13 साल में 31 ऐप्स: श्रीनगर के उज़ैर मलिक की टेक उड़ान

Story by  ओनिका माहेश्वरी | Published by  onikamaheshwari | Date 27-01-2026
31 apps in 13 years: Srinagar's Uzair Malik's tech journey
31 apps in 13 years: Srinagar's Uzair Malik's tech journey

 

ओनिका माहेश्वरी/ नई दिल्ली  

ऐसे दौर में जब स्मार्टफोन को अक्सर बच्चों और युवाओं के ध्यान भटकाने का सबसे बड़ा कारण माना जाता है, श्रीनगर के सैदपोरा ईदगाह इलाके से आने वाले एक 13 वर्षीय लड़के ने इसी डिवाइस को सीखने, क्रिएशन और संभावनाओं का सबसे मज़बूत टूल बना दिया है। नौवीं कक्षा के छात्र मलिक उज़ैर ने अपनी मेहनत, जिज्ञासा और सेल्फ-लर्निंग के दम पर अब तक 31 मोबाइल एप्लिकेशन और एक वेबसाइट डेवलप कर जम्मू-कश्मीर के उभरते टेक इकोसिस्टम में अपनी अलग पहचान बना ली है।

बचपन में जगी टेक्नोलॉजी की चिंगारी

उज़ैर का कोडिंग और ऐप डेवलपमेंट का सफ़र साल 2021 में शुरू हुआ। उस वक्त वह यह समझने की कोशिश कर रहा था कि मोबाइल ऐप्स और वेबसाइट्स आखिर काम कैसे करती हैं। उसके घर के पास ही उसे पहली प्रेरणा मिली, जब उसके पिता के एक दोस्त को ऐप डेवलपमेंट पर काम करते देखा। उसी पल उज़ैर के भीतर यह जानने की जिज्ञासा पैदा हुई कि “स्क्रीन के पीछे आखिर होता क्या है।” उज़ैर कहते हैं, “मुझे यह जानने की बहुत उत्सुकता थी कि सब कुछ कैसे काम करता है। उसी जिज्ञासा ने मुझे खुद से सीखने के लिए प्रेरित किया।”

बिना फॉर्मल ट्रेनिंग, इंटरनेट बना क्लासरूम

बिना किसी फॉर्मल ट्रेनिंग या संस्थागत सपोर्ट के उज़ैर ने सीखने के लिए इंटरनेट का सहारा लिया। YouTube ट्यूटोरियल्स, ऑनलाइन लर्निंग प्लेटफॉर्म और एडवांस्ड कोर्स उसके क्लासरूम बन गए। पिछले कुछ सालों में उसने वेब डेवलपमेंट और मोबाइल एप्लिकेशन डेवलपमेंट से जुड़े एक दर्जन से ज़्यादा ऑनलाइन कोर्स पूरे किए।

वह बताते हैं कि शुरुआत आसान नहीं थी। “मैं छोटा था और कई कॉन्सेप्ट समझना मुश्किल लगता था, लेकिन क्योंकि IT में मेरी सच्ची दिलचस्पी थी, इसलिए मैंने हार नहीं मानी,” उज़ैर कहते हैं।

होटल बुकिंग से लेकर AI चैटबॉट तक

उज़ैर ने अपने सफ़र की शुरुआत होटल और व्हीकल बुकिंग से जुड़े मिनी ऐप्स बनाकर की। इन ऐप्स का मकसद लोकल लोगों को घर बैठे होटल या गाड़ी बुक करने की सुविधा देना था। कई होटल-आधारित एप्लिकेशन इस समय वेरिफिकेशन प्रक्रिया में हैं और जल्द ही ऐप स्टोर्स पर लाइव होने की उम्मीद है।

AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) के बढ़ते प्रभाव से प्रेरित होकर उज़ैर ने चैटबॉट डेवलपमेंट में भी कदम रखा। अब तक वह कम से कम सात AI चैटबॉट्स बना चुका है, जो बेसिक बातचीत से लेकर यूटिलिटी-बेस्ड असिस्टेंट तक की भूमिका निभाते हैं।

उज़ैर कहते हैं “AI भविष्य है। मैं समझना चाहता था कि यह कैसे काम करता है और इसे लोगों की मदद के लिए कैसे इस्तेमाल किया जा सकता है”

स्कूलों के लिए डिजिटल समाधान

उज़ैर के प्रोजेक्ट्स सिर्फ कमर्शियल नहीं हैं। उसने दो स्कूलों के लिए SIS (School Information System) भी डेवलप किया है। इस सिस्टम के ज़रिये स्कूल ऑनलाइन अटेंडेंस, फीस मैनेजमेंट, बकाया फीस ट्रैकिंग और होमवर्क सबमिशन जैसे काम डिजिटल तरीके से कर सकते हैं। फिलहाल ये ऐप्स इनवाइट-ओनली हैं और लिमिटेड यूज़ में चल रही हैं।

