अशफाक कायमखानी/जयपुर
राजस्थान का शेखावाटी इलाका हमेशा से अपनी खास पहचान रखता है। इस धरती का इतिहास भामाशाहों और बड़े उद्योगपतियों की कहानियों से भरा पड़ा है। इतिहास के पन्नों को पलटें तो इस क्षेत्र के दानदाताओं ने देश के विकास में बड़ा योगदान दिया है। लेकिन आज के दौर में जब जमीन की कीमतें आसमान छू रही हैं तब यहां एक अलग ही नजारा देखने को मिल रहा है। शेखावाटी जनपद में इन दिनों लोग सार्वजनिक और धार्मिक कामों के लिए अपनी बेशकीमती जमीनें खुलकर दान कर रहे हैं। यह सिलसिला उन लोगों को बड़ी सीख देता है जो महज एक इंच जमीन के टुकड़े के लिए अपनों से लड़ बैठते हैं.

अनवर कायमखानी
। यह उन स्वार्थी लोगों के लिए एक बड़ा सबक है जो यह भूल जाते हैं कि इंसान खाली हाथ आता है और खाली हाथ चला जाता है। जब इंसान दूसरों के कंधों पर सवार होकर श्मशान या कब्रिस्तान की तरफ जाता है तब सब कुछ यहीं धरा रह जाता है।
शेखावाटी जनपद के सीकर जिले में हाल ही में ऐसी कई घटनाएं सामने आई हैं। यहां दानदाताओं ने बिना किसी स्वार्थ के सरकारी और सामाजिक कार्यों के लिए अपनी निजी जमीनें दान में दे दीं। इन प्रेरक कहानियों में से कुछ का जिक्र करना बेहद जरूरी है ताकि समाज में अच्छाई का संदेश फैले।
सीकर जिले के बेसवा गांव में दो मुस्लिम भाइयों ने एक बेहतरीन मिसाल पेश की। उन्होंने गांव में सरकारी अस्पताल के निर्माण के लिए अपनी करोड़ों की कीमती जमीन सरकार को सौंप दी। आज उसी दान की गई जमीन पर एक शानदार अस्पताल भवन बनकर तैयार है।
यह अस्पताल इलाके के हजारों गरीब और जरूरतमंद मरीजों के लिए वरदान साबित हो रहा है। इसी तरह की एक और बड़ी मिसाल फतेहपुर कस्बे में देखने को मिलती है। वहां के निवासी हाजी दाऊद पीनारा ने महिला शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ा कदम उठाया।
उन्होंने कस्बे के मुख्य मार्ग पर स्थित अपनी बहुत कीमती और बड़ी जमीन दान कर दी। इस जमीन पर आज एक सरकारी महिला कॉलेज का संचालन हो रहा है। इस कॉलेज की वजह से क्षेत्र की सैकड़ों बेटियों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिल रहा है।
धार्मिक और सामाजिक सद्भाव की एक और अद्भुत मिसाल कुछ महीने पहले सीकर जिले के गुवाला गांव में देखने को मिली। यहां चार माली समाज के हिंदू भाइयों ने मिलकर एक बड़ा दिल दिखाया। उन्होंने मुस्लिम समाज के लोगों के लिए ईदगाह मस्जिद के निर्माण वास्ते अपनी निजी जमीन निशुल्क दान कर दी।
आज के समय में जब कुछ लोग समाज को बांटने की कोशिशों में लगे रहते हैं तब इन चार भाइयों ने सांप्रदायिक सौहार्द का सबसे बड़ा उदाहरण पेश किया है। उन्होंने नफरत फैलाने वाले तत्वों को अपने इस नेक काम से करारा जवाब दिया है। इस घटना की चर्चा पूरे राजस्थान में हो रही है।

अभी दो दिन पहले ही सीकर जिले के मंगलूणा गांव से भी एक बेहद प्रेरणादायक खबर आई है। गांव के रहने वाले अनवर कायमखानी ने एक अनोखा काम करके जनहित की नई राह दिखाई है। मंगलूणा गांव से पुननी गांव की तरफ जाने वाला आम रास्ता काफी तंग और संकरा था।
