ईरान वार्ता खत्म, डी-कॉन्फ्लिक्शन सेल पर सहमति

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 22-06-2026
Iran talks end, de-confliction cell agreed
Iran talks end, de-confliction cell agreed

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली 

 
 ईरान युद्ध को स्थायी रूप से समाप्त करने के उद्देश्य से स्विट्जरलैंड में हुईं उच्चस्तरीय वार्ताएं सोमवार को समाप्त हो गईं और इस दौरान ईरान एवं अमेरिका ने लेबनान में जारी संघर्ष से जुड़े मुद्दों के हल के लिए एक ‘‘डी-कॉन्फ्लिक्शन सेल’’ (तनाव-नियंत्रण समन्वय तंत्र) स्थापित करने पर सहमति व्यक्त की है।
 
मध्यस्थ देशों पाकिस्तान एवं कतर की ओर से जारी एक संयुक्त बयान में कहा गया कि इस ‘तनाव-नियंत्रण समन्वय तंत्र’ में लेबनान की सरकार भी शामिल होगी और इसका उद्देश्य ‘‘लेबनान में सैन्य अभियानों की समाप्ति के समझौते का पालन सुनिश्चित करना’’ होगा।
 
हालांकि, यह अभी स्पष्ट नहीं है कि यह व्यवस्था ईरान समर्थित सशस्त्र संगठन हिजबुल्ला और इजराइल के बीच जारी संघर्ष को रोकने के लिए पर्याप्त साबित होगी या नहीं। इजराइल का लेबनान के कुछ हिस्सों पर कब्ज़ा है और उसका कहना है कि उन चरमपंथियों के खिलाफ कार्रवाई करने की पूरी स्वतंत्रता उसके पास होनी चाहिए जो उत्तरी इजराइल पर हमले करते हैं।
 
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सोमवार तड़के स्विट्जरलैंड में हुई वार्ता के बाद पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता की सराहना करते हुए कहा कि उनकी कोशिशों से ‘‘महत्वपूर्ण प्रगति’’ हासिल हुई है।
 
अब्बास अराघची ने यह संदेश सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर साझा किया।
 
पाकिस्तान, क़तर और ईरान तीनों देशों ने उच्चस्तरीय वार्ता के पहले दौर के समाप्त होने की पुष्टि की है। हालांकि अमेरिका की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं आई है।
 
अपने संदेश में अराघची ने कहा कि वार्ता में बनी सहमतियों की पहली वास्तविक परीक्षा लेबनान में इजराइल और हिजबुल्ला के बीच जारी संघर्ष को रोकने के लिए गठित होने वाले ‘तनाव नियंत्रण समन्वय तंत्र’ की होगी।
 
ईरान ने इन वार्ताओं की सफलता को लेबनान में जारी लड़ाई की समाप्ति से जोड़ा है। वहीं इजराइल का कहना है कि वह लेबनानी क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी बनाए रखेगा और हिजबुल्ला के खिलाफ कार्रवाई करने की पूरी स्वतंत्रता उसके पास होनी चाहिए। इजराइल का आरोप है कि हिजबुल्ला उत्तरी इजराइल पर लगातार हमले कर रहा है, इसलिए उसके विरुद्ध सैन्य कार्रवाई जारी रखना आवश्यक है।
 
वार्ता की शुरुआत तनावपूर्ण माहौल में और 60-दिवसीय कूटनीतिक प्रक्रिया के रूप में हुई है, जिसका उद्देश्य ईरान युद्ध को समाप्त करने के लिए एक स्थायी समझौते तक पहुंचना है। हालांकि, लेबनान में जारी संघर्ष अब भी प्रमुख अड़चनों में से एक बना हुआ है।
 
इस बीच, ईरान ने दावा किया कि उसने सप्ताहांत के दौरान फिर से होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है, जो फ़ारस की खाड़ी का संकरा प्रवेश मार्ग है और ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। वहीं अमेरिका ने कहा कि इस मार्ग से जहाजों की आवाजाही सामान्य रूप से जारी रही।