मंसूरुद्दीन फरीदी / नई दिल्ली
गणतंत्र दिवस का उत्सव पूरे देश में बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है, लेकिन राजधानी दिल्ली के राजपथ पर आयोजित भव्य परेड में संस्कृति, सभ्यता और सैन्य शक्ति का अनोखा समन्वय देखने को मिलता है। इस परेड में भाग लेने के लिए देशभर से उन व्यक्तियों को राष्ट्रपति के अतिथि के रूप में आमंत्रित किया जाता है, जो अपने क्षेत्र और समाज में विशेष योगदान दे रहे हैं। इस बार ऐसे ही एक नाम हैं तानिया परवीन, जो बिहार के पूर्वी चंपारण जिले की सिसवा पूर्वी पंचायत की मुखिया हैं।
तानिया ने अपने नेतृत्व और समर्पण से इस पंचायत को पूरे देश में उदाहरण बना दिया है और यह साबित कर दिया है कि अगर दिल और मेहनत से काम किया जाए तो गाँव भी शहर जैसी सुविधाओं से लैस हो सकता है। इसी कड़ी में उन्हें गणतंत्र दिवस 2026के केंद्रीय कार्यक्रम में लाल किले पर विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया है।
तानीया ने इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल करने और सरकारी नौकरी करने के बावजूद अपने गाँव की स्थिति देखकर नौकरी छोड़ दी और पंचायत चुनाव में हिस्सा लिया। उनके प्रयासों के कारण अब सिसवा पंचायत में शिक्षा, स्वास्थ्य और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिले हैं।
उन्होंने अपने गाँव की स्थिति को सुधारने के लिए ठान लिया था और लगातार मेहनत और ईमानदारी से काम कर उन्होंने पंचायत को पिछड़ेपन से निकालकर एक मॉडल ग्राम पंचायत में बदल दिया। सिसवा पूर्वी पंचायत में 48प्रतिशत आबादी अल्पसंख्यक है और पहले यहाँ की लड़कियाँ शिक्षा में रूचि नहीं लेती थीं, लेकिन अब लड़कियाँ उत्साह और जोश के साथ स्कूल जाती हैं।
अल्पसंख्यक आबादी वाले पंचायत होने के कारण तानिया परवीन को कई मोर्चों पर चुनौतियों का सामना करना पड़ा। बच्चों की मजदूरी, कम उम्र में शादी और महिलाओं पर हिंसा जैसी समस्याएं प्रमुख थीं। कोविड के दौरान समाज में कई तरह की गलतफहमियां फैली हुई थीं, लोग वैक्सीन लेने से डरते थे और क्वारंटीन का पालन नहीं करते थे। तानिया ने अपने मजबूत नेतृत्व और स्पष्ट दृष्टि के माध्यम से लोगों को जागरूक किया और उन्हें वैक्सीन लेने और नियमों का पालन करने के लिए प्रेरित किया।
सिसवा पंचायत की मुखिया को यह सम्मान केंद्र सरकार की पंचायत सशक्तिकरण योजना के तहत दिया गया, जिसमें देशभर की प्रमुख पंचायतों के प्रतिनिधियों का चयन किया जाता है। तानिया केवल 32साल की उम्र में मुखिया बनीं और पिछले तीन वर्षों में उन्होंने सिसवा को एक विकसित और आत्मनिर्भर पंचायत में बदल दिया।
उन्होंने महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए स्वास्थ्य, रोजगार और शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया। स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार हुआ, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और लड़कियों की नियमित जांच होती है और आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर जिम्मेदारियां निभाती हैं। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए मनरेगा, पीएम विश्वकर्मा योजना और जीवनका जैसी योजनाओं से जोड़ा गया, जिससे 2000से अधिक महिलाओं को रोजगार मिला और 19दिनों से अधिक रोजगार का अवसर प्रदान किया गया।
लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए स्कूलों में स्मार्ट क्लास और कंप्यूटर क्लास की व्यवस्था की गई। विशेष रूप से लड़कियों के स्कूल छोड़ने की प्रवृत्ति पर काबू पाया गया और बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान के प्रभाव से लड़कियों में शिक्षा के प्रति उत्साह और जोश पैदा हुआ। स्ट्रीट लाइट्स की सुविधा से रात के समय गाँव की आधी आबादी सुरक्षित महसूस करती है।
तानिया परवीन कहती हैं कि जब उन्होंने 2016में मुखिया पद संभाला, तब पंचायत की स्थिति बहुत खराब थी। सड़कें टूटी हुई थीं, नालियों में पानी भरा रहता था और सफाई का कोई व्यवस्थित सिस्टम नहीं था। उन्होंने निर्णय किया कि पंचायत को बदलना है।
लगातार मेहनत और ईमानदारी से काम करने के बाद आज सिसवा में बेहतर सड़कें, व्यवस्थित नालियां, पानी की उचित निकासी और सफाई का विशेष प्रबंध हो चुका है। उन्होंने पैसों पर ध्यान देने के बजाय काम पर जोर दिया, क्योंकि उनका मानना है कि काम अपने आप बोलता है। उनका उद्देश्य पंचायत को शहर के स्तर तक लाना था ताकि ग्रामीणों को भी वही सुविधाएँ मिलें जो शहरी क्षेत्रों में होती हैं।
आज सिसवा पंचायत भवन में आरटीपीएस काउंटर स्थापित किया गया है, जहां जन्म, मृत्यु, पेंशन, निवास, जाति और आय संबंधी सभी दस्तावेज बनते हैं। रोजाना 20-35लोग अपने काम कराने आते हैं और किसी को अन्य कार्यालय जाने की आवश्यकता नहीं पड़ती। सभी कर्मचारी रोजाना हाजिर रहते हैं और मुखिया भी कार्यालय में नियमित रूप से उपस्थित रहती हैं।
महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए तानिया विशेष रूप से सक्रिय हैं। उन्होंने महिला मित्र पंचायत की स्थापना की और महिलाओं को रोजगार और शिक्षा के अवसर प्रदान किए। इसके लिए उन्होंने सिलाई, कंप्यूटर प्रशिक्षण और लड़कियों के लिए मार्शल आर्ट/ताइक्वांडो केंद्र खोलने की योजना बनाई, जिससे लड़कियाँ आत्मनिर्भर और सुरक्षित बन सकें।
तानिया परवीन की अगली योजनाओं में नए रोजगार के अवसर पैदा करना, महिलाओं की शिक्षा को और मजबूत बनाना और पंचायत के कामकाज को डिजिटल रूप देना शामिल है। उनका मानना है कि यदि पंचायतों को सम्मानजनक और मजबूत बनाना है, तो महिलाओं को समान अवसर और पूरा सम्मान देना अनिवार्य है।
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आज तानिया परवीन बिहार की महिलाओं के नेतृत्व की एक मजबूत मिसाल बन चुकी हैं। उनकी मेहनत और समर्पण ने सिसवा पूर्वी पंचायत को न केवल राज्य बल्कि पूरे देश में पहचान दिलाई है। यही कारण है कि वे गणतंत्र दिवस 2026 पर दिल्ली में बिहार और अपनी पंचायत का प्रतिनिधित्व करेंगी और देशभर में ग्रामीण विकास और महिला सशक्तिकरण का प्रेरक संदेश देंगी।