धर्म से ऊपर इंसानियत: मुस्लिम परिवार ने 325 गज जमीन देकर मंदिर निर्माण का मार्ग किया प्रशस्त

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 14-02-2026
Humanity above religion: Muslim family donates 325 yards of land to pave the way for temple construction
Humanity above religion: Muslim family donates 325 yards of land to pave the way for temple construction

 

आवाज़ द वॉयस/नई दिल्ली

जब देश के कई हिस्सों में धर्म के नाम पर विभाजन की राजनीति तेज होती दिखाई देती है, ऐसे समय में पंजाब के मोहाली जिले से आई एक खबर ने उम्मीद की रोशनी जगा दी है। झामपुर इलाके में एक मुस्लिम परिवार ने मंदिर निर्माण के लिए अपनी 325 गज निजी जमीन दान कर न केवल आपसी सौहार्द की मिसाल पेश की है, बल्कि यह भी साबित किया है कि इंसानियत की जड़ें अभी भी इस मिट्टी में गहरी हैं।

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इस जमीन की अनुमानित कीमत करीब 80 लाख रुपये बताई जा रही है। दान करने वाले युवा कारोबारी मोहम्मद इमरान उर्फ हैप्पी मलिक ने सिर्फ जमीन ही नहीं दी, बल्कि मंदिर निर्माण का पूरा खर्च स्वयं उठाने की भी घोषणा की है। उनका यह कदम ऐसे समय में सामने आया है, जब समाज में धार्मिक ध्रुवीकरण की चर्चाएं आम हैं।

इमरान हैप्पी, जो पेशे से रियल एस्टेट कारोबारी हैं और मात्र 37 वर्ष के हैं, बताते हैं कि स्थानीय हिंदू समुदाय के पास मंदिर निर्माण के लिए पर्याप्त जमीन उपलब्ध नहीं थी। जब उन्हें इस स्थिति की जानकारी मिली तो उन्होंने पंजाब के शाही इमाम मौलाना मोहम्मद उस्मान रहमानी लुधियानवी से संपर्क कर मार्गदर्शन मांगा। शाही इमाम ने सकारात्मक रुख अपनाते हुए कहा कि यदि इस्लामी देशों में गैर-मुस्लिमों के पूजा स्थलों का सम्मान किया जाता है, तो भारत जैसे बहुलतावादी देश में भी ऐसा होना स्वाभाविक और आवश्यक है।

12 फरवरी को शाही इमाम की मौजूदगी में जमीन की रजिस्ट्री के कागजात विधिवत रूप से सनातन धर्म सभा झामपुर को सौंपे गए। इसके बाद हवन-यज्ञ कर निर्माण कार्य की शुरुआत की गई। यहां हनुमान जी का मंदिर और सनातन धर्म मंदिर बनाया जाएगा। कार्यक्रम में स्थानीय समुदाय के लोग बड़ी संख्या में उपस्थित रहे और इसे भाईचारे की ऐतिहासिक पहल बताया।

शाही इमाम मौलाना उस्मान लुधियानवी ने इस अवसर पर कहा कि पंजाब की मिट्टी में सदियों से भाईचारा और मेल-मिलाप की परंपरा रही है। उन्होंने याद दिलाया कि हाल ही में दो हिंदू भाइयों और एक बुजुर्ग सिख महिला ने मस्जिद निर्माण के लिए जमीन दान की थी। अब एक मुस्लिम युवक द्वारा मंदिर के लिए जमीन देना यह दर्शाता है कि समाज की जड़ें नफरत से नहीं, बल्कि पारस्परिक सम्मान से सींची जाती हैं।

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इमरान हैप्पी ने अपने संबोधन में कहा कि यह कदम किसी दिखावे या प्रचार के लिए नहीं है, बल्कि दिल से निकला निर्णय है। उनका मानना है कि यदि समाज में परस्पर सम्मान और सहयोग की भावना मजबूत होगी, तो किसी भी तरह की कटुता टिक नहीं पाएगी। उन्होंने कहा कि इससे पहले वे मस्जिद और चर्च के लिए भी जमीन उपलब्ध करा चुके हैं। उनका संदेश साफ है—“इंसानियत धर्म से ऊपर है।”

उनकी इस पहल में उनके मित्र संजय जिंदल भी सहयोग कर रहे हैं। इमरान ने बताया कि उनका सपना भविष्य में एक ऐसा अस्पताल खोलने का है, जहां गरीब और जरूरतमंद लोगों को सस्ती या मुफ्त चिकित्सा सुविधा मिल सके। वे अपने परिवार के साथ रहते हैं—उनकी माता, पत्नी और बच्चे हैं, और दिवंगत भाई के बच्चे भी उनके संरक्षण में हैं।

सनातन धर्म सभा झामपुर की ओर से पंडित राजाराम, अध्यक्ष हरप्रीत सिंह गिल और रूबी सिद्धू ने मोहम्मद इमरान और शाही इमाम का सार्वजनिक रूप से सम्मान किया। पंडित राजाराम ने कहा कि इतनी बड़ी कीमत की जमीन दान करना आसान नहीं होता। यह इमरान की नीयत और उनके परिवार के संस्कारों का प्रमाण है।

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह याद दिलाया है कि भारत की पहचान विविधता में एकता है। यहां अलग-अलग धर्म, भाषाएं और संस्कृतियां होने के बावजूद साझा विरासत और परस्पर सम्मान की परंपरा सदियों से कायम है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की पहलें समाज में फैले अविश्वास को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। जब आम नागरिक अपने स्तर पर संवाद और सहयोग का रास्ता अपनाते हैं, तो राजनीतिक और सामाजिक तनाव स्वतः कम हो सकते हैं।

पंजाब की इस घटना ने यह संदेश दिया है कि धार्मिक पहचान के आधार पर दीवारें खड़ी करने की कोशिशें भले जारी हों, लेकिन जमीन पर आम लोग आज भी मेल-मिलाप और भाईचारे को प्राथमिकता देते हैं। यह पहल न केवल मोहाली या पंजाब के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

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आज जब सोशल मीडिया और राजनीतिक विमर्श में विभाजन की आवाजें अक्सर तेज सुनाई देती हैं, तब झामपुर की यह कहानी एक सुकूनभरी हवा की तरह है। यह बताती है कि संवाद, विश्वास और परस्पर सम्मान ही समाज को स्थिर और मजबूत बनाते हैं।

मोहम्मद इमरान हैप्पी का यह कदम केवल जमीन दान करने का मामला नहीं है; यह उस सोच का प्रतीक है, जो मानती है कि राष्ट्र की मजबूती विविधताओं को साथ लेकर चलने में है। पंजाब की यह मिसाल आने वाले समय में शायद और भी लोगों को प्रेरित करे कि वे धर्म से ऊपर उठकर इंसानियत को प्राथमिकता दें।