Paintings adorned with 24-carat gold, craftsman Gopal Prasad Sharma's works travel from Jaipur to the world.
ओनिका माहेश्वरी/ नई दिल्ली
गोपाल प्रसाद शर्मा, जयपुर, राजस्थान के एक प्रमुख मिनिएचर आर्टिस्ट हैं, जिन्होंने अपनी कला के जरिए भारतीय हस्तशिल्प को नया आयाम दिया है। उनकी पेंटिंग्स में न केवल परंपरा की गहराई और समर्पण दिखाई देता है, बल्कि उसमें रियल 24 कैरट गोल्ड फॉयल का बारीकी से किया गया काम भी एक अनोखी चमक उत्पन्न करता है। गोपाल ने अपनी कला यात्रा की शुरुआत बचपन से की, जब उन्होंने अपने पिताजी से इस पारंपरिक शिल्पकला को सीखा और फिर उसे अपनी विशिष्ट शैली में ढाला। उनका मानना है कि कला सिर्फ एक शौक नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक धरोहर है, जिसे संरक्षित करना और उसे आगे बढ़ाना हमारी जिम्मेदारी है। गोपाल की कृतियों ने भारतीय कला को न केवल राष्ट्रीय, बल्कि वैश्विक मंच पर भी नई पहचान दिलाई है। 2007 में उन्हें नेशनल अवार्ड और 2018 में शिल्प गुरु अवार्ड जैसे प्रतिष्ठित सम्मान मिले हैं, जो उनकी कला में निहित समर्पण और उत्कृष्टता को प्रमाणित करते हैं।

उनकी पेंटिंग्स को देखकर ऐसा लगता है जैसे हर लकीर, हर रंग, और हर रूप में एक अलग कहानी छिपी हो। गोपाल जी ने बताया कि उनकी पेंटिंग्स हमेशा कल्पना और इमेजिनेशन से प्रेरित होती हैं। "हम अपने दिल और दिमाग में जो दृश्य बनाते हैं, वही बाद में पेंटिंग में उकेरते हैं। इसमें स्केच, बैकग्राउंड भरने, एम्बॉस वर्क और रियल गोल्ड फॉयल का इस्तेमाल किया जाता है," उन्होंने बताया।
इन पेंटिंग्स को बनाने में एक महीना भी लग सकता है, तो कभी-कभी छह महीने भी। खासतौर पर उनकी "राम दरबार" पेंटिंग, जिसमें हर एक बाल और स्किन टेक्सचर को इतनी बारीकी से उकेरा गया है कि उसे नजदीक से देखने पर आपको एक माइक्रोस्कोप की तरह दिखेगा। गोपाल जी ने बताया, "इस पेंटिंग में हर बाल, हर पैटर्न और हर डिटेल को बहुत सावधानी से उकेरा गया है। अगर आप लेंस से इसे देखेंगे तो आपको यह सब बहुत बारीकी से नजर आएगा। यह पेंटिंग तैयार करने में मुझे छह महीने का समय लगा।"
राम दरबार पेंटिंग का मूल्य लगभग 10 लाख रुपये है, और अन्य पेंटिंग्स की कीमत 80,000 रुपये से लेकर 3 लाख रुपये तक है। इनके काम में रियल गोल्ड फॉयल का इस्तेमाल अत्यधिक बारीकी से किया गया है, जिससे पेंटिंग में एक खास चमक और गहराई आती है।

पारिवारिक विरासत: पुश्तैनी शिल्प व्यवसाय
गोपाल जी का यह काम केवल व्यक्तिगत नहीं है, बल्कि एक परिवारिक विरासत का हिस्सा है। उनके पिताजी, जिनका नाम श्री कृष्ण प्रसाद शर्मा था, राजस्थान के बिजोलिया राजघराने के राज मिस्त्री थे और भित्ति चित्रण (wall painting) में माहिर थे। वे राजघराने के शिल्पकार रहे थे, और इसी तरह गोपाल जी ने भी अपने पिताजी से कला की बारीकियां सीखी। गोपाल जी बताते हैं, "हमारे परिवार में यह कला पीढ़ी दर पीढ़ी चलती आई है। मेरे पिताजी हमारे गुरु थे, जिन्होंने मुझे इस कला के बारे में विस्तार से सिखाया। आज मैं जो कुछ भी हूं, यह सब उनके आशीर्वाद और मार्गदर्शन से ही संभव हुआ है।" यह पारिवारिक व्यवसाय आज भी जीवित है, और गोपाल जी ने इस कला को अपने छात्रों तक पहुंचाने के लिए भी कई प्रयास किए हैं। वे कई विद्यार्थियों को मिनिएचर पेंटिंग सिखाते हैं और इस कला को आधुनिक तरीके से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

