बुर्के में कांवड़: सौहार्द की मिसाल बनी तमन्ना

Story by  ओनिका माहेश्वरी | Published by  onikamaheshwari | Date 14-02-2026
An example of Ganga-Jamuni culture: Tamannaah leaves Haridwar carrying a Kanwar, a caravan of brotherhood grows with chants of 'Bol Bhole'.
An example of Ganga-Jamuni culture: Tamannaah leaves Haridwar carrying a Kanwar, a caravan of brotherhood grows with chants of 'Bol Bhole'.

 

ओनिका माहेश्वरी/ नई दिल्ली  

उत्तर प्रदेश की सरज़मीं पर एक बार फिर सामाजिक और धार्मिक सौहार्द की ऐसी तस्वीर उभरी, जिसने लोगों को ठहरकर सोचने पर मजबूर कर दिया। संभल जनपद की रहने वाली तमन्ना मलिक जब बुर्का पहनकर हरिद्वार से कांवड़ लेकर अपने गांव की ओर रवाना हुईं, तो यह सिर्फ एक धार्मिक यात्रा नहीं रही—यह गंगा-जमुनी तहज़ीब, सामाजिक समरसता और पारस्परिक सम्मान का जीवंत प्रतीक बन गई।

हरिद्वार से शुरू हुआ आस्था और सद्भाव का सफर

पवित्र नगरी Haridwar से कांवड़ में गंगाजल भरकर निकली तमन्ना मलिक अपने साथ सैकड़ों शिवभक्तों के समूह में शामिल हैं। उनके कदमों के साथ “बोल भोले” और “हर हर महादेव” के जयकारे गूंजते रहे। बुर्का पहने एक महिला को कांवड़ यात्रा में देख लोगों में कौतूहल जरूर हुआ, लेकिन कुछ ही पलों में वह कौतूहल सम्मान और स्वागत में बदल गया।

तमन्ना ने बताया कि यह निर्णय उन्होंने अपनी इच्छा और आस्था से लिया। उनके पति अमन त्यागी और परिवार ने इस फैसले में पूरा साथ दिया। उनका कहना है कि “आस्था का संबंध दिल से होता है, पहचान से नहीं।”

बिजनौर में फूलों की वर्षा, मंदिर में मिला सम्मान

जब यह कांवड़ यात्रा बिजनौर जिले के नूरपुर, फीना और रतनगढ़ कस्बों से गुज़री, तो स्थानीय लोगों ने तमन्ना का स्वागत फूल-मालाओं से किया। नूरपुर में महिलाओं ने उन्हें एक मंदिर में विश्राम के लिए रोका। वहां उनके ऊपर फूल बरसाए गए, मालाएं पहनाई गईं और लोगों ने उनके साथ तस्वीरें भी खिंचवाईं।

हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता यात्रा के साथ चलते रहे ताकि किसी तरह की असुविधा न हो। पुलिस प्रशासन भी पूरे मार्ग में सक्रिय रहा और कांवड़ियों को सुरक्षित आगे बढ़ाता रहा। यह दृश्य अपने आप में सामाजिक विश्वास और पारस्परिक सहयोग का संदेश दे रहा था।

संभल की बेटी, सौहार्द की प्रतीक

तमन्ना मलिक संभल जनपद के असमोली क्षेत्र के गांव बदनपुर बस्सी की निवासी हैं। उन्होंने बताया कि कुछ समय पहले उन्होंने गांव के पास रहने वाले अमन त्यागी से विवाह किया और अब अपने पति के साथ रह रही हैं। विवाह के बाद उन्होंने दोनों परिवारों की परंपराओं और मान्यताओं का सम्मान करना सीखा।

उनके साथ संभल जनपद के 100 से अधिक शिवभक्त कांवड़ लेकर चल रहे हैं। रास्ते में जहां-जहां से यह यात्रा गुजरती है, वहां लोगों की भीड़ उमड़ पड़ती है। लोग तमन्ना को देखने, उनसे मिलने और उनका हौसला बढ़ाने के लिए आगे आते हैं।

गंगा-जमुनी संस्कृति की सजीव झलक

उत्तर प्रदेश की पहचान लंबे समय से गंगा-जमुनी तहज़ीब के रूप में रही है—जहां अलग-अलग धर्मों और परंपराओं के लोग एक-दूसरे की आस्था का सम्मान करते हैं। तमन्ना की कांवड़ यात्रा इसी साझा विरासत की नई और सशक्त मिसाल बनकर सामने आई है।

कांवड़ यात्रा परंपरागत रूप से भगवान शिव को समर्पित होती है। सावन और महाशिवरात्रि जैसे अवसरों पर लाखों श्रद्धालु गंगाजल लेकर अपने-अपने क्षेत्रों के शिव मंदिरों में जलाभिषेक करते हैं। इस यात्रा में अनुशासन, भक्ति और सामूहिकता का विशेष महत्व होता है। तमन्ना की भागीदारी ने इस धार्मिक आयोजन को सामाजिक सौहार्द के संदेश से भी जोड़ दिया है।

परिवार की सहमति और समाज का समर्थन

तमन्ना के पति अमन त्यागी पूरी यात्रा में उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह उनकी पत्नी की श्रद्धा है और परिवार ने मिलकर इसका सम्मान किया है। दोनों परिवारों की सहमति से लिया गया यह निर्णय समाज में सकारात्मक संकेत दे रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं समाज को जोड़ने का काम करती हैं। जब लोग एक-दूसरे की आस्था का सम्मान करते हैं, तो सामाजिक दूरी अपने आप कम हो जाती है।

महाशिवरात्रि पर होगा जलाभिषेक

तमन्ना अब संभल पहुंचकर महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर भगवान शिव के मंदिर में जल अर्पित करेंगी। लेकिन उससे पहले ही उनकी यह यात्रा चर्चा का विषय बन चुकी है।

यह कांवड़ यात्रा सिर्फ गंगाजल लेकर चलने की परंपरा नहीं, बल्कि दिलों को जोड़ने की पहल भी बन गई है। तमन्ना मलिक की यह पहल बताती है कि जब आस्था, सम्मान और प्रेम साथ चलते हैं, तो समाज में सौहार्द और एकता की नई राह बनती है।

आज जब समाज को सकारात्मक उदाहरणों की आवश्यकता है, तब तमन्ना की यह यात्रा एक संदेश देती है—धर्म का सार विभाजन नहीं, बल्कि मानवता और भाईचारा है। यही है असली गंगा-जमुनी तहज़ीब, जो सदियों से इस धरती की पहचान रही है।