दक्षिण लेबनान में इजराइली सेना की मौजूदगी तक हथियार नहीं डालेगा हिजबुल्ला: कमांडर नईम कासिम

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 20-04-2025
Hezbollah will not lay down arms until Israeli forces are present in South Lebanon: Commander Naeem Qassim
Hezbollah will not lay down arms until Israeli forces are present in South Lebanon: Commander Naeem Qassim

 

बेरूत

लेबनान के चरमपंथी संगठन हिजबुल्ला के शीर्ष नेता नईम कासिम ने शुक्रवार को स्पष्ट कहा कि जब तक इजराइली सेना दक्षिणी लेबनान में मौजूद रहेगी और इजराइली वायुसेना लेबनान के हवाई क्षेत्र का उल्लंघन करती रहेगी, तब तक हिजबुल्ला अपने हथियार नहीं छोड़ेगा.

हिजबुल्ला के टेलीविजन चैनल पर प्रसारित एक भाषण में कासिम ने अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए यह बात कही. बता दें कि हसन नसरल्ला की मौत के बाद कासिम ने संगठन की कमान संभाली थी। नसरल्ला और उनके उत्तराधिकारी हाशेम सफीद्दीन की मौत पिछले साल इजराइली हमलों में हुई थी.

कासिम ने कहा कि हिजबुल्ला ने अमेरिका की मध्यस्थता में हुए संघर्षविराम समझौते का पालन किया है, जो अक्टूबर 2023 में इजराइल और हिजबुल्ला के बीच शुरू हुए संघर्ष को रोकने के लिए किया गया था.

हालांकि, नवंबर 2023 के अंत में संघर्षविराम लागू होने के बावजूद, इजराइली हमलों में लेबनान के आम नागरिकों और हिजबुल्ला के लड़ाकों की मौत होती रही है. इजराइल का दावा है कि वह हिजबुल्ला के आतंकी ठिकानों को निशाना बना रहा है.

पिछले सप्ताह अमेरिका के उप विशेष दूत मॉर्गन ऑर्टागस ने बेरूत का दौरा किया और लेबनानी सरकार से अपील की कि वह लिटानी नदी के दक्षिणी क्षेत्र और इजराइल से सटे सभी इलाकों पर नियंत्रण स्थापित करे.

कासिम ने अपने भाषण में जोर देकर कहा,

“हम किसी को भी हिजबुल्ला के हथियार छीनने की अनुमति नहीं देंगे. यही हथियार हैं जिन्होंने हमारे लोगों को जीवन और आज़ादी दी है.”

उनकी यह टिप्पणी दक्षिणी लेबनान में दो इजराइली ड्रोन हमलों में हिजबुल्ला के दो लड़ाकों की मौत के कुछ घंटे बाद सामने आई. इजराइल ने दावा किया कि उसने इन हमलों में हिजबुल्ला के चरमपंथियों को निशाना बनाया.

कासिम ने कहा,

“क्या कोई हमसे इस स्थिति में राष्ट्रीय रक्षा रणनीति पर बात करने की उम्मीद कर सकता है, जब इजराइली विमान हमारे आसमान में उड़ रहे हों और दक्षिण लेबनान पर कब्ज़ा हो? ये बातचीत नहीं, आत्मसमर्पण होगा। पहले इजराइल को पीछे हटना होगा और अपनी उड़ानें बंद करनी होंगी.”

उनकी यह टिप्पणी इस बात का संकेत है कि जब तक इजराइल की सैन्य गतिविधियां लेबनान की सीमा में जारी रहेंगी, तब तक क्षेत्र में शांति की उम्मीद बेहद कमजोर है.