हिज़्बुल्लाह के 39 हमले, इज़रायल-लेबनान सीमा पर तनाव बढ़ा

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 16-04-2026
39 Hezbollah Attacks: Tensions Escalate on Israel-Lebanon Border
39 Hezbollah Attacks: Tensions Escalate on Israel-Lebanon Border

 

बेरूत।

पश्चिम एशिया में हालात लगातार तनावपूर्ण होते जा रहे हैं। लेबनान के सशस्त्र संगठन Hezbollah ने दावा किया है कि उसने बीते 24 घंटों में इज़रायली ठिकानों पर 39 सैन्य हमले किए हैं। इन हमलों में इज़रायली बस्तियों, सैनिक ठिकानों और सैन्य वाहनों को निशाना बनाया गया, जिससे सीमा पर संघर्ष और तेज हो गया है।

इसी बीच, World Health Organization के महानिदेशक Tedros Adhanom Ghebreyesus ने दक्षिणी लेबनान की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने बताया कि तेबनीन सरकारी अस्पताल हालिया हमलों में क्षतिग्रस्त हुआ है, जिससे वहां की आपात सेवाओं पर भारी दबाव पड़ गया है। अस्पताल के वेंटिलेटर, मॉनिटर और अन्य जरूरी उपकरण भी प्रभावित हुए हैं, जबकि 11 स्वास्थ्यकर्मी घायल हुए हैं।

डब्ल्यूएचओ के अनुसार, इस संघर्ष के दौरान अब तक स्वास्थ्य सुविधाओं पर 133 हमले दर्ज किए गए हैं, जिनमें 88 लोगों की मौत और 206 लोग घायल हुए हैं। 15 अस्पताल और कई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, जबकि कई को बंद करना पड़ा है। संगठन ने स्वास्थ्य संस्थानों और कर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है।

एक अन्य घटना में दक्षिणी लेबनान के मेयफदौन क्षेत्र में इज़रायली हमलों में चार पैरामेडिक्स की मौत हो गई और छह अन्य घायल हो गए। इन हमलों को “ट्रिपल-टैप” स्ट्राइक बताया जा रहा है, जिसमें एंबुलेंस को भी निशाना बनाया गया।

इस बीच, इज़रायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने कहा कि उनकी सेना दक्षिणी लेबनान में हिज़्बुल्लाह के ठिकानों पर लक्षित कार्रवाई जारी रखे हुए है। उन्होंने बिंत जुबैल को संगठन का प्रमुख गढ़ बताते हुए इसे खत्म करने का संकल्प दोहराया।

हालांकि, सैन्य कार्रवाई के साथ-साथ इज़रायल और लेबनान के बीच कूटनीतिक वार्ताएं भी जारी हैं। नेतन्याहू ने “शक्ति के जरिए शांति” की नीति पर जोर देते हुए कहा कि स्थायी समाधान के लिए बातचीत भी जरूरी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार हमलों और जवाबी कार्रवाई से क्षेत्र में हालात और बिगड़ सकते हैं। दक्षिणी लेबनान में नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है। ऐसे में यह संघर्ष न केवल सैन्य, बल्कि मानवीय संकट का रूप भी लेता जा रहा है।