America is also becoming addicted to football.
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
खचाखच भरे स्टेडियम में अमेरिकी टीम की जर्सी पहने और चेहरे पर देश के झंडे के लाल सफेद और नीले रंग पुते दर्शक अमेरिका के किसी भी स्टेडियम में दिख जायेंगे लेकिन इस बार पहली बार ये दर्शक फुटबॉल के लिये उमड़े थे ।
विश्व कप के सह मेजबान अमेरिका के पहले मैच में लॉस एंजिलिस के पास स्टेडियम में 70492 दर्शक आये जिन्होंने अपनी टीम को पराग्वे पर 4 . 1 से जीत दर्ज करते देखा । हजारों डॉलर खर्च करके अमेरिका को ऐसे खेल के महासमर में अपनी सरजमीं पर खेलते देखने ये दर्शक आये थे जो खेल देश में लोकप्रियता खोता जा रहा था ।
अधिकांश प्रशंसकों का कहना है कि बचपन में मनोरंजन क्लबों के लिये फुटबॉल खेलते हुए वे बड़े हुए हैं । लॉस एंजिलिस में रहने वाली 37 वर्ष की नकिशा गुतिरेज और उनकी बहन दोनों फुटबॉल खेलती हैं । उनके पिता अर्जेंटीना से है लिहाजा यह प्रेम लाजमी है ।
गुतिरेज ने कहा ,‘‘ यह हमारे खून में है । अमेरिका में फुटबॉल कल्चर पैदा हो रहा है ।’’
हर चार साल में होने वाले विश्व कप फुटबॉल में टीम के जीतने पर देश में आतिशबाजी, जश्न और छुट्टी का माहौल हो जाता है लेकिन अमेरिका में उतना जुनून देखने को नहीं मिलता है । यहां फुटबॉल से ज्यादा लोकप्रिय बेसबॉल और बास्केटबॉल है ।
लेकिन 1994 में अमेरिका में पहली बार विश्व कप होने के बाद से यहां फुटबॉल लोकप्रिय होने लगा । दो साल बाद मेजर लीग सॉकर शुरू हुआ और युवाओं में खेल की मांग बढी ।गुतिरेज की तरह ही प्रवासियों ने भी खेल को जिंदा रखने में अहम भूमिका निभाई ।
स्टेच्यू आफ लिबर्टी की तरह तैयार होकर आई 14 वर्ष की एवा कुपिट के परदादा स्पेन से थे और वह फ्रेंकलिन कस्बे में फुटबॉल की दीवानगी लेकर आये । उन्होंने वहां स्टेडियम भी बनवाये ।
एवा की मां रशेल कुपिट ने कहा ,‘‘ उनकी वजह से हम सभी फुटबॉल के दीवाने हैं । धीरे धीरे पूरा परिवार फुटबॉल प्रशंसक बनता चला गया ।’
अमेरिका के पहले मैच को देखने भारी संख्या में दर्शक जुटे और मैदान पर उनके शोर से आसमान गूंज उठा ।