आवाज द वाॅयस /मास्को
मॉस्को में भारत और रूस के बीच रणनीतिक रिश्तों को लेकर एक अहम बैठक हुई। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने रूस की सुरक्षा परिषद के सचिव सर्गेई शोइगु से मुलाकात की। इस बैठक में रक्षा सहयोग, ऊर्जा साझेदारी, सुरक्षा चुनौतियों और आर्थिक संबंधों पर विस्तार से चर्चा हुई। साथ ही नई दिल्ली में होने वाली ब्रिक्स राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बैठक को लेकर भी बातचीत हुई।

यह मुलाकात गुरुवार को मॉस्को में आयोजित पहले अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मंच के दौरान हुई। भारत और रूस के बीच लंबे समय से मजबूत रणनीतिक साझेदारी रही है। ऐसे में यह बैठक कई मायनों में अहम मानी जा रही है। खासकर ऐसे समय में जब दुनिया के कई हिस्सों में तनाव बढ़ रहा है और सुरक्षा से जुड़े नए खतरे सामने आ रहे हैं।
— Sputnik India (@Sputnik_India) May 28, 2026
रूस स्थित भारतीय दूतावास ने इस बैठक की जानकारी साझा करते हुए कहा कि दोनों पक्षों ने रक्षा, ऊर्जा, सुरक्षा और आर्थिक क्षेत्रों में जारी सहयोग की समीक्षा की। बातचीत में उन परियोजनाओं पर भी फोकस रहा जो भारत और रूस के बीच भविष्य के संबंधों को और मजबूत बना सकती हैं।
अजीत डोभाल और सर्गेई शोइगु की मुलाकात को भारत रूस संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रूस लंबे समय से भारत का भरोसेमंद रक्षा साझेदार रहा है। दोनों देशों के बीच सैन्य उपकरणों, तकनीकी सहयोग और सुरक्षा समन्वय को लेकर लगातार संवाद होता रहा है।
बैठक में ब्रिक्स राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बैठक पर भी चर्चा हुई, जिसका आयोजन जल्द ही नई दिल्ली में होना है। भारत इस मंच के जरिए वैश्विक सुरक्षा, आतंकवाद और आर्थिक स्थिरता जैसे मुद्दों पर सदस्य देशों के साथ तालमेल मजबूत करना चाहता है। माना जा रहा है कि इस बैठक में क्षेत्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय तनाव के मुद्दे प्रमुख रहेंगे।
अजीत डोभाल ने वैश्विक संस्थाओं में सुधार की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि साल 1945 के बाद बने अंतरराष्ट्रीय संस्थान और सुरक्षा ढांचे आज के दौर की चुनौतियों से निपटने में पूरी तरह सक्षम नहीं दिख रहे हैं। दुनिया बदल चुकी है। खतरे बदल चुके हैं। ऐसे में संस्थागत सुधार जरूरी हो गए हैं।
अजीत डोभाल ने कहा कि वैश्विक दक्षिण के देशों को ज्यादा प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। उनके हितों और चिंताओं को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। उन्होंने साफ कहा कि आज की दुनिया में संतुलित वैश्विक व्यवस्था तभी संभव है जब विकासशील देशों को भी बराबरी की भागीदारी मिले।
🚨🇮🇳🇷🇺 Russia keen to deepen security ties with India
— Sputnik India (@Sputnik_India) May 28, 2026
"We are committed to strengthening dialogue on both global and regional security issues," said Security Council Secretary Sergei Shoigu during his meeting with Indian NSA Ajit Doval in Moscow.
Shoigu added: "We attach… pic.twitter.com/QRoVvyZHAM
पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति का जिक्र करते हुए डोवाल ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा को बेहद जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर जैसे अहम समुद्री रास्तों पर सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करना पूरी दुनिया के लिए जरूरी है। इन मार्गों में किसी तरह की बाधा का असर वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है।
आतंकवाद के मुद्दे पर भी भारत ने अपना रुख साफ रखा। अजीत डोभाल ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में दोहरा रवैया नहीं अपनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिम्मेदार देशों को यह तय करना होगा कि वे आतंकवाद को समर्थन देने वाली ताकतों के साथ खड़े होंगे या उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई करेंगे।
अजीत डोभाल की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब भारत लगातार सीमा पार आतंकवाद का मुद्दा उठाता रहा है। उन्होंने पहलगाम आतंकी हमले का भी जिक्र किया। 22 अप्रैल 2025 को जम्मू कश्मीर के पहलगाम में हुए हमले में 26 लोगों की जान गई थी। इस हमले की जिम्मेदारी प्रतिरोध मोर्चे ने ली थी, जिसे पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठन लश्कर ए तैयबा का प्रॉक्सी माना जाता है।
भारत ने कई बार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आतंकवाद को लेकर अपनी चिंता जाहिर की है। नई दिल्ली का कहना रहा है कि आतंकवाद को किसी भी रूप में सही नहीं ठहराया जा सकता। इसके खिलाफ एक समान और स्पष्ट नीति जरूरी है।
— Manjeet Negi (@manjeetnegilive) May 28, 2026
मॉस्को में हुई यह मुलाकात सिर्फ दो अधिकारियों की औपचारिक बैठक नहीं थी। यह बदलते वैश्विक हालात में भारत और रूस के बीच बढ़ते रणनीतिक भरोसे का संकेत भी मानी जा रही है। रक्षा, ऊर्जा और सुरक्षा के क्षेत्र में दोनों देशों की साझेदारी आने वाले समय में और मजबूत हो सकती है।
— Megh Updates 🚨™ (@MeghUpdates) May 29, 2026
विशेषज्ञ मानते हैं कि जब दुनिया नए भू राजनीतिक संकटों से गुजर रही है, तब भारत और रूस जैसे पुराने साझेदारों के बीच संवाद का मजबूत बने रहना कई मायनों में अहम है।