ओटावा:
संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा कनाडा के कुछ उत्पादों पर 50 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाने के फैसले के बाद दोनों देशों के बीच व्यापारिक तनाव एक बार फिर गहरा गया है। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने अमेरिकी कदम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनकी सरकार देश के नागरिकों, किसानों, श्रमिकों और कारोबारों की सुरक्षा के लिए हर आवश्यक कदम उठाएगी। साथ ही उन्होंने दोहराया कि कनाडा मुक्त और निष्पक्ष व्यापार में विश्वास रखता है तथा विवाद का समाधान बातचीत के माध्यम से चाहता है।
मार्क कार्नी ने सोशल मीडिया मंच एक्स (X) पर जारी बयान में कहा कि अमेरिका की यह कार्रवाई पिछले कई महीनों से जारी एकतरफा व्यापारिक फैसलों की कड़ी का हिस्सा है। उनके अनुसार, अमेरिका पहले भी कनाडा पर कई ऐसे टैरिफ लगा चुका है जो कनाडा-अमेरिका-मेक्सिको मुक्त व्यापार समझौते (CUSMA) की भावना और प्रावधानों के विपरीत हैं।
कार्नी ने कहा कि विशेष रूप से कनाडा के ऑटोमोबाइल उद्योग पर लगाए गए अमेरिकी शुल्क इस व्यापार समझौते का उल्लंघन हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि कनाडा ने केवल अपने अधिकारों का उपयोग करते हुए अमेरिका के कदमों के अनुरूप जवाबी कार्रवाई की है।
प्रधानमंत्री ने कहा, "अमेरिका की इन व्यापारिक नीतियों और कनाडा की संप्रभुता से जुड़े मुद्दों के बावजूद पूरा देश एकजुट होकर खड़ा है। सभी प्रांतों और क्षेत्रों ने हमारी अर्थव्यवस्था, श्रमिकों, किसानों, उद्योगों और परिवारों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाए हैं।"
उन्होंने यह भी कहा कि पिछले लगभग डेढ़ वर्ष से अमेरिका अपनी लगभग सभी व्यापारिक साझेदारियों की समीक्षा और पुनर्गठन कर रहा है, जिनमें CUSMA भी शामिल है। इसे देखते हुए कनाडा ने इस विवाद को सुलझाने और समझौते को आधुनिक जरूरतों के अनुरूप बनाने के लिए कई विस्तृत प्रस्ताव अमेरिका के सामने रखे हैं।
कार्नी ने कहा कि कनाडा आने वाले हफ्तों में अमेरिका के साथ इन मुद्दों पर बातचीत तेज करने के लिए पूरी तरह तैयार है। उनका कहना था कि संवाद ही व्यापारिक विवादों का सबसे प्रभावी समाधान है।
प्रधानमंत्री ने दोहराया कि कनाडा मुक्त और निष्पक्ष व्यापार का समर्थक है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने हाल के महीनों में दुनिया के विभिन्न देशों के साथ 20 से अधिक नए आर्थिक और सुरक्षा साझेदारी समझौते किए हैं, जो इस नीति के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।
कार्नी ने यह भी कहा कि मौजूदा व्यापारिक विवाद का असर दोनों देशों के नागरिकों पर पड़ रहा है। उनके अनुसार, इन टैरिफ के कारण वस्तुओं की कीमतें बढ़ रही हैं, जिसका सबसे अधिक प्रभाव परिवारों पर पड़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि इसका असर केवल कनाडा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अमेरिकी उपभोक्ताओं को भी महंगी वस्तुओं का सामना करना पड़ सकता है।
उन्होंने कहा, "कनाडा हर परिस्थिति में अपने देश की आर्थिक मजबूती बढ़ाने, घरेलू उद्योगों को मजबूत करने और श्रमिकों, किसानों, कारोबारों तथा परिवारों के हितों की रक्षा के लिए आवश्यक सभी कदम उठाएगा।"
दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार (अमेरिकी समयानुसार) कनाडा से आयात होने वाले कुछ उत्पादों पर 50 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा की। यह शुल्क मुख्य रूप से डेयरी उत्पादों, मादक पेय पदार्थों और मोटर वाहनों से जुड़े उत्पादों पर लागू होगा।
अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि यह कदम अमेरिकी उत्पादों के साथ कनाडा द्वारा किए जा रहे कथित "भेदभावपूर्ण व्यवहार" के जवाब में उठाया गया है। व्हाइट हाउस के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा संबंधित घोषणा-पत्र पर हस्ताक्षर किए जाने के 30 दिन बाद ये नए शुल्क प्रभावी हो जाएंगे।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच यह व्यापारिक विवाद जल्द नहीं सुलझा, तो इसका असर उत्तर अमेरिकी व्यापार, ऑटोमोबाइल उद्योग, कृषि क्षेत्र और उपभोक्ता बाजारों पर व्यापक रूप से पड़ सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में वॉशिंगटन और ओटावा के बीच होने वाली वार्ताएं इस विवाद के भविष्य को तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।