मिनिएचर आर्ट: एक अद्वितीय कला रूप
गोपाल जी की कला का सबसे प्रमुख पहलू उनका मिनिएचर पेंटिंग में मास्टर होना है। उन्होंने मिनिएचर पेंटिंग्स को एक नई दिशा दी है, जिसमें हर एक चित्र को अत्यधिक बारीकी से उकेरा जाता है। गोपाल जी ने बताया, "मिनिएचर पेंटिंग्स में हर एक डिटेल पर ध्यान दिया जाता है, चाहे वह चित्र में कोई बाल हो, या फिर स्किन टेक्सचर। यह कला धैर्य और समय की मांग करती है।"
उनकी पेंटिंग्स में सबसे खास बात यह है कि उनमें रियल गोल्ड फॉयल का काम किया जाता है, जो पेंटिंग में एक अनोखा प्रभाव डालता है। यह गोल्ड फॉयल पेंटिंग के हर क्षेत्र में बारीकी से लगाया जाता है, जिससे पेंटिंग में चमक और गहराई आती है।
गोपाल जी की पहली महंगी पेंटिंग
गोपाल जी की कला यात्रा में एक विशेष मील का पत्थर उनकी पहली महंगी पेंटिंग रही है। यह पेंटिंग "गणगौर फेस्टिवल" के विषय पर आधारित थी, जिसे 2007 में 12 लाख 51 हजार रुपये की कीमत पर बेचा गया था। यह पेंटिंग उन दिनों में एक रिकॉर्ड तोड़ कीमत पर बिकी थी और कला प्रेमियों के बीच एक चर्चा का विषय बन गई थी। गोपाल जी ने इस पेंटिंग को तीन साल की कड़ी मेहनत के बाद तैयार किया था। इसके प्रत्येक विवरण में इतनी बारीकी थी कि इसे देखकर किसी भी कला प्रेमी के लिए यह विश्वास करना मुश्किल था कि यह एक मिनिएचर पेंटिंग है। इस पेंटिंग में रियल गोल्ड फॉयल, डिटेल्ड ब्रश वर्क और फाइन एम्बॉस वर्क का प्रयोग किया गया था, जो इसे अत्यंत विशिष्ट बनाता है।

सम्मान और पुरस्कार: गोपाल जी की उपलब्धियाँ
गोपाल प्रसाद शर्मा की कला को भारतीय सरकार और विभिन्न कला संस्थाओं द्वारा कई पुरस्कारों और सम्मान से नवाजा गया है। उनकी कला का सफर इन पुरस्कारों से होकर और भी रोशन हुआ है।
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2007 में नेशनल अवार्ड: गोपाल जी को 2007 में भारत सरकार द्वारा नेशनल अवार्ड से सम्मानित किया गया था।
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2018 में शिल्प गुरु अवार्ड: उन्हें 2018 में भारत के उपराष्ट्रपति द्वारा शिल्प गुरु अवार्ड से सम्मानित किया गया था। यह पुरस्कार भारतीय हस्तशिल्प कला में उनके योगदान को सराहने के रूप में दिया गया।
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पद्मश्री के लिए नॉमिनेशन: गोपाल जी का नाम भारत सरकार द्वारा कई बार पद्मश्री पुरस्कार के लिए नॉमिनेट किया गया है।
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गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड और लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स: गोपाल जी का नाम 2001 में लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज हुआ था, जब उन्होंने "दुनिया की सबसे छोटी पेंटिंग" बनाई थी, जो राई के दाने पर बनी थी।
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साठ देशों से पुरस्कार: गोपाल जी को फ्रैंकफर्ट में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय कला प्रदर्शनी में साठ देशों के बीच पहला पुरस्कार प्राप्त हुआ था।
कला के प्रति समर्पण और प्रशिक्षण
गोपाल जी का मानना है कि कला केवल एक पेशा नहीं, बल्कि एक साधना है। वे अपनी कला के माध्यम से न केवल अपनी पहचान बना रहे हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ी को भी इस कला से जुड़ने का मौका दे रहे हैं। वे कई छात्रों को मिनिएचर पेंटिंग सिखाते हैं और कई कॉलेजों में आर्ट कक्षाओं का संचालन भी करते हैं। उनके पास कॉलेज के बीएफए (Bachelor of Fine Arts) और पीएचडी के छात्र भी इंटर्नशिप करने आते हैं। गोपाल जी का उद्देश्य है कि वे इस कला को पूरी दुनिया में फैलाएं और भारतीय पारंपरिक कला को एक नई पहचान दिलाएं।

अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी और कला का वैश्विक स्तर पर प्रसार
गोपाल जी की पेंटिंग्स का प्रदर्शन न केवल भारत में, बल्कि विदेशों में भी हुआ है। उनकी पेंटिंग्स को मुंबई, दिल्ली और हैदराबाद के ताज होटलों में प्रदर्शित किया गया था। इसके अलावा, उन्होंने फ्रैंकफर्ट में आयोजित एक आर्ट प्रदर्शनी में भी भाग लिया, जहां उन्हें साठ देशों के बीच पहले पुरस्कार से नवाजा गया था। गोपाल जी का मानना है कि भारतीय कला की पूरी दुनिया में पहचान बनानी चाहिए। उनकी कला को देखकर हर कोई भारतीय संस्कृति और इतिहास से जुड़ता है। वे इसे दुनिया के हर कोने तक पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं।

गोपाल प्रसाद शर्मा की मेंटरशिप: ICG की स्टूडेंट्स बीएफए इंटर्नशिप में सीख रही हैं कला
गोपाल प्रसाद शर्मा न केवल एक महान कलाकार हैं, बल्कि उन्होंने अपनी कला को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का कार्य भी बखूबी किया है। उनके मार्गदर्शन में कई छात्र अपनी कला यात्रा को साकार कर रहे हैं। इंडिया इंटरनेशनल कॉलेज फॉर गर्ल्स (ICG) की स्टूडेंट्स, जैसे रिया जैन, अंकिता लत और दिया, जो बीएफए (बैचलर ऑफ फाइन आर्ट्स) की इंटर्नशिप कर रही हैं, उनकी मेंटरशिप में कला की बारीकियों को सीख रही हैं। गोपाल जी का मानना है कि कला को केवल सिखाया नहीं जा सकता, बल्कि इसे महसूस और अनुभव करना जरूरी है, और इसी दृष्टिकोण से वह अपने छात्रों को न केवल तकनीकी ज्ञान देते हैं, बल्कि उन्हें इस कला की आत्मा से भी जुड़ने की प्रेरणा देते हैं। उनकी मेंटरशिप ने कई छात्रों को न केवल अपने कला कौशल को निखारने में मदद की है, बल्कि उन्हें भारतीय हस्तशिल्प की समृद्ध परंपराओं से भी अवगत कराया है।
गोपाल का दृष्टिकोण: कला और संस्कृति का संगम
गोपाल जी का कहना है, "कला केवल व्यक्तिगत नहीं होती, यह एक संस्कृति और परंपरा होती है, जिसे हम आगे बढ़ाते हैं।" उन्होंने अपनी पेंटिंग्स के माध्यम से यह साबित किया है कि भारतीय कला में अनगिनत संभावनाएं हैं। उनके काम में भारतीय कला के साथ-साथ तकनीकी नवाचार और परंपरा का एक सुंदर मिश्रण मिलता है। वे यह मानते हैं कि यदि हमें अपनी संस्कृति और परंपराओं को सहेजना है, तो हमें युवा पीढ़ी को इस कला से जोड़ने और उन्हें इसके महत्व को समझाने की जरूरत है।
गोपाल प्रसाद शर्मा का यह कार्य उनके पुश्तैनी शिल्पकला से जुड़ा हुआ है। उनके पिताजी, जो बिजोलिया राजघराने के राज मिस्त्री थे, भित्ति चित्रण के माहिर थे। गोपाल जी ने इस कला को बचपन से ही सीखा था और इसे न केवल आत्मसात किया, बल्कि अब इसे पूरी दुनिया में फैला रहे हैं। उनका मानना है कि यह कला केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सांस्कृतिक धरोहर है, जिसे उनके जैसे आर्टिस्टों ने जिंदा रखा है।
उन्होंने बताया कि उनकी पेंटिंग्स में बारीकी और मिनिएचर के स्तर पर काम करना एक चुनौती भी है, लेकिन यही उन्हें अलग और विशिष्ट बनाता है। "मिनिएचर पेंटिंग्स की खासियत यही है कि यहां हर एक चित्र को बनाने में जो धैर्य और समय लगता है, वही इस कला को खास बनाता है। इन पेंटिंग्स में हर एक डिटेल पर ध्यान देना बहुत जरूरी होता है," गोपाल जी ने कहा।
गोपाल के काम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि उन्होंने विश्व की सबसे छोटी पेंटिंग्स भी बनाई हैं। इनमें राई के दाने पर महात्मा गांधी, महाराणा प्रताप, मदर टेरेसा, छत्रपति शिवाजी जैसी शख्सियतों की पेंटिंग्स शामिल हैं। इसके अलावा, उन्होंने एक बाल के ऊपर पूरा बारात का चित्रण भी किया, जो अपनी तरह का अद्वितीय कार्य था। इन पेंटिंग्स को देखकर किसी भी कला प्रेमी के मुंह से केवल यही शब्द निकल सकते हैं, "अद्भुत।"
गोपल की कला की प्रदर्शनी अब तक कई प्रमुख शहरों में हो चुकी है। उनकी पेंटिंग्स मुंबई, दिल्ली, हैदराबाद के ताज होटलों में प्रदर्शित की गई हैं और वे फ्रैंकफर्ट जैसी अंतरराष्ट्रीय कला प्रदर्शनी में भी शामिल हो चुके हैं। फ्रैंकफर्ट में आयोजित एक आर्ट एक्सपो में गोपाल जी को साठ देशों के कलाकारों के बीच पहले पुरस्कार से नवाजा गया था।
उनका काम न केवल भारतीय संस्कृति और परंपराओं को प्रदर्शित करता है, बल्कि यह भारतीय कला को एक ग्लोबल मंच पर प्रस्तुत करने का एक अद्वितीय प्रयास भी है। गोपाल जी का मानना है कि कला केवल एक कला नहीं होती, बल्कि यह एक तरह से संस्कृति और इतिहास का दर्पण होती है, जो समय के साथ आगे बढ़ती रहती है।

