आवाज द वाॅयस/ नई दिल्ली
मुहर्रम 2026 के दौरान देश के अलग अलग हिस्सों से हिंदू मुस्लिम सौहार्द की कई मिसालें सामने आईं। कहीं हिंदू समुदाय ने ताजिया निकाला तो कहीं शिया अलम के जुलूस का स्वागत किया गया। इसी बीच केरल के कासरगोड जिले से इंसानियत की ऐसी कहानी सामने आई है, जिसने लाखों लोगों का दिल जीत लिया है। यहां एक मुस्लिम महिला ने कैंसर से पीड़ित एक हिंदू व्यक्ति की न सिर्फ अंतिम समय तक देखभाल की, बल्कि उनके निधन के बाद हिंदू रीति रिवाजों के अनुसार उनका अंतिम संस्कार भी कराया।
यह घटना सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। लोग इसे इंसानियत, आपसी भाईचारे और सामाजिक जिम्मेदारी की अनोखी मिसाल बता रहे हैं।

मृतक की पहचान 64 वर्षीय नारायणन के रूप में हुई है। वह केरल के कासरगोड जिले के मंजेश्वरम क्षेत्र के चिग्रुपडावु के निवासी थे। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, नारायणन पिछले लगभग एक महीने से कैंसर से जूझ रहे थे। उनकी हालत बेहद गंभीर थी और उनका इलाज कोझिकोड सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में चल रहा था। इलाज के दौरान गुरुवार को उनका निधन हो गया।
इस पूरी घटना में सबसे अहम भूमिका कासरगोड जिला पंचायत की विकास समिति की अध्यक्षा इरफाना इकबाल ने निभाई। इरफाना ने बताया कि करीब एक महीने पहले नारायणन कासरगोड में एक दुकान के बरामदे में बेहद कमजोर और लाचार हालत में मिले थे। स्थानीय वार्ड सदस्य से सूचना मिलने के बाद उन्होंने तत्काल जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को मामले की जानकारी दी।
इसके बाद एक स्थानीय चैरिटेबल संस्था के स्वयंसेवकों की मदद से नारायणन को प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराया गया। शुरू में उन्हें एक वृद्धाश्रम भेजने की योजना थी, लेकिन मेडिकल जांच में पता चला कि वह कैंसर की चौथी अवस्था से पीड़ित हैं। उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें सीधे कोझिकोड मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया।
अस्पताल में डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की हर संभव कोशिश की, लेकिन आखिरकार वह जिंदगी की जंग हार गए। नारायणन के निधन के बाद पुलिस ने उनके परिजनों से संपर्क किया। हालांकि, रिपोर्ट के मुताबिक परिवार के सदस्यों ने शव लेने से इनकार कर दिया।
ऐसे कठिन समय में इरफाना इकबाल ने आगे बढ़कर जिम्मेदारी संभाली। पुलिस की अनुमति मिलने के बाद उन्होंने स्वयं नारायणन के पार्थिव शरीर को लिया और कासरगोड के उप्पला स्थित हिंदू श्मशान घाट में पूरे धार्मिक रीति रिवाजों के साथ उनका अंतिम संस्कार कराया।
एक बुर्का पहने मुस्लिम महिला द्वारा हिंदू परंपरा के अनुसार अंतिम संस्कार किए जाने की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गए। बड़ी संख्या में लोग इरफाना की सराहना कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने इसे इंसानियत की जीत बताया है।
प्रिय @Live_Hindustan इरफ़ाना ने जिस हिंदू का अंतिम संस्कार किया है, वो कोई साधारण हिंदू नहीं बल्कि वो RSS के स्वंय सेवक थे। जिनका नाम नारायणन था। नारायणन को कैंसर हो गया था, और इस स्थिती में उनके परिवार ने भी उनका साथ छोड़ दिया। जिसके बाद इरफाना ने नारायणन को अस्पताल में भर्ती… pic.twitter.com/APVL4oUyIR
— Wasim Akram Tyagi (@WasimAkramTyagi) June 28, 2026
पत्रकार वसीम अकरम त्योगी ने भी इस घटना पर प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि नारायणन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े हुए थे। इसके बावजूद इरफाना ने बिना किसी भेदभाव के उनकी मदद की। उन्होंने बीमारी के दौरान उनका उपचार सुनिश्चित कराया और निधन के बाद सम्मानजनक विदाई भी दी।
इरफाना इकबाल ने इस घटना को लेकर फेसबुक पर भावुक संदेश भी साझा किया। उन्होंने लिखा, "कोई करीबी रिश्तेदार नहीं आया। मैंने नारायणन का अंतिम संस्कार एक बेटी की तरह किया। इंसानियत धर्म और राजनीति से ऊपर है।"

इरफाना ने कहा कि वह भविष्य में भी ऐसे बेसहारा और जरूरतमंद बुजुर्गों की सहायता करती रहेंगी। उन्होंने यह भी बताया कि उनकी संस्था पहले भी कई अनाथ और लावारिस लोगों का अंतिम संस्कार उनके अपने धार्मिक रीति रिवाजों के अनुसार कराती रही है।
इस घटना ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि मानवीय संवेदनाएं किसी धर्म, जाति या विचारधारा की मोहताज नहीं होतीं। जब रिश्ते साथ छोड़ देते हैं, तब इंसानियत ही सबसे बड़ा सहारा बनती है। केरल की इरफाना इकबाल की यह पहल आज समाज के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बन गई है।