के अगले चरण में प्रधानमंत्री नॉर्वे के ओस्लो में 'तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन' में भाग लेंगे। इसमें डेनमार्क, फिनलैंड, आइसलैंड और स्वीडन के नेता भी शामिल होंगे। यह सम्मेलन सतत विकास और ग्रीन ट्रांजिशन के क्षेत्र में भारत के लिए नई संभावनाएं पैदा करेगा। अंत में, प्रधानमंत्री इटली की यात्रा करेंगे, जहां प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के साथ रक्षा और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत किया जाएगा।
भारतीय निर्यात संगठनों के महासंघ (FIEO) ने इस दौरे को भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए "अत्यंत महत्वपूर्ण मोड़" बताया है। FIEO के अध्यक्ष एस. सी. रल्हन के अनुसार, भारत और इन देशों के बीच सामूहिक द्विपक्षीय व्यापार 70 अरब डॉलर से अधिक है। भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) और भारत-EFTA व्यापार समझौते की पृष्ठभूमि में यह दौरा भारतीय निर्यातकों के लिए इंजीनियरिंग, फार्मास्यूटिकल्स, लॉजिस्टिक्स और डिजिटल ट्रेड जैसे क्षेत्रों में बड़े अवसर खोलेगा।
संक्षेप में, प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा भारत को एक विश्वसनीय आर्थिक साझेदार और वैश्विक विकास के प्रमुख चालक के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह यात्रा न केवल व्यापारिक संबंधों को गति देगी, बल्कि नवाचार और हरित ऊर्जा के क्षेत्र में भारत की वैश्विक भूमिका को भी और अधिक प्रभावी बनाएगी।