Freevance: बिना कमीशन वाला प्लेटफॉर्म

उज़ैर का सबसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है “Freevance”, जो इस समय वेब-बेस्ड प्लेटफॉर्म के तौर पर उपलब्ध है और जल्द ही मोबाइल ऐप के रूप में लॉन्च किया जाएगा। Freevance को एक नो-कमीशन मॉडल पर डिज़ाइन किया गया है।

जहां दूसरे फ्रीलांसिंग प्लेटफॉर्म्स 10%–20% तक कमीशन लेते हैं, वहीं Freevance पर सिर्फ ₹10 या ₹20 की छोटी-सी फीस देकर जॉब्स पर अप्लाई किया जा सकता है। यहां ग्राफिक डिजाइन, लोगो डिजाइन, वेब डेवलपमेंट और अन्य IT स्किल्स से जुड़ी जॉब्स उपलब्ध हैं। भविष्य में इस प्लेटफॉर्म पर डिजिटल एसेट्स की खरीद-बिक्री की सुविधा भी जोड़ी जाएगी।

“मेरा मकसद है कि छोटे ऑपरेटर्स और युवाओं पर कोई अतिरिक्त बोझ न पड़े। टेक्नोलॉजी मदद के लिए होनी चाहिए, न कि रुकावट बनने के लिए,” उज़ैर कहते हैं।

कश्मीर, टेक्नोलॉजी और युवा

कश्मीर के सोशल माहौल पर बात करते हुए उज़ैर मानते हैं कि टेक्नोलॉजी का सही इस्तेमाल आज पहले से कहीं ज़्यादा ज़रूरी है। “आज बहुत से युवा फोन का गलत इस्तेमाल करते हैं या बुरी आदतों में पड़ जाते हैं। अगर वही फोन स्किल्स सीखने और कुछ बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाए, तो टेक्नोलॉजी वरदान बन सकती है,” वह कहते हैं।

परिवार और सपोर्ट सिस्टम

उज़ैर अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता को देते हैं। शुरुआत में परिवार को उसके जुनून की गहराई का अंदाज़ा नहीं था, लेकिन समय के साथ उन्होंने पूरा सपोर्ट दिया। “मेरे माता-पिता हमेशा मेरे साथ खड़े रहे, चाहे कितनी भी मुश्किलें आई हों,” उज़ैर बताते हैं।

इंटरनेशनल क्लाइंट्स और एज पर बहस

Freevance और अन्य प्रोजेक्ट्स के ज़रिये उज़ैर कनाडा और USA के क्लाइंट्स के साथ भी जुड़ चुका है। उसका मानना है कि स्किल उम्र से ज़्यादा मायने रखती है। “बाहर के देशों में लोग एज नहीं देखते, वे सिर्फ काम की क्वालिटी देखते हैं,” वह कहते हैं।

भविष्य के सपने: IIT और AI एडिटिंग ऐप

आगे की पढ़ाई को लेकर उज़ैर का सपना है कि वह IIT में दाख़िला लेकर अपनी टेक्निकल नॉलेज को और मज़बूत करे। इसके साथ ही वह एक AI-बेस्ड वीडियो एडिटिंग ऐप पर काम कर रहा है, जिसमें यूज़र सिर्फ प्रॉम्प्ट डालकर वीडियो एडिट कर सकेंगे।

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युवाओं के लिए संदेश

उज़ैर का युवाओं के लिए साफ संदेश है: “कभी यह मत सोचो कि मैं नहीं कर सकता। अगर डेडिकेशन है, तो सब कुछ मुमकिन है।” वह IT स्किल्स सीखने के लिए “Apna College” YouTube चैनल को भी रिकमेंड करते हैं।

उम्र नहीं, इनोवेशन मायने रखता है

13 साल की उम्र में 31 ऐप्स और एक वेबसाइट बनाकर मलिक उज़ैर ने यह साबित कर दिया है कि इनोवेशन के लिए उम्र कोई बाधा नहीं होती। श्रीनगर के सैदपोरा ईदगाह से निकली यह कहानी उन हज़ारों युवाओं के लिए प्रेरणा है, जिनके पास टैलेंट तो है, लेकिन सही दिशा और आत्मविश्वास की कमी है। उज़ैर आज यह दिखा रहा है कि अगर जिज्ञासा, मेहनत और सही इस्तेमाल हो, तो एक स्मार्टफोन भी भविष्य बदलने का ज़रिया बन सकता है।