काशी में मुस्लिम महिलाओं ने खेली रंगों की होली, दिया विश्व शांति का संदेश

Story by  ओनिका माहेश्वरी | Published by  onikamaheshwari | Date 03-03-2026
Muslim women in Kashi played Holi with colours and gave the message of world peace.
Muslim women in Kashi played Holi with colours and gave the message of world peace.

 

ओनिका माहेश्वरी/ नई दिल्ली  

दुनिया इस समय ईरान, अमेरिका और इज़राइल के बीच बढ़ते तनाव पर टिकी हुई है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर युद्ध और टकराव की आशंकाओं के बीच उत्तर प्रदेश के काशी से भाईचारे, एकता और शांति का संदेश देने वाली एक अनूठी तस्वीर सामने आई।

वाराणसी के लमही स्थित सुभाष भवन में मुस्लिम महिला फाउंडेशन एवं विशाल भारत संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में ‘गुलालोत्सव एवं होली की पोटली’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुस्लिम महिलाओं ने रंगों और गुलाल के साथ होली खेलकर समाज को यह संदेश दिया कि प्रेम और सौहार्द से बड़ी कोई शक्ति नहीं होती।

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रंगों में घुला भाईचारा

कार्यक्रम स्थल पर ढोल की थाप गूंजती रही, होली के पारंपरिक गीतों पर महिलाएं झूमती नजर आईं और चारों ओर उड़ते गुलाल ने वातावरण को पूरी तरह उत्सवमय बना दिया। हिंदू और मुस्लिम महिलाओं ने एक-दूसरे के चेहरे पर अपने हाथों से गुलाल लगाया और गले मिलकर आपसी सद्भाव का परिचय दिया।

महिलाओं का कहना था कि भारत की संस्कृति रंगों की होली खेलकर गले मिलने और रिश्तों को मजबूत करने का संदेश देती है। उनका मानना है कि यदि दुनिया के विभिन्न देश नफरत और हिंसा की जगह प्रेम और भाईचारे को अपनाएं, तो कई संघर्ष स्वतः समाप्त हो सकते हैं।

मुख्य अतिथि ने बांटी होली की पोटलियां

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बड़का हनुमान जी आश्रम के पीठाधीश्वर पंडित रिंकू महाराज ने अनाज बैंक की ओर से 300 बांसफोर, नट, मुसहर और मुस्लिम परिवारों की महिलाओं को होली की पोटली और साड़ियां वितरित कीं। इन पोटलियों में त्योहार से जुड़ी आवश्यक सामग्री दी गई, जिससे जरूरतमंद परिवार भी होली की खुशियों में शामिल हो सकें।

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उन्होंने कहा कि त्योहार समाज को जोड़ने का माध्यम होते हैं। जब अलग-अलग समुदाय मिलकर उत्सव मनाते हैं, तो सामाजिक समरसता मजबूत होती है और आपसी विश्वास बढ़ता है।

नाज़नीन अंसारी का संदेश

इस अवसर पर मुस्लिम महिलाओं की प्रमुख नेता और ‘हनुमान चालीसा फेम’ नाज़नीन अंसारी ने कहा कि भारत में रहना सौभाग्य की बात है, क्योंकि यहां की संस्कृति प्रेम, एकता और भाईचारे पर आधारित है।

उन्होंने कहा कि हिंसा, कट्टरता और नफरत ने दुनिया को केवल आतंक और अशांति दी है। रंगों की होली प्रेम और अपनत्व का प्रतीक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि त्योहारों का असली उद्देश्य दिलों को जोड़ना है, न कि बांटना।

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सामाजिक समरसता की मिसाल

कार्यक्रम में शामिल महिलाओं ने कहा कि वे समाज को यह संदेश देना चाहती हैं कि धर्म के नाम पर फैल रही कट्टरता और वैमनस्य को समाप्त करने का एकमात्र रास्ता आपसी संवाद और प्रेम है।

काशी की इस पहल को सामाजिक सौहार्द और सांप्रदायिक एकता की एक सकारात्मक मिसाल के रूप में देखा जा रहा है। ऐसे समय में जब वैश्विक स्तर पर तनाव और संघर्ष की खबरें सुर्खियों में हैं, तब वाराणसी से निकला यह संदेश बताता है कि शांति की शुरुआत समाज के भीतर से ही होती है।

रंगों से सजी इस होली ने यह साबित कर दिया कि प्रेम, विश्वास और भाईचारे के रंग किसी भी नफरत से कहीं अधिक गहरे और स्थायी होते हैं।