गुलाम कादिर
हज का सफर हर मुसलमान के लिए जिंदगी की सबसे बड़ी तमन्ना होता है। लेकिन लाखों की भीड़, तपती धूप और कठिन रास्तों के बीच इस इबादत को पूरा करना किसी चुनौती से कम नहीं रहा है। इस बार यानी हज 2026में तस्वीर पूरी तरह बदली हुई नजर आने वाली है। सऊदी अरब ने इस साल के हज को अब तक का सबसे आधुनिक, सुरक्षित और सुव्यवस्थित बनाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे तनाव के कारण खाड़ी देशों में जो हालात हैं, उन्हें देखते हुए भी इस बार की सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य बनाया जा रहा है।

इस बार की सबसे बड़ी खबर तकनीक है। सऊदी सरकार ने इस बार एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इलेक्ट्रॉनिक ट्रैकिंग सिस्टम को अपना हथियार बनाया है। इसका मकसद सिर्फ भीड़ को रोकना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि हर हाजी बिना किसी परेशानी के अपनी इबादत पूरी कर सके। मक्का की मस्जिद अल-हरम में तवाफ और सई के दौरान भीड़ को संभालना हमेशा से सबसे मुश्किल काम रहा है। लेकिन अब श्रद्धालुओं को परेशान होने की जरूरत नहीं है।
सरकार ने एक 'लाइव भीड़ ट्रैकर' लॉन्च किया है। अब आप मस्जिद के मुख्य हिस्सों में जाने से पहले अपने मोबाइल पर देख पाएंगे कि अंदर कितनी भीड़ है। इसके लिए एक बहुत ही आसान 'कलर कोड' सिस्टम बनाया गया है। अगर मोबाइल पर हरा रंग दिख रहा है, तो मतलब भीड़ कम है। पीला रंग मध्यम भीड़ को दर्शाता है और लाल रंग का मतलब है कि वहां इस वक्त बहुत ज्यादा भीड़ है। इस तकनीक से हाजियों को यह फायदा होगा कि वे भीड़भाड़ वाले वक्त में जाने से बच सकेंगे और शांति से इबादत कर पाएंगे।
यह पूरी व्यवस्था मस्जिद अल-हरम और मस्जिद-ए-नबवी के सामान्य प्राधिकरण द्वारा संचालित की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि इस डिजिटल सेवा का मकसद प्रतीक्षा समय को कम करना और पैदल चलने वालों के रास्ते को सुगम बनाना है। यह सब कुछ लाइव डेटा के आधार पर काम करेगा। यानी हर पल की जानकारी एकदम सटीक होगी।

हज 2026 की एक और बड़ी खासियत 'इलेक्ट्रॉनिक पिलग्रिम ट्रैकिंग सिस्टम' है। पहली बार मीना के शिविरों (कैंपों) के अंदर और बाहर तीर्थयात्रियों की आवाजाही पर नजर रखने के लिए एक डिजिटल सिस्टम लगाया गया है। यह सिस्टम देखेगा कि कौन सा जत्था कब कैंप से निकल रहा है और कब वापस आ रहा है। कैंपों के एंट्री और एग्जिट गेट पर बड़े-बड़े डिजिटल साइनबोर्ड लगाए गए हैं। इन पर न केवल आने-जाने का समय लिखा होगा, बल्कि हाजियों के लिए उनकी अपनी भाषा में निर्देश भी दिए जाएंगे।
दो पवित्र मस्जिदों के धार्मिक मामलों के प्रमुख, शेख डॉ. अब्दुल रहमान अल-सुदैस ने इस बार के ऑपरेशनल प्लान को एक 'बड़ी छलांग' बताया है। इस बार का प्लान 60अलग-अलग भाषाओं को कवर कर रहा है।
सऊदी अरब ने इस साल को 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का वर्ष' घोषित किया है। अल-सुदैस का कहना है कि एआई के इस्तेमाल से धार्मिक सेवाओं में जो सुधार आएगा, वह ऐतिहासिक होगा। उनका मानना है कि तकनीक का इस्तेमाल केवल व्यवस्था के लिए नहीं, बल्कि पैगंबर की करुणा और शिक्षाओं को सुलभ बनाने के लिए किया जा रहा है।
हज के दौरान एक और बड़ी जिम्मेदारी 'हदी और अदाही' प्रोजेक्ट की होती है। यह प्रोजेक्ट कुर्बानी के जानवरों की व्यवस्था और उनके प्रबंधन का काम देखता है। यह काम लॉजिस्टिक्स के लिहाज से बहुत भारी होता है।

इस साल सऊदी मंत्रिपरिषद ने एक बड़ा फैसला लिया है। सरकार इस प्रोजेक्ट में काम करने वाले मौसमी मजदूरों के अस्थायी वर्क वीजा का पूरा खर्च खुद उठाएगी। इन मजदूरों को अपनी जेब से वीजा फीस नहीं देनी होगी। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि कुर्बानी की पूरी प्रक्रिया बिना किसी बाधा के पूरी हो सके।
मक्का शहर और पवित्र स्थलों के लिए रॉयल कमीशन ने भी अपनी तैयारियां पूरी कर ली हैं। 'मीकात' यानी वे एंट्री पॉइंट्स जहां से हाजी अपना सफर शुरू करते हैं, वहां भी ऑपरेशनल सिस्टम को अपग्रेड कर दिया गया है। 1447 हिजरी का यह हज प्लान अब तक का सबसे विस्तृत और व्यापक प्लान माना जा रहा है।
तकनीक के इस दखल से न केवल भीड़ को मैनेज करना आसान होगा, बल्कि किसी भी आपातकालीन स्थिति में हाजियों तक पहुंचना भी तेज होगा। सऊदी अरब पिछले कई सालों से धीरे-धीरे एआई का दायरा बढ़ा रहा था, लेकिन इस साल इसे पूरी तरह से लागू कर दिया गया है। यह उन बुजुर्ग हाजियों के लिए भी बड़ी राहत की बात है जो भीड़ में अक्सर घबरा जाते थे। अब वे डिजिटल स्क्रीन और ट्रैकिंग की मदद से सुरक्षित महसूस करेंगे।
कुल मिलाकर, हज 2026 एक डिजिटल क्रांति का गवाह बनने जा रहा है। जहाँ आस्था पुरानी है, वहीं रास्ते नए और स्मार्ट हैं। मकसद सिर्फ एक ही है कि अल्लाह के घर आने वाला हर मेहमान सुकून के साथ अपनी इबादत पूरी कर सके और अपने वतन खुशियों के साथ वापस लौटे। तकनीक ने इस पवित्र यात्रा को और भी शांतिपूर्ण और यादगार बनाने का जिम्मा उठा लिया है।