60 दिन की निर्णायक बातचीत का आगाज, परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज प्रमुख मुद्दे

Story by  एटीवी | Published by  [email protected] | Date 22-06-2026
60-day decisive talks begin; nuclear program and Hormuz are key issues.
60-day decisive talks begin; nuclear program and Hormuz are key issues.

 

ओबबुर्गेन (स्विट्जरलैंड)।

अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर महत्वपूर्ण वार्ताओं का औपचारिक शुभारंभ रविवार को स्विट्जरलैंड में हुआ। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस और ईरान के वरिष्ठ अधिकारियों ने वार्ता प्रक्रिया की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य हालिया अंतरिम समझौते को आगे बढ़ाना और होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री यातायात को सामान्य बनाए रखना है।

पिछले सप्ताह हस्ताक्षरित अंतरिम समझौते के बाद दोनों देशों के प्रतिनिधि अगले 60 दिनों के भीतर उन तकनीकी और राजनीतिक मुद्दों पर सहमति बनाने का प्रयास करेंगे, जिनका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा बाजार और क्षेत्रीय सुरक्षा पर पड़ सकता है।

स्विट्जरलैंड के ल्यूसर्न झील के निकट आयोजित इस शिखर बैठक को "लेक ल्यूसर्न समिट" नाम दिया गया है। वार्ता की शुरुआत करते हुए जे.डी. वेंस ने कहा कि यह एक ऐतिहासिक अवसर है, जो मध्य पूर्व के भविष्य को नई दिशा दे सकता है।

उन्होंने कहा, “हमारे सामने सवाल यह है कि क्या हम मिलकर एक नया अध्याय शुरू कर सकते हैं या फिर पुराने टकरावों की ओर लौट जाएंगे। हमारी प्राथमिकता स्थायी शांति और स्थिरता है।”

हालांकि वार्ता शुरू होने के कुछ ही दिनों बाद इसे नई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इज़राइल और हिजबुल्लाह के बीच लेबनान में फिर से बढ़ी हिंसा तथा ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को पुनः बंद करने की घोषणा ने तनाव बढ़ा दिया है। हालांकि शनिवार को हुए युद्धविराम के बाद स्थिति अपेक्षाकृत शांत बताई जा रही है।

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराकची और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर कालीबाफ वार्ता में ईरानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं। वहीं अमेरिका की ओर से जे.डी. वेंस के साथ विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जारेड कुशनर भी मौजूद हैं।

वार्ता से पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने मध्यस्थ की भूमिका निभाते हुए अमेरिकी और ईरानी पक्षों से अलग-अलग मुलाकात की। कतर के प्रतिनिधि भी इस प्रक्रिया में सहयोग कर रहे हैं।

ईरान ने स्पष्ट किया है कि किसी भी समझौते के क्रियान्वयन की शुरुआत क्षेत्र में सभी संघर्षों को समाप्त करने से होनी चाहिए, विशेषकर इज़राइल और हिजबुल्लाह के बीच जारी संघर्ष से। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि युद्धविराम को लागू कराना अमेरिका की जिम्मेदारी है।

इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान समर्थित समूह लेबनान में अशांति फैलाना जारी रखते हैं, तो अमेरिका कड़ी कार्रवाई कर सकता है। ट्रंप ने यह भी कहा कि 60 दिनों की वार्ता अवधि में परमाणु कार्यक्रम, होर्मुज जलडमरूमध्य, प्रतिबंधों में राहत, ईरान की जब्त संपत्तियों की वापसी और पुनर्निर्माण जैसे मुद्दों पर अंतिम समाधान खोजा जाएगा।

ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने दोहराया कि उनका देश यूरेनियम संवर्धन के अपने अधिकार से पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने कहा कि ईरान शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम जारी रखेगा और इस अधिकार को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार किया जाना चाहिए।

विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह वार्ता सफल रहती है, तो इससे मध्य पूर्व में तनाव कम होने, तेल बाजार में स्थिरता आने और वैश्विक अर्थव्यवस्था को राहत मिलने की संभावना है। दुनिया भर की निगाहें अब इस 60 दिवसीय वार्ता प्रक्रिया के परिणामों पर टिकी हुई हैं।