भक्ति चालक / मुंबई
मुंबई महानगर के बाहरी हिस्से में स्थित मुंब्रा-कौसा को अक्सर उसकी जनसंख्या संरचना के संदर्भ में देखा जाता है। यह इलाका मुस्लिम बहुल है और यहाँ उर्दू माध्यम के स्कूलों की बड़ी संख्या है। वर्षों से यह धारणा बनाई जाती रही कि यहाँ के छात्रों को मराठी भाषा सीखने में कठिनाई होती है, और कुछ लोगों ने तो यह तक मान लिया कि मुस्लिम समुदाय मराठी को सहजता से आत्मसात नहीं कर पाता। लेकिन हाल के दिनों में एक पहल ने इस सोच को चुनौती दी है और यह संदेश दिया है कि भाषा किसी एक समुदाय की बपौती नहीं, बल्कि साझा सांस्कृतिक विरासत है।

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार समूह) की नव निर्वाचित पार्षद मारज़िया शानू पठान ने मुंब्रा-कौसा क्षेत्र में उर्दू भाषी छात्रों के लिए विशेष मराठी भाषा शिविर आयोजित कर एक नई शुरुआत की है। उनका स्पष्ट मानना है कि मराठी राज्यभाषा है और महाराष्ट्र में रहने वाले हर नागरिक को इसे जानना और समझना चाहिए। यह पहल केवल भाषा सिखाने का प्रयास नहीं, बल्कि आत्मविश्वास जगाने और सामाजिक दूरी कम करने की दिशा में उठाया गया कदम है।
कक्षा 10 के विद्यार्थियों को ध्यान में रखते हुए आयोजित इस शिविर का मुख्य उद्देश्य बोर्ड परीक्षा से पहले मराठी विषय को लेकर उनके मन में बैठी आशंकाओं को दूर करना था। अक्सर देखा गया है कि उर्दू माध्यम से पढ़ने वाले छात्र मराठी व्याकरण, लेखन और पाठ समझने में कठिनाई महसूस करते हैं। परीक्षा का पहला प्रश्नपत्र मराठी का होने के कारण छात्रों में अतिरिक्त दबाव रहता है। इसी दबाव को कम करने और उन्हें बेहतर तैयारी का अवसर देने के लिए यह विशेष सत्र आयोजित किया गया।
शिविर को मिली प्रतिक्रिया आयोजकों की अपेक्षा से कहीं अधिक रही। पार्षद मारज़िया के अनुसार, उन्होंने अनुमान लगाया था कि लगभग 200 से 500 विद्यार्थी ही इसमें भाग लेंगे, लेकिन 2000 से अधिक छात्र-छात्राएँ पहुँचे। कार्यक्रम स्थल की तीनों मंजिलें विद्यार्थियों से भर गईं। इतना ही नहीं, कई ऐसे छात्र भी शामिल हुए जिन्होंने पूर्व पंजीकरण नहीं कराया था, पर सीखने की इच्छा के कारण वे पहुँच गए। आयोजकों ने उन्हें भी अवसर दिया, ताकि कोई भी छात्र वंचित न रहे।
इस शिविर में अनुभवी शिक्षकों को आमंत्रित किया गया, जिन्होंने सरल और व्यवहारिक तरीके से मराठी व्याकरण, निबंध लेखन, पत्र लेखन और पाठ विश्लेषण की बारीकियाँ समझाईं। छात्रों के साथ संवादात्मक सत्र आयोजित किए गए, जिनमें उनकी शंकाओं का समाधान किया गया। शिक्षकों ने उदाहरणों और अभ्यास के माध्यम से विषय को आसान बनाया। कई छात्रों ने बताया कि पहली बार उन्हें मराठी विषय इतना सहज लगा।
दिलचस्प बात यह रही कि इस शिविर में केवल मुंब्रा-कौसा ही नहीं, बल्कि कुर्ला, डोंबिवली और अन्य क्षेत्रों से भी विद्यार्थी आए। इनमें कुछ मराठी भाषी छात्र भी शामिल थे, जो अपने लेखन कौशल को बेहतर बनाना चाहते थे। यह दृश्य इस बात का प्रतीक था कि भाषा सीखने की इच्छा किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं होती।
