ज़करिया स्ट्रीट की रौनक: कोलकाता में रमज़ान का जश्न और जायकों की महफ़िल

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 16-02-2026
The splendor of Zakaria Street: Ramadan celebrations and a feast of flavours in Kolkata
The splendor of Zakaria Street: Ramadan celebrations and a feast of flavours in Kolkata

 

जावेद अख्तर I कोलकाता

रमज़ान 2026 का पाक महीना अब बस कुछ ही कदम दूर है, और कोलकाता की गलियाँ, बाज़ार और मोहल्ले पहले ही इस पवित्र माह की रौनक से जगमगा उठे हैं। विशेषकर शहर के मुस्लिम बहुल इलाकों में तैयारियाँ अपने चरम पर हैं, जहां दुकानदार अपनी दुकानों में रमज़ान की खरीददारी के लिए सामान भर चुके हैं। लेकिन इस बार की तैयारियाँ केवल बाजारों तक सीमित नहीं हैं। शहर की ‘सिटी ऑफ़ जॉय’ का यह महीना हर धर्म और समुदाय के लोगों को एकसाथ लाने वाला प्रतीक बन गया है।

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कोलकाता में ज़करिया स्ट्रीट, न्यू मार्केट, कोलु टोला, पार्क सर्कस, राजा बाजार और मेटियाब्रूज जैसे इलाकों में रमज़ान के दौरान दिन-रात की रौनक देखने लायक होती है। दिन इबादत और सजग तैयारी में गुजरता है, तो रात को लोग खरीदारी और व्यंजनों के मज़े लेने में जुट जाते हैं। खासकर ज़करिया स्ट्रीट, जिसे शहर का ‘फूड पैराडाइज’ कहा जाता है, इस पवित्र महीने में पूरी तरह जीवित हो उठती है।

ज़करिया स्ट्रीट की सबसे बड़ी पहचान यहाँ स्थित ऐतिहासिक नाख़ुदा मस्जिद है। लाल पत्थरों से बनी इस भव्य मस्जिद की वास्तुकला मुगल कालीन शैली की याद दिलाती है और रमज़ान में यहाँ सामूहिक इफ्तार का दृश्य देखने योग्य होता है। हजारों लोग एक साथ दस्तरख्वान पर बैठते हैं, और यह दृश्य शहर की ‘गंगा-जमुनी तहज़ीब’ और आपसी भाईचारे का सबसे बड़ा प्रमाण बन जाता है।

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रमज़ान के दौरान ज़करिया स्ट्रीट धुएँ और खुशबुओं के समंदर में डूब जाती है। शाम के समय यहाँ के कवाब, हलीम, मिठाइयाँ और इफ्तारी व्यंजन केवल स्थानीय लोगों के लिए ही नहीं, बल्कि पर्यटकों और फूड ब्लॉगर्स के लिए भी आकर्षण का केंद्र बन जाते हैं।

प्रसिद्ध होटलों में ‘आदम कवाब शॉप’ की सुतली कवाब, ‘सूफिया’ का हलीम और ताफ़तान, ‘दिल्ली 6’ का अफगानी चिकन, और ‘हाजी अलाउद्दीन’ के शाही टुकड़ा व गोंद के लड्डू पूरे बंगाल में मशहूर हैं। इन व्यंजनों की खासियत उनका पारंपरिक स्वाद और बनाए जाने का अनोखा तरीका है।

उदाहरण के लिए, ‘आदम के सुतली कवाब’ को कच्चे पपीते और गुप्त मसालों के साथ इतना गलाया जाता है कि ये सीख पर टिक नहीं पाते। इन्हें गिरने से बचाने के लिए बारीक धागा यानी सुतली बांध दी जाती है। पहला निवाला लेते ही स्वाद के एक अलग ही संसार में पहुँचने का अनुभव होता है।

