त्रिपुरा: आग से बर्बाद हुए घर, इंसानियत ने दिखाई राह - शेख फाउंडेशन ने बचाई तीन परिवारों की जान

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 22-02-2026
Tripura: Homes destroyed by fire, humanity shows the way - Sheikh Foundation saves the lives of three families
Tripura: Homes destroyed by fire, humanity shows the way - Sheikh Foundation saves the lives of three families

 

नूरुल हक / अगरतला

त्रिपुरा के कैलाशहर जिले के गोरनगर ब्लॉक में हाल ही में आग लगने की घटना ने पूरे इलाके को सदमे में डाल दिया। इस घटना में तीन हिंदू परिवार पूरी तरह से प्रभावित हुए, जिनमें देओल बाओली परिवार भी शामिल था। इन परिवारों ने बाग-बगीचों में काम करके अपनी रोजी-रोटी कमाई थी।

आग ने कुछ ही पलों में उनके घर, फर्नीचर, बचत और भविष्य की उम्मीदों को राख में बदल दिया। तीन परिवारों के कुल चौदह सदस्य, जिनमें बच्चे और बुजुर्ग शामिल थे, कड़ाके की ठंड में खुले आसमान के नीचे बेघर हो गए। दिनभर प्रयास करने के बावजूद उन्हें कहीं ठहरने की जगह नहीं मिली। रात उन्हें जलते हुए मलबे के पास बितानी पड़ी।

ऐसे संकट के समय में इलाके के एक युवा मुस्लिम युवक आफताब अली ने मानवता का असली उदाहरण पेश किया। उन्होंने तुरंत इन प्रभावित परिवारों की मदद के लिए कदम बढ़ाया। अपने घर के दरवाजे खोलते हुए उन्होंने तीनों परिवारों के लिए अपने घर के तीन कमरे आवंटित किए। उनका मकसद साफ था कि प्रभावित लोग सुरक्षित रहें और उन्हें रात बिताने के लिए आश्रय मिले।

आफताब अली ने केवल घर का आश्रय ही नहीं दिया। उन्होंने प्रभावित परिवारों की रोजमर्रा की जरूरतों का भी पूरा ध्यान रखा। उनके घर में खाना पकाने के बर्तन, गैस सिलेंडर, बिस्तर, राशन और अन्य बुनियादी आवश्यकताएं उपलब्ध कराई गईं। इस तरह उन्होंने सुनिश्चित किया कि परिवारों को भोजन और जीवन की आवश्यक वस्तुओं की कमी न हो।

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इस बीच शेख फाउंडेशन ने भी प्रभावित परिवारों की मदद के लिए हाथ बढ़ाया। फाउंडेशन ने एक वाहन के माध्यम से इन परिवारों तक एक महीने का राशन पहुँचाया। इसके अलावा, परिवार के बच्चों के लिए शैक्षिक सामग्री और सभी सदस्यों के लिए कपड़े उपलब्ध कराए गए।

शेख फाउंडेशन के सलाहकार और सामाजिक कार्यकर्ता मकबूल अली इस अवसर पर मौजूद रहे। उनके साथ फाउंडेशन के सदस्य अब्बास अली अल-जलीली, शेख जसीमुद्दीन, ताजुल इस्लाम और गोरनगर ग्राम पंचायत के स्थानीय युवा याह्या खान भी उपस्थित थे।

इस मदद ने प्रभावित परिवारों की तात्कालिक जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके अलावा, इस प्रयास ने गोरनगर क्षेत्र में इंसानियत, भाईचारे और आपसी सद्भाव का भी बेहतरीन उदाहरण प्रस्तुत किया।

आफताब अली की पहल ने यह संदेश दिया कि कठिन परिस्थितियों में इंसानियत और आपसी सहयोग से जीवन की सबसे बड़ी मुश्किलों को भी पार किया जा सकता है। उन्होंने न केवल प्रभावित लोगों की मदद की, बल्कि यह भी दिखाया कि धर्म और जाति के अंतर को पीछे छोड़कर समाज में एकता और सहानुभूति के मूल्य को हमेशा आगे रखा जा सकता है।

शेख फाउंडेशन ने अपनी सेवाभावना के जरिए यह साबित किया कि सामाजिक संगठनों और स्थानीय समुदाय के लोग मिलकर किसी भी संकट का सामना कर सकते हैं। उनका यह प्रयास सिर्फ तीन परिवारों की मदद तक सीमित नहीं रहा। इससे पूरे क्षेत्र में यह संदेश गया कि मुश्किल समय में मिलकर मदद करना ही सच्ची इंसानियत है।

गोरनगर में हुई यह घटना और इसका समाधान स्थानीय लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है। इस कहानी ने यह दिखाया कि जब समाज के लोग और संगठन मानवता के लिए आगे आते हैं तो किसी भी संकट को अवसर में बदला जा सकता है।

इस घटना ने यह भी उजागर किया कि व्यक्तिगत और सामूहिक प्रयासों से, चाहे वह किसी भी धर्म या समुदाय के हों, जीवन संकट में फंसे लोगों की मदद की जा सकती है। आफताब अली और शेख फाउंडेशन की पहल ने साबित किया कि कठिन समय में इंसानियत ही सबसे बड़ा बल है।

गोरनगर में आग से प्रभावित परिवार अब सुरक्षित हैं। उन्हें भोजन, कपड़े और आवास की सुविधा मिल चुकी है। बच्चों को पढ़ाई की सामग्री भी उपलब्ध कराई गई है। इलाके में इस घटना के बाद इंसानियत और आपसी भाईचारे की भावना को लेकर सकारात्मक संदेश फैल गया है।

इस तरह त्रिपुरा की गोरनगर आग की घटना ने यह दिखाया कि संकट की घड़ी में इंसानियत ही सबसे बड़ा सहारा होती है। आफताब अली और शेख फाउंडेशन ने जिस तरह मदद की, वह आने वाले समय में दूसरों के लिए भी प्रेरणा बन सकती है।