गोपाल जी ने कहा, "कला में कोई सीमा नहीं होती। हर कला रूप में कुछ नया सीखने और सिखाने की क्षमता होती है। हम अपनी कला के जरिए भारतीय संस्कृति को न केवल अपने देश में, बल्कि पूरी दुनिया में पहचान दिला रहे हैं।"
वर्तमान में, गोपाल जी का यह उद्देश्य है कि वे अपनी कला के माध्यम से आने वाली पीढ़ी को भी इस क्षेत्र में प्रशिक्षित करें और उन्हें भारतीय पारंपरिक कला की गहरी समझ और सम्मान दिलाएं। वे कई छात्रों को इस कला में प्रशिक्षण दे रहे हैं, जिनमें बीएफए के कॉलेज के विद्यार्थी भी शामिल हैं। इसके अलावा, उनकी कला को लेकर कई छात्र उनके ऊपर पीएचडी और मास्टर डिग्री भी कर चुके हैं।
यदि आप भी गोपाल जी की अद्वितीय पेंटिंग्स को अपने घर की सजावट में शामिल करना चाहते हैं, तो सूरजकुंड मेले के स्टॉल नंबर 1200 पर जरूर जाएं। उनकी कला को न केवल देखने, बल्कि उस कला के बारीकी से जुड़ी हर कहानी को समझने के लिए एक बार वहां जरूर जाएं।
गोपाल जी का यह मानना है कि कला न केवल हमारे समाज की पहचान है, बल्कि यह हमारे इतिहास, संस्कृति और संस्कारों का जीवंत रूप भी है। उन्होंने अपनी कला के माध्यम से यह साबित कर दिया है कि अगर सही दृष्टिकोण और समर्पण हो, तो कला के जरिए पूरी दुनिया को एक नई दिशा दी जा सकती है।