नेटफ्लिक्स पर हक ने पाकिस्तान और नाइजीरिया में मचाई धूम, मुस्लिम महिला के अधिकारों पर गहन बहस

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 27-01-2026
Haq's series on Netflix has created a sensation in Pakistan and Nigeria, sparking an intense debate on the rights of Muslim women.
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आवाज द वाॅयस /नई दिल्ली

इस महीने की शुरुआत में नेटफ्लिक्स पर रिलीज़ हुई बॉलीवुड फिल्म ‘हक’ ने न केवल भारत में बल्कि विदेशों में भी जबरदस्त चर्चा का माहौल बना दिया है। यह फिल्म 1985के ऐतिहासिक शाहबानो केस से प्रेरित है और मुस्लिम महिलाओं के रखरखाव के अधिकार को न्यायालय के माध्यम से उजागर करती है। फिल्म में यामी गौतम ने शाज़िया का किरदार निभाया है, जो अपने पति, इमरान हाशमी के खिलाफ भावनात्मक और कानूनी जंग लड़ती है।

जब फिल्म की रिलीज़ हुई, तो आम तौर पर उम्मीद की जा रही थी कि यह भारत में महिलाओं के अधिकार और धार्मिक कानूनों के मुद्दों पर संवाद को बढ़ावा देगा। लेकिन फिल्म ने जो प्रतिध्वनि पैदा की, वह भारत की सीमाओं से कहीं आगे निकल गई। ‘हक’ ने पाकिस्तान और नाइजीरिया में भी दर्शकों का ध्यान खींचा है, दो ऐसे देशों में जहां सांस्कृतिक पृष्ठभूमि बहुत अलग है, लेकिन धर्म, विवाह, महिलाओं के अधिकार और कानून पर बहस समान रूप से जोर पकड़ती है।

नेटफ्लिक्स पर 2जनवरी 2026को रिलीज़ होने के बाद, ‘हक’ ने इन देशों में न केवल लोकप्रियता हासिल की बल्कि वहां के दर्शक इसे एक गंभीर सामाजिक और कानूनी मुद्दे पर साहसी फिल्म के रूप में देख रहे हैं। इस समय यह फिल्म नाइजीरिया और पाकिस्तान में नेटफ्लिक्स पर नंबर वन पर है, और दर्शक इसकी कहानी, अभिनय और संदेश की जमकर तारीफ़ कर रहे हैं।

पाकिस्तानी दर्शकों ने बॉलीवुड की बहादुर फिल्मों की सराहना की

पाकिस्तान में फिल्म की प्रतिक्रिया बहुत ही उत्साहजनक रही है। कई दर्शकों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लिखा कि बॉलीवुड ने इस बार एक बहादुर कदम उठाया है। उन्होंने कहा कि फिल्म ने इस्लामी धर्म की गलत व्याख्या और महिलाओं के खिलाफ सामाजिक अन्याय पर बहस को मजबूती से उठाया है। यामी गौतम की शाज़िया के रूप में भूमिका को दर्शकों ने अत्यधिक प्रभावशाली और भावनात्मक रूप से शक्तिशाली बताया।

फिल्म ने दिखाया है कि कैसे एक महिला अपनी धार्मिक और कानूनी सीमाओं में रहते हुए अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ सकती है। यह संदेश वहां के दर्शकों के लिए प्रेरणादायक साबित हुआ। पाकिस्तान में महिलाओं के अधिकार और उनके खिलाफ होने वाले अन्याय पर बहस अक्सर सीमित रहती है, लेकिन इस फिल्म ने सार्वजनिक और ऑनलाइन मंचों पर चर्चा को बढ़ावा दिया।

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नाइजीरिया में भी फिल्म ने बटोरी प्रशंसा

वहीं, नाइजीरिया में भी फिल्म ने अच्छी-खासी लोकप्रियता हासिल की है। यहां के दर्शकों ने फिल्म की कहानी और अभिनय दोनों की तारीफ़ की है। नाइजीरिया में मुस्लिम आबादी के बीच विवाह और महिलाओं के अधिकारों पर गहन चर्चाएँ चल रही हैं। ‘हक’ ने उन चर्चाओं में नई ऊर्जा और दृष्टिकोण दिया है। फिल्म ने वहां भी यह दिखाया कि कैसे महिलाएं अपने हक के लिए कानूनी और सामाजिक स्तर पर आवाज़ उठा सकती हैं।

