जुलाई 2024 विद्रोह के बाद बांग्लादेश में पहली जबरन गुमशुदगी: ह्यूमन राइट्स वॉच

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  onikamaheshwari | Date 20-07-2026
Human Rights Watch flags first enforced disappearance in Bangladesh since July 2024 uprising
Human Rights Watch flags first enforced disappearance in Bangladesh since July 2024 uprising

 

ढाका

मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच (HRW) ने बांग्लादेश सरकार से 30 वर्षीय मछुआरे मिराज शेख के कथित जबरन गायब किए जाने के मामले की तत्काल और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। संगठन ने कहा कि यह जुलाई 2024 के जनविद्रोह और सत्ता परिवर्तन के बाद सामने आया पहला ज्ञात जबरन गुमशुदगी (Enforced Disappearance) का मामला प्रतीत होता है।

HRW के अनुसार, बांग्लादेश हाईकोर्ट ने 12 जुलाई 2026 को कानून प्रवर्तन एजेंसियों को मिराज शेख का पता लगाकर 15 दिनों के भीतर अदालत में पेश करने का आदेश दिया था। संगठन ने सरकार से इस आदेश का तत्काल पालन करने और सुरक्षा बलों की जवाबदेही सुनिश्चित करने का आग्रह किया है।

कोस्ट गार्ड पर हिरासत का आरोप

रिपोर्ट के मुताबिक, 10 अप्रैल 2026 की रात सुंदरबन के निकट जॉयमोनीर घोल इलाके में कई प्रत्यक्षदर्शियों ने मिराज शेख को बांग्लादेश कोस्ट गार्ड के जवानों द्वारा हिरासत में लेकर स्पीडबोट से ले जाते हुए देखा। हालांकि, अगले दिन परिवार के कोस्ट गार्ड कार्यालय पहुंचने पर अधिकारियों ने पहले कहा कि वह "ऑपरेशन पर हैं" और बाद में हिरासत में लेने से ही इनकार कर दिया।

मिराज के परिवार ने शिकायत दर्ज कराई, प्रेस कॉन्फ्रेंस की और कई सरकारी अधिकारियों से गुहार लगाई, लेकिन अब तक उनका कोई पता नहीं चल सका है।

सुधारों को कमजोर करने का आरोप

HRW ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के 15 वर्षों के शासनकाल में जबरन गुमशुदगी की घटनाएं व्यापक थीं। इसी पृष्ठभूमि में अंतरिम सरकार ने 2025 में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग अध्यादेश लागू किया था, जिससे आयोग को स्वतंत्र जांच और किसी भी हिरासत केंद्र का निरीक्षण करने का अधिकार मिला था।

लेकिन फरवरी 2026 में सत्ता में आई बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) सरकार ने इस अध्यादेश को समाप्त होने दिया और एक नया विधेयक प्रस्तावित किया, जिसके तहत मानवाधिकार आयोग सुरक्षा बलों के खिलाफ मानवाधिकार उल्लंघन के मामलों की जांच नहीं कर सकेगा।

HRW ने जताई चिंता

HRW की एशिया उपनिदेशक मीनाक्षी गांगुली ने कहा कि शेख हसीना के शासनकाल में हजारों लोग जबरन गायब किए गए थे और ताजा मामला दिखाता है कि वास्तविक संस्थागत सुधारों के बिना ऐसी घटनाएं दोबारा हो सकती हैं। उन्होंने सरकार से सुरक्षा बलों में जवाबदेही, संस्थागत सुधार और प्रभावी कानूनी सुरक्षा उपाय लागू करने की अपील की।

आयोग की रिपोर्ट में गंभीर खुलासे

अंतरिम सरकार द्वारा गठित जांच आयोग के अनुसार, 2009 से 2024 के बीच 1,569 जबरन गुमशुदगी के मामले दर्ज किए गए। इनमें 1,282 लोग बाद में वापस लौटे, जबकि 251 लोग आज तक लापता हैं और उन्हें मृत माना जाता है। 36 लोगों के शव बरामद हुए। आयोग ने कहा कि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है।

रिपोर्ट में पुलिस, रैपिड एक्शन बटालियन (RAB) और सैन्य खुफिया एजेंसी सहित कई सुरक्षा एजेंसियों की संलिप्तता का उल्लेख किया गया है। साथ ही, गुप्त हिरासत केंद्रों में व्यवस्थित यातना दिए जाने और विशेष यातना कक्षों के इस्तेमाल का भी दावा किया गया है।

HRW ने बांग्लादेश सरकार से प्रस्तावित कानून में संशोधन कर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को जबरन गुमशुदगी के मामलों की स्वतंत्र जांच का अधिकार बहाल करने और दोषियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है।