इस वजह से ग्रामीणों को आवाजाही में भारी परेशानी का सामना करना पड़ता था। अनवर कायमखानी ने इस समस्या को समझा। उन्होंने रास्ते को चौड़ा करने के लिए अपनी पक्की दीवार को खुद अपने हाथों से तोड़ दिया।
इसके बाद उन्होंने अपनी जमीन में पांच फीट अंदर जाकर नई दीवार खड़ी की। इस तरह उन्होंने अपनी कीमती जमीन को आम रास्ते के लिए छोड़ दिया। अनवर के इस कदम से अब वह रास्ता काफी चौड़ा और सुगम हो गया है। पूरे गांव के लोग अनवर के इस फैसले की जमकर तारीफ कर रहे हैं।
आज के समय में स्थिति यह है कि कृषि भूमि पर एक-दूसरे का रास्ता बंद करने के हजारों मामले अदालतों में लंबित पड़े हैं। गांवों और शहरों में भाई-भाई के बीच एक-एक इंच जमीन के लिए खूनी संघर्ष होते देखे जाते हैं। अदालतों का चक्कर काटते-काटते लोगों की पीढ़ियां गुजर जाती हैं लेकिन विवाद खत्म नहीं होते।
ऐसे तनावपूर्ण माहौल में अनवर कायमखानी द्वारा अपनी पक्की दीवार तोड़कर आम रास्ते के लिए जमीन छोड़ना समाज को झकझोरने वाला सबक देता है। जब अनवर से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने बहुत ही सरल शब्दों में दिल छू लेने वाली बात कही। अनवर ने कहा कि जमीन को आम रास्ते के लिए छोड़ना उनके लिए सबसे बड़ा सदका है। इस्लाम में सदका का मतलब भलाई या दान होता है जिससे दूसरों को फायदा पहुंचे।
शेखावाटी की यह पावन धरती ऐसे ही अनगिनत सच्चे इंसानों से समृद्ध है। यहां के लोग आज भी अपनी पुरानी परंपराओं और नैतिक मूल्यों को संजोकर रखे हुए हैं। बेसवा के मुस्लिम भाइयों का अस्पताल के लिए जमीन देना और फतेहपुर के हाजी दाऊद पीनारा का महिला कॉलेज के लिए जमीन सौंपना यह साबित करता है कि विकास के लिए शिक्षा और स्वास्थ्य सबसे जरूरी हैं।
वहीं गुवाला गांव के माली भाइयों द्वारा ईदगाह के लिए जमीन देना देश की साझा संस्कृति और गंगा-जमुना तहजीब को मजबूत करता है। मंगलूणा के अनवर कायमखानी का कदम हमें सिखाता है कि सामाजिक भलाई के लिए अपनी सुख-सुविधाओं का त्याग कैसे किया जाता है।
यह पूरी रिपोर्ट आज के आधुनिक समाज के लिए एक दर्पण की तरह है। लोग अक्सर अपनी निजी संपत्ति को बढ़ाने में पूरी जिंदगी गंवा देते हैं। लेकिन शेखावाटी के इन आम नागरिकों ने दिखाया है कि असली खुशी दूसरों की मदद करने और समाज को बेहतर बनाने में है।
सरकार और स्थानीय प्रशासन को भी ऐसे दानवीरों का सम्मान करना चाहिए ताकि दूसरों को भी इससे प्रेरणा मिल सके। जब समाज के लोग खुद आगे आकर इस तरह का योगदान देने लगेंगे तो देश के विकास की गति अपने आप तेज हो जाएगी।
अदालतों में चल रहे जमीन के मुकदमों को कम करने में भी यह सोच बहुत मददगार साबित हो सकती है। शेखावाटी के इन दानवीरों की कहानियां सिर्फ खबरें नहीं हैं बल्कि यह मानवता का वो रास्ता हैं जिस पर चलकर एक शांतिपूर्ण और समृद्ध समाज का निर्माण किया जा सकता है। इन सभी दानदाताओं का यह प्रयास आने वाली कई पीढ़ियों तक याद रखा जाएगा और लोग इनसे प्रेरणा लेते रहेंगे।