वॉशिंगटन
अमेरिका के इंडो-पैसिफिक कमांड के प्रमुख एडमिरल सैमुअल जे. पापारो ने चीन से बढ़ते खतरे को लेकर गंभीर चिंता जताई है। अमेरिकी कांग्रेस की सशस्त्र सेवा समिति में पेश अपने बयान में उन्होंने कहा कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन की सैन्य गतिविधियां और आक्रामक रुख अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए एक बड़ी चुनौती बनते जा रहे हैं।
एडमिरल पापारो ने बताया कि अमेरिका इस समय ईरान के साथ जारी संघर्ष में उलझा हुआ है, जिससे उसकी सैन्य क्षमता पर असर पड़ रहा है। उन्होंने संकेत दिया कि ईरान के खिलाफ चल रहे अभियान में बड़ी मात्रा में मिसाइल और हथियारों का इस्तेमाल हो रहा है, जिससे भविष्य में चीन जैसे प्रतिद्वंद्वी से निपटने के लिए जरूरी संसाधनों की कमी हो सकती है। कुछ अनुमान के अनुसार अमेरिका इस युद्ध पर रोजाना करीब 1 अरब डॉलर खर्च कर रहा है।
सुनवाई के दौरान अमेरिकी सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने भी इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि ईरान युद्ध का प्रभाव गंभीर है और इससे अमेरिकी सैन्य संसाधनों पर दबाव बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि जनता को इस युद्ध की लागत और इसके प्रभावों को समझना चाहिए।
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने अपने कुछ सैन्य संसाधनों को इंडो-पैसिफिक क्षेत्र से हटाकर मध्य पूर्व में तैनात किया है। उदाहरण के तौर पर जापान में तैनात 31वीं मरीन यूनिट और यूएसएस अब्राहम लिंकन जैसे विमानवाहक पोत को भी मध्य पूर्व भेजा गया है। इससे क्षेत्र में अमेरिकी उपस्थिति पर असर पड़ा है।
हालांकि पापारो ने इस स्थिति को सकारात्मक तरीके से प्रस्तुत करते हुए कहा कि इन तैनातियों से अमेरिकी सेना की वैश्विक क्षमता और अनुभव में वृद्धि होती है, जो भविष्य में किसी भी संघर्ष के लिए उन्हें और मजबूत बनाएगी।
उन्होंने यह भी बताया कि चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) तेजी से अपनी सैन्य क्षमता बढ़ा रही है। चीन के पास दुनिया का सबसे बड़ा मिसाइल भंडार है, जिसमें हाइपरसोनिक हथियार भी शामिल हैं। ताइवान के आसपास चीन की बढ़ती गतिविधियां इस बात का संकेत हैं कि वह भविष्य में बल प्रयोग से पीछे नहीं हटेगा।
पापारो ने चेतावनी दी कि चीन सिर्फ अपने आसपास के क्षेत्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि वह वैश्विक स्तर पर अपनी सैन्य शक्ति का विस्तार करना चाहता है। उन्होंने कहा कि चीन अपनी सेना को एक आधुनिक, नेटवर्क आधारित और बहु-क्षेत्रीय युद्ध के लिए तैयार कर रहा है, जो दूर-दराज के इलाकों में भी प्रभावी ढंग से कार्रवाई कर सके।
उन्होंने आधुनिक युद्ध के बदलते स्वरूप पर भी प्रकाश डाला, जिसमें साइबर हमले, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन और सूचना युद्ध अहम भूमिका निभा रहे हैं। पापारो के अनुसार, चीन इन सभी क्षेत्रों में तेजी से प्रगति कर रहा है और यह अमेरिका के लिए एक बड़ी चुनौती है।
इसके अलावा, चीन, रूस और उत्तर कोरिया के बीच बढ़ता सहयोग भी अमेरिका के लिए चिंता का विषय है। पापारो ने कहा कि इन देशों के बीच तालमेल क्षेत्रीय सुरक्षा को कमजोर कर सकता है और तनाव को और बढ़ा सकता है।
अमेरिका की रणनीति के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य चीन को सैन्य आक्रामकता से रोकना और अपने सहयोगी देशों के साथ मिलकर एक मजबूत सुरक्षा ढांचा तैयार करना है। उन्होंने कहा कि अमेरिका को अपनी सैन्य तैयारियों को और मजबूत करना होगा और नई तकनीकों में निवेश बढ़ाना होगा।
अंत में पापारो ने कहा कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र 21वीं सदी में अमेरिका की सुरक्षा और समृद्धि के लिए सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्र है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर अभी सही कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में अमेरिका को कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है।