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टोपियों के खरीद

लेकिन इस बार की रमज़ान तैयारियों में महंगाई ने अपने साये डाल दिए हैं। फल, खजूर, केला, तरबूज और सेब की कीमतें पिछले साल की तुलना में 30से 40प्रतिशत बढ़ चुकी हैं। खाद्य तेल, दालें, मसाले और मांस के बढ़ते दाम मध्यम और निम्न वर्ग के परिवारों की कमर तोड़ रहे हैं। इस वजह से लोग अपनी पसंद के व्यंजनों में कटौती करने पर मजबूर हैं। जो हलीम और कवाब कभी हर आम और खास की पहुँच में थे, अब उनकी पहुँच केवल तैयार बजट तक ही सीमित रह गई है।

इस महंगाई के बावजूद ज़करिया स्ट्रीट की गलियाँ और होटलों की चहल-पहल कम नहीं हुई है। दुकानदार स्टॉक भरने और ग्राहकों को आकर्षित करने में जुटे हैं, तो खरीददार सस्ते और अच्छे माल की तलाश में बाजार और ऑनलाइन प्लेटफार्मों का रुख कर रहे हैं। पंद्रह रमज़ान तक होलसेल वालों की सप्लाई अपने चरम पर होती है, जिसके बाद बाकी का माल आधे रमज़ान तक पहुंचा दिया जाता है।

कोलकाता के रमज़ान का यह माहौल केवल खरीददारी और व्यंजनों तक सीमित नहीं है। यह शहर की रूहानी पहचान और सांस्कृतिक विविधता को भी दर्शाता है। नूर-ए-बसीरत और रहमतों के इस महीने में गलियाँ इबादत की खुशबू और इफ्तारी के जायकों से महक उठती हैं।

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नाखुदा मस्जिद के बाहर बढ़ी रौनक

ज़करिया स्ट्रीट और नाख़ुदा मस्जिद के इर्द-गिर्द का इलाका इस पवित्र महीने में एक विशाल मेले में तब्दील हो जाता है। यहाँ कपड़े, इत्र, टोपी और जूते के सैकड़ों अस्थाई स्टॉल लगते हैं और लोग सहरी तक खरीदारी करते नजर आते हैं।

रमज़ान केवल मुसलमानों का त्योहार नहीं है। ज़करिया स्ट्रीट पर शाम होते ही हर धर्म और समुदाय के लोग,चाहे बंगाली हिंदू हों, मारवाड़ी हों या एंग्लो-इंडियन—खुशी-खुशी इफ्तारी के व्यंजनों का आनंद लेने आते हैं। यह कोलकाता की कॉस्मोपॉलिटन संस्कृति और ‘गंगा-जमुनी तहज़ीब’ का जीवंत प्रमाण है। लोग अपने दोस्तों और परिवार के साथ व्यंजन साझा करते हैं, एक-दूसरे के साथ मुस्कुराहट और भाईचारे की भावना कायम रखते हैं।

स्थानीय प्रशासन और सरकार को भी आवश्यक है कि वे बाज़ारों में कीमतों पर नियंत्रण रखें। जमाखोरों और मुनाफाखोरों पर कड़ी कार्रवाई हो, ताकि इस पवित्र महीने की खुशियाँ समाज के हर वर्ग तक बिना आर्थिक बोझ के पहुँच सकें।

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जकरिया स्ट्रीट में रमजान को लेकर भीड़-भाड़ का नजारा

कोलकाता की रमज़ान मार्केट, खासकर ज़करिया स्ट्रीट की ऐतिहासिक गलियाँ, हर साल इस उम्मीद में जगमगाती हैं कि यहाँ आने वाला हर शख्स तृप्ति और मुस्कुराहट के साथ घर लौटे। महंगाई ने भले ही जेब पर बोझ डाला हो, लेकिन लोगों की आस्था, भाईचारे और समाज सेवा की भावना को कम नहीं कर पाई। रमज़ान के इस पवित्र माह में ज़करिया स्ट्रीट शहर की आत्मा का प्रतीक बनकर हर किसी के दिल में रौनक भरती है।