शिया हस्तियां जिन्होंने भारत को दुनिया में दिलाई पहचान

Story by  फिरदौस खान | Published by  [email protected] | Date 06-07-2026
Prominent figures of the Shia community in India. AI image
Prominent figures of the Shia community in India. AI image

 

-डॉ. फ़िरदौस ख़ान  

हिन्दुस्तान में शिया समुदाय का समृद्ध व गौरवशाली इतिहास रहा है। कला, संस्कृति, साहित्य, शिक्षा, तकनीकी, स्वास्थ्य और उद्योग आदि से लेकर राजनीति में भी उन्होंने अपनी एक अलग पहचान क़ायम की है। ये फ़ेहरिस्त बहुत लम्बी है और सबके बारे में लिखना मुमकिन नहीं है। इसलिए आज हम शिया समुदाय के विभिन्न क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने वाली कुछ नामचीन हस्तियों का ज़िक्र कर रहे हैं।     

ffसबसे पहले बात करते हैं सियासत की। हिन्दुस्तान की सियासत में शिया नेताओं का ख़ासा असर रहा है। मुख़्तार अब्बास नक़वी भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं। वे लम्बे वक़्त तक संसद में शिया समुदाय का एक प्रमुख चेहरा रहे हैं।

उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार के रूप में 1998 में रामपुर से लोकसभा का चुनाव लड़ा था। पहले ही चुनाव में उन्हें कामयाबी हासिल हुई। इसके बाद वे अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में केन्द्रीय सूचना और प्रसारण राज्य मंत्री बने।

फिर 26 मई 2014 को नरेन्द्र मोदी की सरकार में उन्हें अल्पसंख्यक और संसदीय मामलों का राज्यमंत्री बनाया गया। नजमा हेपतुल्ला के इस्तीफ़े के बाद उन्हें 26जुलाई 2016 को अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय का स्वतंत्र प्रभार सौंपा गया।

फिर 30 मई 2019 को उन्हें मोदी कैबिनेट के दूसरे कार्यकाल में अल्पसंख्यक मामलों का मंत्रालय दिया गया। वे 2010 से 2016 तक राज्यसभा सदस्य भी रहे। पार्टी ने 2016 में उन्हें झारखंड से राज्यसभा भेजा।

ddअल्पसंख्यक मंत्री के तौर पर उन्होंने देशभर में 'हुनर हाट' की शुरुआत की, जिससे दस्तकारों और शिल्पकारों को एक बड़ा मंच मिला। इसकी देशभर में सराहना हुई। वे भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी रहे हैं और एक मुखर राजनीतिक प्रवक्ता के रूप में जाने जाते हैं।

सैयद शाहनवाज़ हुसैन भी भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं। वे भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं। इससे पहले वे भारतीय जनता पार्टी की केन्द्रीय चुनाव समिति के सदस्य भी रह चुके हैं। अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में वे सबसे युवा कैबिनेट मंत्री बने थे और उन्होंने नागरिक उड्डयन और कपड़ा मंत्रालय जैसे प्रमुख विभागों का कार्यभार सौंपा गया था। उन्होंने बिहार सरकार में उद्योग मंत्री के तौर पर भी काम किया है।

d भारतीय उद्योग जगत और वैश्विक व्यापार में भी शियाओं की स्थिति मज़बूत रही है। आईटी दिग्गज व विप्रो के संस्थापक अज़ीम हाशिम प्रेमजी को न सिर्फ़ भारतीय आईटी क्रान्ति का अग्रदूत माना जाता है, बल्कि वे अपनी सम्पत्ति का एक बहुत बड़ा हिस्सा शिक्षा और समाज कल्याण के लिए दान करने के लिए दुनियाभर में मशहूर हैं।

लोककल्याण के मामले में दूर-दूर तक उनका कोई सानी नहीं है। साल 2010 में एशिया वीक ने उन्हें दुनिया के 20सबसे शक्तिशाली लोगों में शामिल किया था। टाइम मैगज़ीन ने 2004 और 2011में उन्हें 100 सबसे प्रभावशाली लोगों की फ़ेहरिस्त में शामिल किया था।

ddकई सालों से उन्हें लगातार '500 सबसे प्रभावशाली मुसलमानों' की सूची में शामिल किया जाता रहा है। वे बेंगलुरु में अज़ीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी के चांसलर के तौर पर भी काम करते हैं। भारत सरकार ने उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया है।