फिल्म का सामाजिक और कानूनी संदेश

‘हक’ केवल एक मनोरंजक फिल्म नहीं है, बल्कि यह सशक्त महिलाओं और उनके अधिकारों के लिए जागरूकता फैलाने वाली फिल्म के रूप में सामने आई है। फिल्म ने यह दिखाया कि धार्मिक कानूनों और सांप्रदायिक प्रथाओं के नाम पर महिलाओं के अधिकारों का हनन नहीं होना चाहिए। इसके साथ ही फिल्म ने दर्शकों को यह भी सिखाया कि समाज में बदलाव लाने के लिए साहस और दृढ़ता कितनी महत्वपूर्ण है।

फिल्म के निर्माता और निर्देशक ने भी कहा है कि उनका उद्देश्य केवल एक विवादित केस को दिखाना नहीं था, बल्कि यह बताना था कि कैसे न्याय और सामाजिक समानता के लिए लड़ाई हर समाज में जरूरी है। फिल्म के माध्यम से यह संदेश स्पष्ट रूप से दिया गया है कि महिलाओं के अधिकार सिर्फ कानूनी दस्तावेजों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उन्हें समाज में समान रूप से स्वीकार किया जाना चाहिए।

फिल्म की समीक्षा और बॉक्स ऑफिस पर प्रतिक्रिया

7 नवंबर 2025को फिल्म की थिएटर रिलीज़ हुई थी। रिलीज़ से पहले ही शाहबानो केस के संवेदनशील पहलुओं को लेकर फिल्म को लेकर कानूनी विवाद भी सामने आए। आलोचकों ने फिल्म की प्रस्तुति, अभिनय और सामाजिक टिप्पणी की सराहना की। यामी गौतम और इमरान हाशमी के अभिनय को खास तौर पर उल्लेखनीय बताया गया।

हालांकि बॉक्स ऑफिस पर फिल्म ने अपेक्षित कमाई नहीं की, लेकिन ओटीटी प्लेटफॉर्म पर इसे दर्शकों की भारी प्रतिक्रिया मिली। नेटफ्लिक्स पर फिल्म की सफलता ने यह साबित कर दिया कि सशक्त कहानी और मजबूत संदेश वाला कंटेंट डिजिटल माध्यमों पर दर्शकों को मजबूती से जोड़ सकता है।

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वैश्विक प्रतिक्रिया और बहस

‘हक’ की सफलता यह भी दिखाती है कि बॉलीवुड की फिल्में केवल भारत तक सीमित नहीं रह गई हैं। वे वैश्विक मंच पर सामाजिक और कानूनी मुद्दों पर बहस को प्रेरित कर सकती हैं। पाकिस्तान और नाइजीरिया में फिल्म की प्रतिक्रिया ने यह साबित किया है कि धर्म, विवाह और महिलाओं के अधिकारों जैसे मुद्दे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समान रूप से महत्वपूर्ण हैं।

दर्शकों ने सोशल मीडिया पर फिल्म की कहानियों, किरदारों और संदेश की प्रसंशा करते हुए लिखा कि फिल्म ने उन्हें अपने समाज के भीतर बदलाव लाने के लिए प्रेरित किया। फिल्म ने यह भी दिखाया कि सिनेमा केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता और बदलाव की शक्ति भी रखता है।

नेटफ्लिक्स पर ‘हक’ की सफलता यह दर्शाती है कि सशक्त कहानी, मजबूत अभिनय और साहसी विषयवस्तु के माध्यम से फिल्में केवल मनोरंजन ही नहीं बल्कि समाज में बदलाव की दिशा भी दिखा सकती हैं। यह फिल्म भारतीय महिलाओं के अधिकारों और समाज में उनके स्थान पर बहस को मजबूती देती है, और अब यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण चर्चा का विषय बन चुकी है।

पाकिस्तान और नाइजीरिया जैसे देशों में फिल्म की सकारात्मक प्रतिक्रिया यह साबित करती है कि सच्चे और बहादुर संदेश वाली फिल्में सीमाओं के पार जाकर लोगों के दिल और दिमाग में गहरी छाप छोड़ सकती हैं।