क्या ट्रंप ईरान युद्ध में हार की ओर बढ़ रहे हैं

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 23-05-2026
Is Trump Heading Towards Defeat in the War with Iran?
Is Trump Heading Towards Defeat in the War with Iran?

 

वॉशिंगटन

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू करते समय इसे तेज और निर्णायक अभियान बताया था। लेकिन तीन महीने बाद अब सवाल उठने लगे हैं कि क्या ट्रंप यह युद्ध जीत रहे हैं या धीरे धीरे रणनीतिक तौर पर हार की तरफ बढ़ रहे हैं।

रॉयटर्स की एक विस्तृत रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका ने सैन्य स्तर पर ईरान को काफी नुकसान पहुंचाया है। ईरान के कई सैन्य ठिकाने तबाह किए गए। मिसाइल क्षमता कमजोर हुई और कई बड़े सैन्य अधिकारियों को निशाना बनाया गया। इसके बावजूद हालात पूरी तरह अमेरिका के नियंत्रण में नहीं दिख रहे।

ईरान अब भी होर्मुज जलडमरूमध्य पर प्रभाव बनाए हुए है। यह वही समुद्री रास्ता है जहां से दुनिया के बड़े हिस्से का तेल और गैस गुजरता है। ईरान ने इस रास्ते को प्रभावित कर वैश्विक ऊर्जा बाजार में चिंता बढ़ा दी। इससे तेल की कीमतों में उछाल आया और खाड़ी देशों में भी बेचैनी बढ़ गई।

विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रंप लगातार “पूर्ण जीत” का दावा कर रहे हैं, लेकिन जमीनी हालात इतने आसान नहीं हैं। ईरान ने अभी तक अपने परमाणु कार्यक्रम को रोकने के संकेत नहीं दिए हैं। अमेरिकी हमलों के बावजूद उसका परमाणु ढांचा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ।

रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका और इजराइल के हमलों के बाद भी समृद्ध यूरेनियम का बड़ा हिस्सा भूमिगत सुरक्षित माना जा रहा है। यही वजह है कि वॉशिंगटन की चिंता बनी हुई है। ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और उसे यूरेनियम संवर्धन का अधिकार है।

मध्य पूर्व मामलों के जानकार एरन डेविड मिलर ने कहा कि यह युद्ध अब लंबी रणनीतिक चुनौती में बदलता दिख रहा है। उनके मुताबिक शुरुआत में लगा था कि अमेरिका तेजी से अपने लक्ष्य हासिल कर लेगा, लेकिन अब हालात उलझते जा रहे हैं।

इस बीच अमेरिका के भीतर भी ट्रंप पर दबाव बढ़ रहा है। ऊंची तेल कीमतों और युद्ध के बढ़ते असर से जनता में नाराजगी दिखाई दे रही है। आगामी चुनावों को देखते हुए यह मुद्दा ट्रंप के लिए राजनीतिक चुनौती बन सकता है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रंप अब दोराहे पर खड़े हैं। एक रास्ता समझौते की तरफ जाता है जबकि दूसरा और बड़े सैन्य संघर्ष की ओर। अगर बातचीत विफल होती है तो अमेरिका सीमित लेकिन बड़े हमलों का विकल्प चुन सकता है।

हालांकि ट्रंप समर्थकों का मानना है कि अमेरिका ने ईरान की सैन्य ताकत को काफी नुकसान पहुंचाकर रणनीतिक बढ़त हासिल की है। ट्रंप के पूर्व सलाहकार एलेक्जेंडर ग्रे ने कहा कि इस युद्ध ने खाड़ी देशों को अमेरिका के और करीब ला दिया है।

लेकिन दूसरी तरफ कई विश्लेषकों का मानना है कि युद्ध के बाद ईरान पहले से ज्यादा आक्रामक हो सकता है। नई ईरानी नेतृत्व टीम को पहले से अधिक कट्टर माना जा रहा है। ऐसे में क्षेत्र में तनाव लंबे समय तक बना रह सकता है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इस संघर्ष ने अमेरिका और उसके यूरोपीय सहयोगियों के रिश्तों में भी दूरी पैदा की है। कई यूरोपीय देशों ने इस युद्ध में खुलकर समर्थन नहीं दिया।

उधर चीन और रूस भी इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। विश्लेषकों का मानना है कि दोनों देशों ने अमेरिकी सैन्य रणनीति की कमजोरियों का अध्ययन किया है।

फिलहाल स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है। युद्धविराम के बावजूद तनाव खत्म नहीं हुआ है। दुनिया की नजर अब इस बात पर टिकी है कि क्या ट्रंप कूटनीति के जरिए इस संकट से निकल पाएंगे या यह संघर्ष आने वाले समय में और बड़ा रूप लेगा।