मारज़िया शानू पठान ने इस पहल के पीछे अपनी सोच साझा करते हुए कहा कि शिक्षा क्षेत्र में काम करना उनकी प्राथमिकता रही है। पिछले वर्ष भी बोर्ड परीक्षाओं से पहले विज्ञान, गणित और मराठी विषयों पर मार्गदर्शन सत्र आयोजित किए गए थे, हालांकि उस समय तैयारी के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाया था। इस बार उन्होंने व्यवस्थित योजना के साथ कार्यक्रम आयोजित किया, ताकि अधिक से अधिक छात्र लाभान्वित हो सकें।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मराठी राज्यभाषा है और इसे जानना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। उनका मानना है कि भाषा सीखने से न केवल परीक्षा में मदद मिलती है, बल्कि रोजगार और सामाजिक संवाद के अवसर भी बढ़ते हैं। मुंब्रा जैसे क्षेत्र के छात्रों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए भाषा दक्षता एक महत्वपूर्ण माध्यम हो सकती है।
विद्यार्थियों को प्रेरित करने के लिए उन्होंने प्रोत्साहन और पुरस्कार की भी घोषणा की। कक्षा 10 में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्रों को एमएसपी केयर फाउंडेशन द्वारा सम्मानित किया जाएगा। उन्हें सार्वजनिक रूप से सराहा जाएगा, उपहार दिए जाएंगे और आगे की पढ़ाई के लिए मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य केवल अंक बढ़ाना नहीं, बल्कि छात्रों में आत्मविश्वास और प्रतिस्पर्धा की स्वस्थ भावना विकसित करना है।
शिविर के दौरान छात्रों को ईमानदारी और मेहनत का महत्व भी समझाया गया। मारज़िया ने उन्हें प्रेरक फिल्मों और उदाहरणों के माध्यम से संदेश दिया कि नकल या शॉर्टकट से मिली सफलता स्थायी नहीं होती। उन्होंने कहा कि परीक्षा जीवन का केवल एक पड़ाव है, लेकिन चरित्र और मेहनत ही दीर्घकालिक सफलता की कुंजी है।
परीक्षा के बाद एक बड़े करियर मार्गदर्शन कार्यक्रम की भी योजना है। मारज़िया का कहना है कि हर वर्ष वह करियर गाइडेंस कार्यक्रम आयोजित करती रही हैं, लेकिन इस बार इसे और व्यापक रूप दिया जाएगा। विशेषज्ञों को बुलाकर छात्रों को विभिन्न क्षेत्रों इंजीनियरिंग, मेडिकल, प्रशासनिक सेवाओं, मीडिया और तकनीक के बारे में जानकारी दी जाएगी, ताकि वे अपनी रुचि और क्षमता के अनुसार निर्णय ले सकें।
एमएसपी केयर फाउंडेशन, जो शहर में कई सामाजिक मुद्दों पर काम करता है, विशेष रूप से शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय है। चुनाव जीतने के बाद शिक्षा क्षेत्र में यह उनका पहला बड़ा कार्यक्रम था। मारज़िया ने आश्वासन दिया है कि आने वाले दिनों में वह स्वयं स्कूलों का दौरा करेंगी और यह सुनिश्चित करेंगी कि पढ़ाई सुचारु रूप से चल रही है। एक जनप्रतिनिधि के रूप में वह शिक्षा से जुड़े मामलों में सक्रिय हस्तक्षेप करना अपना दायित्व मानती हैं।
मुंब्रा-कौसा जैसे क्षेत्रों में अक्सर शिक्षा और भाषा को लेकर पूर्वाग्रह पैदा किए जाते हैं। लेकिन इस पहल ने यह साबित किया है कि अवसर और सही मार्गदर्शन मिलने पर छात्र किसी भी चुनौती का सामना कर सकते हैं। मराठी भाषा शिविर केवल परीक्षा की तैयारी का साधन नहीं रहा, बल्कि यह सामाजिक समावेशन और आत्मविश्वास निर्माण की दिशा में एक सकारात्मक कदम साबित हुआ है।
भाषा के माध्यम से समाज को जोड़ने का यह प्रयास भविष्य में किस रूप में आगे बढ़ेगा, यह समय बताएगा, लेकिन फिलहाल इतना स्पष्ट है कि मुंब्रा में मराठी को लेकर जागरूकता की नई लहर शुरू हो चुकी है। यह पहल इस बात का संकेत है कि शिक्षा और संवाद के माध्यम से किसी भी तरह की दूरी को कम किया जा सकता है, बशर्ते नीयत स्पष्ट और प्रयास ईमानदार हो।