UNHRC में पाकिस्तान पर PoJK में मदद रोकने और विरोध को दबाने का आरोप लगा

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  onikamaheshwari | Date 27-06-2026
Pakistan accused of blocking aid, crushing dissent in PoJK at UNHRC
Pakistan accused of blocking aid, crushing dissent in PoJK at UNHRC

 

जिनेवा [स्विट्जरलैंड]
 
स्विस कश्मीर मानवाधिकार आयोग के चेयरमैन मिर्ज़ा शफीक ने पाकिस्तानी अधिकारियों पर पाकिस्तान के कब्ज़े वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) में सख़्त कार्रवाई करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि सड़कों को ब्लॉक करने, बड़े पैमाने पर गिरफ़्तारियों और आतंकवाद-रोधी कानूनों के इस्तेमाल से एक गंभीर मानवीय संकट पैदा हो गया है।
 
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) के 62वें सत्र के दौरान शफीक ने कहा कि पुलिस और रेंजर्स ने इस इलाके को पाकिस्तान से जोड़ने वाली सड़कों को ब्लॉक कर दिया है, जिससे खाने-पीने की चीज़ों, दवाओं और दूसरी ज़रूरी चीज़ों की सप्लाई में रुकावट आ रही है।
 
उन्होंने कहा कि इन पाबंदियों से पूरे इलाके में बड़े पैमाने पर अशांति फैल सकती है। हालात को "राजनीति नहीं, बल्कि ज़ुल्म" बताते हुए शफीक ने कहा कि वह पिछले लगभग तीन हफ़्तों से अपनी 90 साल की माँ से संपर्क नहीं कर पाए हैं। उन्होंने अपनी माँ की बिगड़ती सेहत पर चिंता ज़ाहिर करते हुए कहा कि उन्हें हर हफ़्ते दवा की ज़रूरत होती है, लेकिन मौजूदा पाबंदियों के कारण दवा मिलना मुश्किल हो गया है। अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से अपील करते हुए शफीक ने वैश्विक संगठनों से दखल देने और पाकिस्तानी सरकार तथा जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JKJAAC) के बीच बातचीत कराने का आग्रह किया।
 
उन्होंने कहा कि और ज़्यादा जान-माल के नुकसान को रोकने और तनाव कम करने के लिए रचनात्मक बातचीत ज़रूरी है। शफीक ने मानवाधिकार कार्यकर्ता डॉ. महरंग बलूच को उम्रकैद की सज़ा सुनाए जाने की खबरों की भी आलोचना की और इस सज़ा को अन्यायपूर्ण बताया। 2024 में इस्लामाबाद में एक विरोध प्रदर्शन के दौरान उनसे हुई मुलाक़ात को याद करते हुए उन्होंने कहा कि अगर उन पर कोई आरोप थे, तो उन्हें आम अदालत में पूरी कानूनी मदद के साथ निष्पक्ष सुनवाई का मौका मिलना चाहिए था। उन्होंने कहा कि किसी मानवाधिकार कार्यकर्ता को इस तरह सज़ा देना मंज़ूर नहीं किया जा सकता।
 
कथित कार्रवाई के पैमाने पर ज़ोर देते हुए शफीक ने दावा किया कि PoJK में पिछले 20 दिनों से विरोध प्रदर्शन जारी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि 22 से ज़्यादा लोग मारे गए हैं, 576 लोगों को गिरफ़्तार किया गया है और 34 लोगों पर आतंकवाद-रोधी कानूनों के तहत मामले दर्ज किए गए हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि मारे गए कुछ लोगों के शव उनके परिवारों को नहीं सौंपे गए हैं।