आवाज द वाॅयस /किशनगंज/बिहार
बिहार के सीमावर्ती ज़िले किशनगंज से सामने आई यह कहानी उन तमाम पूर्वाग्रहों को तोड़ती है, जो अक्सर हिंदू–मुस्लिम रिश्तों को लेकर समाज में फैला दिए जाते हैं। एक हिंदू शिक्षिका, जिन्हें मुस्लिम बाहुल्य इस ज़िले में जॉइनिंग से पहले “मिनी पाकिस्तान” कहकर डराया गया था, वही शिक्षिका तबादले के बाद जब यहां से रुख़्सत होने लगीं तो मुस्लिम समाज की मोहब्बत और अपनापन याद कर फूट-फूटकर रो पड़ीं। यह दृश्य न सिर्फ़ भावुक था, बल्कि सामाजिक सौहार्द की एक सशक्त तस्वीर भी पेश करता है।
शिक्षिका का तबादला जब किशनगंज हुआ था, तब उनके परिवार और परिचितों के बीच चिंता का माहौल था। कई लोगों ने यह कहकर उन्हें हतोत्साहित करने की कोशिश की कि यह इलाका संवेदनशील है, यहां माहौल ठीक नहीं रहता और इसे तंज़ के तौर पर “मिनी पाकिस्तान” कहा जाता है। इन बातों ने शिक्षिका के मन में भी अनजाने डर पैदा कर दिए थे। बावजूद इसके, उन्होंने अपने कर्तव्य को प्राथमिकता दी और किशनगंज में स्कूल जॉइन किया।
शुरुआती दिनों में वह सतर्क रहीं, लेकिन धीरे-धीरे उनके अनुभव बदलने लगे। स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों का व्यवहार, अभिभावकों की भाषा और स्थानीय लोगों का सहयोग उनके लिए हैरान करने वाला था। उन्हें हर कदम पर सम्मान मिला। मुस्लिम समुदाय के लोगों ने न सिर्फ़ उन्हें एक शिक्षक के रूप में स्वीकार किया, बल्कि एक अपने सदस्य की तरह अपनाया। त्योहारों पर शुभकामनाएं, मुश्किल वक्त में साथ और रोज़मर्रा की ज़िंदगी में सहयोग ने उनके मन से हर डर को मिटा दिया।
शिक्षिका बताती हैं कि किशनगंज में रहते हुए उन्होंने कभी यह महसूस नहीं किया कि वह किसी अलग धर्म से हैं। यहां लोगों ने उन्हें सिर्फ़ एक इंसान और एक शिक्षक के रूप में देखा। उनके अनुसार, जिन बातों से उन्हें डराया गया था, वे ज़मीनी हकीकत से कोसों दूर थीं। किशनगंज का समाज आपसी भाईचारे और इंसानियत की मिसाल है।
हाल ही में जब उनका तबादला किसी दूसरे ज़िले में हुआ और विदाई का समय आया, तो स्कूल में भावनात्मक माहौल बन गया। बच्चे, अभिभावक और स्थानीय लोग उन्हें छोड़ने पहुंचे। सभी की आंखों में उदासी थी। इसी दौरान शिक्षिका खुद को संभाल नहीं सकीं और सबके सामने रो पड़ीं। उन्होंने कहा कि उन्हें यहां से जाना नहीं है, लेकिन सरकारी सेवा में तबादला एक प्रक्रिया है। जाते-जाते उन्होंने यह भी कहा कि किशनगंज ने उन्हें ज़िंदगी का एक बड़ा सबक दिया है।
इस विदाई का वीडियो और तस्वीरें सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी यह कहानी तेज़ी से वायरल हो गई। लोग इसे हिंदू–मुस्लिम एकता और गंगा-जमुनी तहज़ीब की सच्ची मिसाल बता रहे हैं। किशनगंज की यह घटना यह साबित करती है कि नफ़रत की राजनीति और अफवाहों के बावजूद देश की असली ताकत आज भी आपसी भरोसे, प्रेम और इंसानियत में ही बसती है।