सैयदना मुफ़द्दल सैफ़ुद्दीन दाऊदी बोहरा समुदाय के 53वें अल-दाई अल-मुतलक़ यानी आध्यात्मिक गुरु हैं। वे समुदाय के धार्मिक, सामाजिक, शैक्षणिक दीनी संस्थाओं के प्रमुख भी होते हैं। ये संस्थाएं समुदाय की मस्जिदों, इमामबाड़ों, दरगाहों, क़ब्रिस्तानों  मुसाफ़िरख़ानों, शैक्षणिक संस्थानों और चिकित्सालयों आदि की देखरेख का काम करती हैं।

dउनके मार्गदर्शन में बोहरा समुदाय ने उद्योग, व्यापार, स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण आदि क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर योगदान दिया है। मुम्बई का सैफ़ी अस्पताल और टर्न योर टाउन ग्रीन नामक मुहिम इसकी मिसालें हैं। वे अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी और जामिया मिलिया इस्लामिया के चांसलर भी रहे हैं। वे समुदाय के सर्वांगीण विकास के लिए शिक्षा पर विशेष ज़ोर देते हैं।  

डॉ. हबील खोराकीवाला स्वास्थ्य के क्षेत्र में सराहनीय कार्य करने के लिए जाने जाते हैं। वे वॉकहार्ट लिमिटेड के संस्थापक अध्यक्ष और समूह सीईओ हैं, जिसकी स्थापना उन्होंने 1967में की थी। उन्होंने पर्ड्यू विश्वविद्यालय से फ़ार्मास्युटिकल साइंस में मास्टर्स की डिग्री हासिल की है और अमेरिका के हार्वर्ड बिजनेस स्कूल में एडवांस्ड मैनेजमेंट प्रोग्राम में हिस्सा लिया है।

वॉकहार्ट को एक अंतर्राष्ट्रीय स्तर की हेल्थकेयर और बायोटेक कम्पनी के रूप में स्थापित करने के अलावा वे फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडियन चैंबर्स ऑफ़ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री और इंडियन फ़ार्मास्युटिकल एलायंस के अध्यक्ष भी रह चुके हैं।

dस्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में उनके समर्पण और अभूतपूर्व योगदान के लिए उन्हें 2024में लाइफ़टाइम अचीवमेंट पुरस्कार से नवाज़ा गया था। उन्होंने अपनी उद्यमशीलता की यात्रा पर 'ओडिसी ऑफ़ करेज' नामक एक पुस्तक भी लिखी है। वे मानवीय कल्याण के प्रति समर्पित वॉकहार्ट फ़ाउंडेशन के भी संस्थापक हैं।

शिया समुदाय में बहुत से ऐसे धार्मिक नेता हुए हैं, जिन्होंने मज़हबी और सामाजिक दोनों ही मामलों में समुदाय की रहनुमाई की है और आज भी कर रहे हैं। मौलाना क़ल्बे जव्वाद प्रमुख शिया धर्मगुरु और ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के ख़ास चेहरे हैं।

वे समुदाय के धार्मिक और सामाजिक मुद्दों पर लगातार सक्रिय रहते हैं। वे शिया-सुन्नी एकता पर विशेष बल देते हैं और मुसलमानों में आधुनिक और तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने के प्रबल समर्थक हैं। वे 13अप्रैल 2016को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात करने वाले प्रतिष्ठित मुस्लिम नागरिकों के प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थे।

ffशबाना आज़मी देश की सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्रियों में से एक मानी जाती हैं। उन्होंने श्याम बेनेगल के निर्देशन बनी और 1974में प्रदर्शित फ़िल्म अंकुर से अपना फ़िल्मी सफ़र शुरू किया था और जल्द ही समानान्तर सिनेमा की अग्रणी अभिनेत्रियों में शामिल हो गईं।

उन्होंने व्यवसायिक फ़िल्मों के साथ-साथ कलात्मक फ़िल्मों में भी अपने अभिनय की छाप छोड़ी। उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनय के लिए अनेक पुरस्कारों से नवाज़ा जा चुका है, जिनमें पांच फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार और कई अंतर्राष्ट्रीय सम्मान शामिल हैं।

साल 1988में भारत सरकार ने उन्हें पद्म श्री से सम्मानित किया था। वे पुणे स्थित भारतीय फ़िल्म और टेलीविज़न संस्थान की छात्रा भी रही हैं। उनके पति जावेद अख़्तर शायर और लेखक हैं। भाई सैयद बाबा आज़मी फ़िल्म छायाकार हैं और भाभी तन्वी आज़मी अभिनेत्री हैं। इसमें दो राय नहीं है कि शिया विभिन्न क्षेत्रों में न सिर्फ़ अपने समुदाय, बल्कि देश का भी नाम दुनियाभर में रौशन कर रहे हैं।