20 दिनों में चीन को 6 अरब डॉलर का तेल, अमेरिकी प्रतिबंधों के बीच ईरान के निर्यात पर बड़ा दावा

Story by  एटीवी | Published by  [email protected] | Date 20-07-2026
Iran exports 6 billion worth of oil to China in 20 days; major claim regarding exports amidst US sanctions.
Iran exports 6 billion worth of oil to China in 20 days; major claim regarding exports amidst US sanctions.

 

तेहरान

अमेरिकी अखबार द वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान ने अमेरिकी प्रतिबंधों में मिली अस्थायी राहत का लाभ उठाते हुए महज 20 दिनों के भीतर चीन को करीब 6 अरब डॉलर मूल्य का कच्चा तेल निर्यात किया। रिपोर्ट के अनुसार, इस दौरान ईरान ने अपने तेल निर्यात नेटवर्क को सक्रिय करते हुए बड़ी मात्रा में कच्चा तेल चीनी बंदरगाहों तक पहुंचाया।

रिपोर्ट के मुताबिक, 17 जून से 7 जुलाई के बीच अमेरिकी प्रतिबंधों में मिली ढील के दौरान ईरान ने अपने लगभग 20 तेल टैंकरों के जरिए चीन को बड़ी मात्रा में कच्चा तेल भेजा। दावा किया गया है कि 17 जून से 30 जून के बीच केवल 13 दिनों में ही ईरान ने लगभग 7 करोड़ बैरल कच्चा तेल चीन के लिए रवाना किया। मौजूदा अंतरराष्ट्रीय बाजार मूल्य के हिसाब से इसकी कीमत लगभग 6 अरब अमेरिकी डॉलर आंकी गई है।

बताया गया है कि ईरान ने इस निर्यात के लिए मलेशिया के पूर्वी तट का इस्तेमाल किया, जहां से तेल टैंकरों को चीन की ओर भेजा गया। यह मार्ग लंबे समय से ईरानी तेल के वैकल्पिक निर्यात नेटवर्क का हिस्सा माना जाता रहा है।

प्रतिबंधों में मिली थी अस्थायी राहत

रिपोर्ट के अनुसार, 17 जून को हुए इस्लामाबाद समझौते के बाद अमेरिका ने कुछ समय के लिए ईरानी तेल निर्यात पर लगाए गए प्रतिबंधों में ढील दी थी। हालांकि क्षेत्रीय तनाव बढ़ने के बाद 7 जुलाई को अमेरिका ने फिर से प्रतिबंध लागू कर दिए। इसके साथ ही ईरानी बंदरगाहों पर निगरानी और नाकाबंदी भी कड़ी कर दी गई।

दावे के मुताबिक, प्रतिबंध दोबारा लागू होने के बाद ईरान के अधिकांश तेल टैंकर बंदरगाहों से बाहर नहीं निकल पाए, जबकि जो जहाज पहले से समुद्र में थे, उनके लिए भी वापस लौटना मुश्किल हो गया।

चीन बना ईरानी तेल का सबसे बड़ा खरीदार

अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद चीन लगातार ईरानी तेल का सबसे बड़ा आयातक बना हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के कुल तेल निर्यात का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा चीन खरीदता है। बीते कई वर्षों में जब भी अमेरिका ने प्रतिबंध लगाए, चीन ने विभिन्न वैकल्पिक तरीकों से ईरानी तेल की खरीद जारी रखी।

विशेषज्ञों का मानना है कि चीन अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने और सस्ते कच्चे तेल की उपलब्धता बनाए रखने के लिए ईरान से आयात जारी रखता है। वहीं ईरान के लिए चीन सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा बाजार बन चुका है।

कैसे पहुंचता है ईरानी तेल?

रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि जब अमेरिकी प्रतिबंध प्रभावी होते हैं, तब ईरानी तेल टैंकर सीधे चीनी बंदरगाहों तक नहीं जाते। इसके बजाय वे दक्षिण चीन सागर के उस समुद्री क्षेत्र में पहुंचते हैं जिसे ईस्टर्न आउटर पोर्ट लिमिट (EOPL) या अनौपचारिक रूप से 'नो मैन्स लैंड' कहा जाता है।

यहां पहले से मौजूद चीनी टैंकरों में समुद्र के बीच ही पाइपलाइन के जरिए एक जहाज से दूसरे जहाज में तेल स्थानांतरित (Ship-to-Ship Transfer) किया जाता है। इसके बाद चीनी टैंकर उस तेल को अपने बंदरगाहों तक पहुंचाते हैं। माना जाता है कि ईरान कई वर्षों से इसी तरीके का इस्तेमाल कर प्रतिबंधों के बावजूद अपना तेल निर्यात करता रहा है।

1979 से लागू हैं अमेरिकी प्रतिबंध

ईरान के तेल निर्यात पर अमेरिकी प्रतिबंधों का इतिहास काफी पुराना है। अमेरिका ने पहली बार 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद ईरान पर व्यापक आर्थिक प्रतिबंध लगाए थे। इसके बाद विभिन्न अमेरिकी प्रशासन ने समय-समय पर इन प्रतिबंधों को और सख्त किया। इनका उद्देश्य ईरान के ऊर्जा क्षेत्र पर दबाव बनाना और उसके तेल निर्यात को सीमित करना रहा है।

हालांकि इन प्रतिबंधों के बावजूद ईरान ने वैकल्पिक व्यापार मार्ग, समुद्री नेटवर्क और मित्र देशों के सहयोग से अपने तेल निर्यात को पूरी तरह बंद नहीं होने दिया।

रिपोर्ट पर आधिकारिक पुष्टि नहीं

वॉल स्ट्रीट जर्नल की इस रिपोर्ट में किए गए दावों पर फिलहाल अमेरिका, ईरान या चीन की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि या विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इसलिए रिपोर्ट में उल्लिखित आंकड़ों को स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं किया जा सका है।

यदि यह दावा सही साबित होता है, तो यह संकेत होगा कि प्रतिबंधों में मिली सीमित राहत के दौरान ईरान ने अपने तेल निर्यात को तेजी से बढ़ाया और चीन ने भी बड़ी मात्रा में कच्चे तेल की खरीद जारी रखी। वहीं, 7 जुलाई के बाद दोबारा लागू हुए अमेरिकी प्रतिबंधों ने इस व्यापार पर एक बार फिर अनिश्चितता पैदा कर दी है।